पांच वक्त के नमाजी संगीतकार को अचानक मिले महादेव के दर्शन, हैरान कर देगी ये कहानी

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बिस्मिल्लाह खान

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उस्ताद बिस्मिल्लाह खान पांच वक्त की नमाज पढ़ते थे, लेकिन भगवान शिव में भी उनकी गहरी आस्था थी. काशी के एक मंदिर से जुड़ा उनका ऐसा किस्सा है, जब उन्हें तीन बार भगवान शिव के दर्शन होने का एहसास हुआ था. आखिर उस दिन मंदिर में क्या हुआ था?

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भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई की धुन जब गूंजती थी, तो लोग बस सुनते रह जाते थे. वह पांच वक्त के नमाजी थे, लेकिन भगवान शिव के प्रति भी उनके मन में गहरी आस्था थी. यही वजह थी कि वह रोज सुबह गंगा स्नान के बाद काशी के बालाजी मंदिर पहुंचते और घंटों शहनाई बजाकर रियाज करते थे. लेकिन इसी मंदिर से जुड़ा उनका एक ऐसा किस्सा है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. बताया जाता है कि उस्ताद साहब को यहां एक-दो नहीं, बल्कि तीन बार भगवान शिव के दर्शन होने का अनुभव हुआ था. आखिर उस दिन मंदिर में ऐसा क्या हुआ था?

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सुबह 4 बजे उठकर करते थे गंगा स्नान, फिर मंदिर में बजाते थे शहनाई

‘The Journey with Romana’ में सोमा घोष के साथ खास बातचीत के दौरान बताया कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के लिए शहनाई सिर्फ एक बाजा नहीं, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी थी. वह रोजाना सुबह करीब 4 बजे उठते, गंगा स्नान करते और फिर काशी के बालाजी मंदिर पहुंच जाते थे. मंदिर में बैठकर घंटों शहनाई बजाना उनका रोज का नियम था. उनके लिए संगीत की कोई जाति या धर्म नहीं था. शायद यही वजह थी कि उनकी शहनाई में भक्ति और सुकून दोनों का एहसास होता था.

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मंदिर में भगवान से कर बैठे शिकायत, फिर हुआ कुछ ऐसा

उनसे जुड़ा एक संस्मरण बेहद दिलचस्प है. बताया जाता है कि एक दिन मंदिर में शहनाई बजाते हुए उन्होंने भगवान से शिकायत कर दी. उनका कहना था कि वह रोज मंदिर आते हैं, घंटों रियाज करते हैं, लेकिन उन्हें वह उपलब्धि क्यों नहीं मिल रही, जिसकी उन्हें उम्मीद है.

इसके बाद वह फिर अपनी शहनाई की धुन में खो गए. तभी अचानक उन्हें एक अलग तरह की खुशबू महसूस हुई. उन्होंने आंखें खोलीं तो सामने गुलाबी रंग के चरण दिखाई दिए. यह देखकर वह कुछ पल के लिए हैरान रह गए.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. बताया जाता है कि जब उन्होंने दोबारा आंखें बंद कर शहनाई बजाई और फिर सामने देखा, तो उन्हें बाघ की खाल पहने और हाथ में त्रिशूल लिए एक आकृति दिखाई दी. उस्ताद साहब ने इसे भगवान शिव के दर्शन के रूप में महसूस किया. उनके जीवन से जुड़ा यह किस्सा आज भी लोगों को हैरान करता है.

फटे कुर्ते में भी अमिताभ बच्चन और बाल ठाकरे के बीच थी जबरदस्त लोकप्रियता

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी सादगी भी लोगों के लिए खास थी. वह अक्सर साधारण और पुराने कुर्ते-पायजामे में नजर आते थे. लेकिन जब वह मुंबई में कार्यक्रम करने पहुंचते, तो उनकी शहनाई सुनने के लिए बड़े-बड़े लोग भी उत्साहित रहते थे. अमिताभ बच्चन और बालासाहेब ठाकरे जैसी हस्तियां भी उनकी कला की मुरीद थीं. उनके साथ तस्वीर खिंचवाना भी लोगों के लिए खास बात होती थी.

एक तरफ पांच वक्त की नमाज और दूसरी तरफ मंदिर में शहनाई की साधना. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की जिंदगी इस बात की मिसाल रही कि संगीत और कला की कोई धार्मिक सीमा नहीं होती. उनकी शहनाई ने हमेशा लोगों को जोड़ने का काम किया.

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