आदिवासी समुदाय के पवित्र स्थल ककड़ोलता में उमड़ी भीड़, नेपाल समेत अन्य राज्यों के धर्म अगुवा हुए शामिल

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jharkhand news: आदिवासी समुदाय का पवित्र स्थल गुमला जिला के सिरा-सीता नाला उर्फ ककड़ोलता में सामूहिक प्रार्थना और पूजा का आयोजन हुआ. कोरोना संक्रमण के कारण इस साल भी मेले का आयोजन नहीं हो पाया. इस मौके पर नेपाल समेत विभिन्न राज्य के धर्म अगुवा शामिल हुए.

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Jharkhand news: गुमला जिला अंतर्गत डुमरी प्रखंड के सिरा-सीता नाले उर्फ ककड़ोलता आदिवासियों का उत्पति स्थल माना जाता है. यह धार्मिक स्थल प्रखंड के अकासी पंचायत में अवस्थित है. यहां 3 फरवरी को सामूहिक रूप से धार्मिक पूजा-अर्चना सह मेला का आयोजन होता है, लेकिन इस बार भी कोरोना संक्रमण के कारण मेले के आयोजन पर रोक है. इसी कारण आज के दिन भी यहां सिर्फ पूजा-अर्चना संपन्न हुआ. इस मौके पर नेपाल के अलावा असम, बंगाल, छत्तीसगढ़ समेत झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों के धर्म अगुवा शामिल हुए. हालांकि, कोरोना संक्रमण का असर यहां साफ देखने को मिला.

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आस्था, श्रद्धा व विश्वास से जुड़ा है स्थल

पड़हा सरना प्रार्थना सभा, लोहरदगा की राष्ट्रीय प्रचारिका राधा तिर्की एवं सुशीला उरांव ने बताया कि इस धार्मिक स्थल की मान्यता है कि यह धार्मिक स्थल ककड़ोलता मानव उत्पत्ति स्थल है. जहां हमारे पूर्वजों ने जन्म लिया था. यहां पर उनलोगों को धर्मेश ने पाला, पोसा और बड़ा किया. साथ ही मानव उत्पत्ति कर इस धरती में मानव जाति को बढ़ाया. इसलिए इस धार्मिक स्थल से आदिवासी धर्मावलंबियों का धर्मेश के प्रति मन से आस्था, श्रद्धा व विश्वास जुड़ा हुआ है.

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इस धार्मिक स्थल की मान्यता

इस धार्मिक स्थल की मान्यता है कि आदिवासी समाज के लोग बड़ी श्रद्धा के साथ यहां आते हैं. धर्मेश की सामूहिक प्रार्थना व पूजा-पाठ करते हैं. उन सभी लोगों को धर्मेश द्वारा सुख व शांति प्रदान करते हैं. यहां आकर लोग सुखमय जीवन का अनुभव प्राप्त करते हैं. सरना धर्मावलंबियों में धर्मेश के प्रति प्रेम, आस्था व विश्वास बना रहें. हम सभी सरना आदिवासी प्रकृति के पूजा अर्चना करते है. क्योंकि हमारा धर्मेश निराकार है. मौके पर चिंतामनी उरांव, रंथु उरांव, शीला उरांव, कमली उरांव, एतवा किस्पोट्टा, अनिल उरांव, सुशीला उरांव, नारायण उरांव, महावीर उरांव, पचन उरांव, बिरी भगत सहित सैकड़ों धर्मावलंबी मौजूद थे.

रिपोर्ट : दुर्जय पासवान, गुमला.

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