बोले बांसुरी और शहनाई वादक पंडित राजेंद्र- बनारस का रहने वाला हूं लेकिन बिहार से मुहब्बत हो गयी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Apr 2019 9:52 AM
-सुधी होते हैं बिहार के दर्शक, श्रोतापटना : बिहार के दर्शक और श्रोता जितने सुधी होते हैं, उतना कोई और नहीं होता. यह कहना है ग्रैमी अवार्ड सर्टिफिकेट से सम्मानित प्रख्यात बांसुरी और शहनाई वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना का. स्पीक मैके की तरफ से शनिवार को पाटलिपुत्र कॉलोनी में स्थित ऑर्गेनिक किड्स स्कूल में आयोजित […]
-सुधी होते हैं बिहार के दर्शक, श्रोता
पटना : बिहार के दर्शक और श्रोता जितने सुधी होते हैं, उतना कोई और नहीं होता. यह कहना है ग्रैमी अवार्ड सर्टिफिकेट से सम्मानित प्रख्यात बांसुरी और शहनाई वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना का. स्पीक मैके की तरफ से शनिवार को पाटलिपुत्र कॉलोनी में स्थित ऑर्गेनिक किड्स स्कूल में आयोजित एक प्रोग्राम में पंडित प्रसन्ना ने एक के बाद एक कई धुनों को प्रस्तुत कर मन मोह लिया. प्रस्तुत है प्रभात खबर से राजेंद्र प्रसन्ना की हुई बातचीत के प्रमुख अंश.
-बिहार में कितनी बार परफॉर्म कर चुके हैं? यहां आकर आपको कैसा लगता है?
बनारस का रहने वाला हूं लेकिन बिहार से मुझे मुहब्बत जैसी हो गयी है. पटना के अलावा बिहार के अन्य शहरों में आता – जाता रहता हूं. कला जगत में मान्यता है कि जिस आर्टिस्ट ने बिहार में परफॉर्म कर लिया वह कहीं भी वाद्ययंत्र बजा लेगा. एक जमाने में यहां बड़े-बड़े आयोजन होते थे, लेकिन अब इसमें थोड़ी कमी आ गयी है. इसके बाद भी यहां सुनने वालों की अच्छी खासी संख्या है.
-दूसरे राज्यों से किस तरह से अलग हैं?
बिहार के अंदर बंगाल का असर है. जैसे बंगाल में लोगों की आस्था संगीत के प्रति होती है, वैसे ही बिहार में भोजपुरी समेत विभिन्न लोक भाषाओं के गीत – संगीत को सुनने वालों अच्छी आबादी है. पुरानी परंपरा होने के अनुसार लोग संगीत परंपरा को समझते हैं और इसे सम्मान देते हैं.
-यहां के घरानों के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
बिहार में ध्रुपद के घराने बहुत फेमस हैं. गया की ठुमरी की अलग ही पहचान है. कई और घराने हैं. बिहार के संगीत में बहुत वेराइटी है. जितना क्लासिकल में धनी हैं उतना ही लोकगीत में भी धनी है.
राग अहिर भैरव की श्रोताओं ने की सराहना
पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित ऑर्गेनिक किड्स स्कूल में शनिवार को स्पीक मैके का आयोजन किया गया. जिसमें प्रख्यात बांसुरी और शहनाई वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना ने अपनी शुरुआत बांसुरी पर सारेगामा से साथ किया. इसके बाद उन्होंने बांसुरी पर ही जिंगल बेल को पेश किया. इस क्रम में उन्होंने राग यमन में तीन ताल में बंदिश को भी पेश किया. जिसके बोल श्याम बजावे वन में मुरलिया, रास रचाए गोपियन संग थे. इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी के प्रसिद्ध भजन वैष्णव जन को तेने कहिये रे को भी पेश किया. अपनी प्रस्तुति के क्रम में उन्होंने राग नंद तथा चैती को भी पेश किया. इसी क्रम में तबले पर रेल की आवाज को निकाल कर पृथ्वीराज मिश्र ने खूब तालियां बटोरी. प्रस्तुति में तबले पर पृथ्वीराज मिश्र व बांसुरी पर हर्षित शंकर ने साथ दिया. इससे पहले शनिवार को ही सुदर्शन सेंट्रल स्कूल, कंकडबाग में अपनी प्रस्तुति देते हुए कई रागों को पेश किया. यहां राग अहिर भैरव से उन्होंने आगाज किया. इसके बाद उन्होंने रघुपति राघव राजा राम, सारे जहां से अच्छा व वैष्णव जन को जैसे भजन को भी सुनाया.
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