महाराष्ट्र के किसानों ने ‘फल केक आंदोलन' की शुरुआत की, कोरोना नियमों को तोड़ने मुंबई में रेस्टूरेंट पर केस

Updated at : 18 Mar 2021 1:33 PM (IST)
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महाराष्ट्र के किसानों ने ‘फल केक आंदोलन' की शुरुआत की, कोरोना नियमों को तोड़ने मुंबई में रेस्टूरेंट पर केस

महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में किसान, उनके परिवार और कृषक समाज से जुड़े विभिन्न संगठन स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले फलों जैसे कि तरबूज, खरबूज, अंगूर, नारंगी, अनानास और केले से बने केक का इस्तेमाल विशेष आयोजनों में करने को बढ़ावा दे रहे हैं.

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  • स्वत:स्फूर्त आंदोलन को सोशल मीडिया पर भी मिल रही लोकप्रियता

  • फल केक आंदोलन से महाराष्ट्र में बढ़ा है फल उपजों का उत्पादन

  • कोरोना नियमों को तोड़ने को लेकर मुंबई में एक रेस्टोरेंट पर केस

पुणे : कोरोना महामारी के दौरान अपनी आजीविका चलाने के लिए लोग अनेक तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में फल उगाने वाले किसान एक नई पहल करते हुए बेकरी में बने केक की जगह फल से तैयार किए गए केक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं. किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि इस ‘स्वत:स्फूर्त आंदोलन’ को सोशल मीडिया पर भी लोकप्रियता मिल रही है और इसका उद्देश्य किसानों और उनके परिवारों के खान-पान में फल के सेवन को बढ़ावा देना और कोविड-19 महामारी के इस दौर में उत्पाद बेचने का नया तरीका खोजना है. उधर, खबर यह भी है कि मुंबई में कोरोना नियमों को तोड़ने को लेकर एक रेस्टोरेंट पर केस किया गया है.

मीडिया की खबर के अनुसार, महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में किसान, उनके परिवार और कृषक समाज से जुड़े विभिन्न संगठन स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले फलों जैसे कि तरबूज, खरबूज, अंगूर, नारंगी, अनानास और केले से बने केक का इस्तेमाल विशेष आयोजनों में करने को बढ़ावा दे रहे हैं. पुणे के कृषि विश्लेषक दीपक चव्हाण ने मीडिया को बताया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में फल की उपज बढ़ी है और बाजार में मांग से ज्यादा यह उपलब्ध हैं, जिसके कारण इसकी कीमतों में गिरावट आ रही है.

चव्हाण ने बताया कि किसानों को कोरोना महामारी और लॉकडाउन से नुकसान पहुंचा है और अब मांग से ज्यादा आपूर्ति की वजह से उनकी उपज को व्यापारी कम कीमत पर खरीद रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस तरह की दिक्कतों से निपटने के लिए किसानों ने सोशल मीडिया पर एक पहल की शुरुआत की. इसके तहत जन्मदिन, सालगिरह समेत अन्य मौकों पर फल से बने केक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘आम तौर पर ऐसा देखा जाता है कि फल उगाने वाले और उनके परिवार के सदस्य पर्याप्त मात्रा में फल नहीं खाते हैं. इस पहल की वजह से वह ऐसा कर पा रहे हैं और फल वाला केक, बेकरी में बने केक से बेहतर होता है, क्योंकि इसमें पोषक तत्व ज्यादा मात्रा में होते हैं.

मुंबई में रेस्टोरेंट पर केस

उधर, खबर यह भी है कि पुलिस ने कोरोना से संबंधित नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मुंबई के एक मशहूर रेस्टोरेंट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि नगर निकाय की एक टीम ने बुधवार की रात को ब्रीच कैंडी इलाके में स्थित ऑबर-गिन प्लेट्स एंड पॉर्स रेस्टोरेंट पर छापा मारा और मास्क न पहनने के लिए वहां मौजूद 245 लोगों से जुर्माने के तौर पर 19,400 रुपये एकत्रित किए.

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Posted by : Vishwat Sen

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