Gulab Jamun Village: आखिर यूपी के इस गांव में क्यों खुलीं 100 से ज्यादा गुलाब जामुन की दुकानें, क्या है इसकी कहानी?
Gulab Jamun Village: उत्तर प्रदेश के मैगलगंज गांव की पहचान गुलाब जामुन से होती है. साल 1941 में धनपाल मिष्ठान भंडार से शुरू हुआ यह सफर आज 100 से ज्यादा दुकानों और ठेलों तक पहुंच चुका है. जानिए कैसे एक मिठाई ने पूरे गांव को पहचान दिलाई और स्थानीय लोगों के लिए कमाई का जरिया बनी.
Gulab Jamun Village: जरा सोचिए, उत्तर प्रदेश के एक गांव में 100 से ज्यादा दुकानें सिर्फ एक ही मिठाई बेचती हैं. आखिर ऐसा क्यों है? दरअसल, लखीमपुर खीरी जिले के मैगलगंज गांव की पहचान गुलाब जामुन से होती है. दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर स्थित यह गांव 'गुलाब जामुन विलेज' के नाम से मशहूर है. बताया जाता है कि साल 1941 में मैगलगंज में धनपाल मिष्ठान भंडार नाम की एक दुकान खुली थी. यहां के गुलाब जामुन लोगों को इतने पसंद आए कि धीरे-धीरे आसपास के इलाकों में भी इनकी चर्चा होने लगी. समय के साथ दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर आवाजाही बढ़ी, तो यहां से गुजरने वाले यात्री भी गुलाब जामुन का स्वाद लेने के लिए रुकने लगे.
मिठाई की मांग बढ़ने के साथ दूसरे लोगों ने भी इस कारोबार में हाथ आजमाना शुरू कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 के दशक से मैगलगंज की पहचान गुलाब जामुन के लिए और मजबूत होने लगी. आज यहां 100 से ज्यादा दुकानें और ठेले गुलाब जामुन बेचते हैं. इस कारोबार से स्थानीय लोगों को रोजगार और कमाई का जरिया भी मिला है. वैसे, उत्तर प्रदेश में मथुरा के पेड़े, आगरा के पेठे, लखनऊ के शाही टुकड़े, मेरठ की रबड़ी और जौनपुर की इमरती भी मशहूर हैं. अब इस लिस्ट में मैगलगंज का नाम गुलाब जामुन के लिए शामिल है.
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