वित्त मंत्री अरुण जेटली ने माना, भगोड़ा विजय माल्या को भारत लाना काफी मुश्किल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Dec 2017 10:21 PM
नयी दिल्ली : देश में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत करीब 17 बैंकों से कर्ज लेकर इंग्लैड भागने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने के मामले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने माना है कि उन्हें प्रत्यर्पित करवाकर भारत लाना काफी मुश्किल काम है. इसे भी पढ़ें : […]
नयी दिल्ली : देश में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत करीब 17 बैंकों से कर्ज लेकर इंग्लैड भागने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने के मामले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने माना है कि उन्हें प्रत्यर्पित करवाकर भारत लाना काफी मुश्किल काम है.
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उन्होंने हिंदी के समाचार चैनल आजतक की ओर से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर इस बात को स्वीकार किया है. इस चैनल पर एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि भारत से इंग्लैंड फरार हुए कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण का काम मुश्किल है.
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि यह इसलिए मुश्किल है, क्योंकि इंग्लैंड का कानून कारागार के प्रति दूसरा नजरिया रखता होगा. इसलिए वह भारत में जेल की स्थिति का हवाला देते हुए अपराधियों का प्रत्यर्पण नहीं होने देता. हालांकि, अरुण जेटली ने कहा कि इंग्लैंड के कानून में पेचीदगी के बावजूद केंद्र सरकार पूरी तैयारी के साथ प्रत्यर्पण की तैयारी में है.
जेटली के मुताबिक, उनकी सरकार माल्या को वापस लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. वहीं, हाल में केंद्र सरकार द्वारा दिवालियापन कानून के लिए लाये गये अध्यादेश का मकसद सिर्फ उन लोगों को वापस मुख्यधारा के कारोबार में आने से रोकने के लिए है, जो बैंक के कर्ज को डकारने के बाद एक बार फिर कौड़ी के दाम अपनी नीलाम होने वाली कंपनी को बेचना चाहते हैं.
जेटली ने कहा कि यदि यह दिवालिया कानून नहीं होगा, तो विजय माल्या भी एक बार फिर किंगफिशर एयरलाइन को खरीदने के लिए लाइन में लग जाते. उन्हें किंगफिशर कौड़ी के दाम मिल जाती और उनका बैंक से लिया गया हजारों करोड़ का कर्ज बैंक के सिर मढ़ दिया जाता.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने माल्या सरीखे कारोबारियों को रोकने के लिए शर्त रखी है कि यदि कोई वापस अपनी नीलाम होने वाली कंपनी खरीदने को इच्छुक है, तो उसे कम से कम पुराने कर्ज में बैंक का ब्याज भरने की पहल करनी होगी.
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