New Bhojpuri Chhath Geet: छठी मईया की मन्नत और पति का इंतजार... टुनटुन यादव का 'चली छठी घाट' है, हर व्रती महिला के दिल की आवाज
टुनटुन यादव का नया छठ गीत 'चली छठी घाट', फोटो- इंस्टाग्राम
New Chhath Geet: भोजपुरी सिंगर Tuntun Yadav का नया और इमोशनल छठ गीत 'चली छठी घाट' रिलीज हो गया है. यह गाना उन महिलाओं की भावनाओं को छूता है जो छठ पर्व पर अपने परदेसी पति के घर लौटने का इंतजार कर रही हैं, और साथ ही छठ की पवित्रता और मन्नतों को भी बड़ी खूबसूरती से दर्शाता है.
New Bhojpuri Tuntun Yadav Chhath Geet: छठ महापर्व की आहट होते ही पूरा माहौल छठी मईया के भक्तिमय गीतों से गूंजने लगता है. दीवाली के साथ ही हर तरफ छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर शुरू हो गई हैं. लोग अपने घरों की सफाई से लेकर घाटों को सजाने में जुट गए हैं. इसी भक्ति और आस्था के बीच, भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री के चर्चित गायक टुनटुन यादव (Tuntun Yadav) का एक नया और बेहद भावुक छठ गीत ‘चली छठी घाट’ (Chali Chhathi Ghat) रिलीज हो गया है. 'बुलेट म्यूजिक' के यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुआ यह गाना आते ही भक्तों के दिलों में अपनी जगह बना रहा है.
'कब आईबो पिया...' परदेसी पति का इंतजार
छठ पूजा एक ऐसा पर्व है, जिसमें दूर-दराज रहने वाला हर शख्स अपने घर लौटना चाहता है. इस गीत की शुरुआत ही एक व्रती महिला के दर्द और इंतजार से होती है. महिला अपने परदेसी पति को याद करते हुए गाती है,
"कब आईबो पिया... की छठ गावे कब आईबो...".
यह लाइन उन हजारों महिलाओं के दर्द को गहराई से बयां करती है, जिनके पति रोजी-रोटी के लिए घर से दूर हैं और वो छठ महापर्व में उनके घर लौटने की राह जोह रही हैं. पूजा के इस पावन मौके पर पति के बिना पर्व अधूरा सा लगता है, और टुनटुन यादव ने इस भावना को बहुत ही खूबसूरती से अपनी आवाज दी है.
'धोई धोई गेहूं सुखावत' - शुद्धता और पवित्रता की झलक
छठ पूजा में सबसे ज्यादा महत्व शुद्धता और पवित्रता का होता है. गाने के बोल में छठ पूजा की इन बारीक और अहम तैयारियों को बहुत ही सलीके से पिरोया गया है. गाने में प्रसाद बनाने की तैयारी का जिक्र करते हुए कहा गया है,
"धोई धोई गेहूं सुखावा तू, मन मन आदित के मनावा...".
इसमें गेहूं धोने से लेकर उसे सुखाने और छठी मईया व भगवान भास्कर का ध्यान करने की वह पूरी पारंपरिक प्रक्रिया शामिल है, जो हर व्रती करता है. इस गीत को सुनते ही आंखों के सामने घर के आंगन में बन रहे प्रसाद और छठ की छटा तैरने लगती है.
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'बबुआ के भार उतारे चले के छठी घाट' - आस्था और मन्नत
इस महापर्व में लोग अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए मन्नत मांगते हैं. इस गाने का सबसे खूबसूरत हिस्सा इसकी हुक लाइन,
"बबुआ के भार उतारे चले के छठी घाट" है.
इसमें एक मां छठी मईया से मांगी गई मन्नत के पूरा होने पर अपना श्रद्धा भाव प्रकट करने के लिए घाट जाने की तैयारी में है. महिला जल्दी-जल्दी घाट पर पहुंचने की बात कह रही है ताकि सूर्य देव और छठी मईया को समय पर अर्घ्य दिया जा सके.
टुनटुन यादव की आवाज का जादू
टुनटुन यादव ने इस गाने को अपनी खास और दमदार आवाज में गाया है. उनकी आवाज में वो ठेठ भोजपुरी का दर्द और पारंपरिक मिठास है, जो छठ के गीतों की असली जान होती है. गाने में जहां एक तरफ पति के लिए इंतजार का भाव है, वहीं दूसरी ओर छठी मईया के प्रति अगाध श्रद्धा है. संगीत और इसके बोल इतने कर्णप्रिय हैं कि यह आपको सीधे यूपी और बिहार के किसी घाट किनारे का अहसास करा देगा.
छठ के इस पावन मौके पर, अगर आप भी महापर्व की भक्ति में डूबना चाहते हैं और घर से दूर रहने वाले अपनों को याद कर रहे हैं, तो टुनटुन यादव का यह नया गीत आपकी भावनाओं को पूरी तरह से छू लेगा.
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