Jaguar-Land Rover से Volvo तक की मालिक थी Ford, फिर क्या हुआ कि बेचनी पड़ी कंपनी? भारत में समेटा कारोबार, पढ़िए ये उतार-चढ़ाव भरी पूरी कहानी

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फोर्ड का सफरनामा (फोटो: AI)

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1903 में हेनरी फोर्ड द्वारा शुरू की गई फोर्ड मोटर कंपनी ने कारों को आम लोगों तक पहुंचाया और जगुआर व लैंड रोवर जैसे बड़े ब्रांड्स का अधिग्रहण किया. जानिए इस कंपनी ने अपना विशाल साम्राज्य कैसे खड़ा किया, लग्जरी ब्रांड्स क्यों बेचे और भारतीय बाजार में उत्पादन क्यों बंद करना पड़ा.

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एक कंपनी, जिसने कारों को अमीरों के गैराज से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. एक ऐसा ब्रांड, जिसने Jaguar, Land Rover, Volvo और Aston Martin जैसी दुनिया की मशहूर कार कंपनियों को अपने कारोबारी साम्राज्य में शामिल किया. लेकिन वक्त बदला तो इनमें से कई कंपनियों को बेच भी दिया.

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यह कहानी है अमेरिका की Ford Motor Company की. 1903 में शुरू हुई इस कंपनी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में उत्पादन का तरीका बदल दिया. Mustang जैसी स्पोर्ट्स कार और F-Series जैसे पिकअप ट्रक से अपनी पहचान मजबूत की. लेकिन भारत में यही कंपनी अपनी लंबी मौजूदगी के बावजूद कारों का स्थानीय उत्पादन बंद करने पर मजबूर हुई.

आखिर Ford ने इतनी बड़ी कंपनी कैसे बनाई? दुनिया के मशहूर कार ब्रांड खरीदने के बाद उन्हें क्यों बेचा? और अब इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में कंपनी क्या करने की तैयारी कर रही है? आइए, समझते हैं Ford की पूरी कहानी.

1903 में हुई शुरुआत

Ford की स्थापना 16 जून 1903 को अमेरिका के मिशिगन राज्य के डेट्रॉयट में हेनरी फोर्ड ने की थी. उस दौर में कारें महंगी थीं और उन्हें खरीदना आम लोगों के लिए आसान नहीं था.

हेनरी फोर्ड चाहते थे कि कार सिर्फ अमीरों की सवारी न रहे. इसी सोच के साथ कंपनी ने 1903 में अपनी पहली Model A कार ग्राहकों तक पहुंचाई. हालांकि, Ford को असली पहचान 1908 में आई Model T से मिली.

Ford Factory

Model T की सबसे बड़ी खासियत थी कि इसे बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता था. 1913 में Ford ने चलती असेंबली लाइन का इस्तेमाल शुरू किया. इसमें कर्मचारी अलग-अलग चरणों में एक खास काम करते थे और कार धीरे-धीरे तैयार होती जाती थी.

इससे उत्पादन तेज हुआ और लागत घटाने में मदद मिली. 1927 में Model T का उत्पादन बंद होने तक इसकी 1.5 करोड़ से ज्यादा यूनिट बनाई जा चुकी थीं.

यही Ford की पहली बड़ी कामयाबी थी कम समय में ज्यादा कारें बनाना और उन्हें ज्यादा लोगों तक पहुंचाना.

Model A से Mustang तक, ऐसे बढ़ता गया कारों का साम्राज्य

Model T के बाद Ford ने बदलती जरूरतों के हिसाब से नए मॉडल पेश किए.

  • 1927: Model A- Model T की जगह लेने वाली नई कार.
  • 1948: F-Series- पिकअप ट्रकों की सीरीज, जो आगे चलकर कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनी.
  • 1964: Mustang- स्पोर्टी डिजाइन और दमदार प्रदर्शन के लिए मशहूर कार.
  • 1990 का दशक: Explorer- SUV बाजार में कंपनी की मजबूत पहचान.
  • 2000 के बाद: आधुनिक SUV और पिकअप- Ford ने बड़े वाहनों और कमर्शियल गाड़ियों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया.
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अमेरिका में F-Series Ford की सबसे महत्वपूर्ण वाहन सीरीज में शामिल है. Mustang कंपनी की स्पोर्ट्स कार विरासत को आगे बढ़ाती है, जबकि Ranger और Transit जैसे मॉडल पिकअप और कमर्शियल वाहन बाजार में उसकी मौजूदगी मजबूत करते हैं.

लेकिन Ford की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा अभी बाकी था. कंपनी ने सिर्फ अपने ब्रांड के मॉडल बढ़ाने के बजाय दूसरी कार कंपनियों को खरीदकर अपना साम्राज्य फैलाना शुरू किया.

Ford ने Jaguar, Land Rover, Volvo और Aston Martin को क्यों खरीदा?

1990 और 2000 के दशक में Ford ने दुनिया के कई प्रतिष्ठित कार ब्रांड अपने पोर्टफोलियो में शामिल किए. कंपनी की कोशिश थी कि वह सामान्य कारों के साथ लग्जरी कार और प्रीमियम SUV बाजार में भी मजबूत जगह बनाए.

  • Jaguar: Ford ने 1989 में ब्रिटिश लग्जरी कार ब्रांड Jaguar को खरीदा. इससे कंपनी को प्रीमियम सेडान और स्पोर्ट्स कारों के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिला. 2008 में Ford ने इसे Land Rover के साथ Tata Motors को बेच दिया.
  • Land Rover: Ford ने 2000 में BMW से Land Rover खरीदा. यह ब्रांड अपनी ऑफ-रोड क्षमता और प्रीमियम SUV के लिए जाना जाता था. 2008 में Tata Motors ने Jaguar और Land Rover दोनों का अधिग्रहण किया. बाद में दोनों ब्रांड Jaguar Land Rover (JLR) समूह के तहत आ गए.
  • Volvo Cars: Ford ने 1999 में स्वीडन की Volvo Cars को खरीदा था. सुरक्षा और प्रीमियम कारों के लिए पहचान रखने वाले इस ब्रांड को 2010 में चीन की Geely ने खरीद लिया.
  • Aston Martin: Ford ने 1987 में Aston Martin में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की थी. यह ब्रिटिश लग्जरी स्पोर्ट्स कार ब्रांड है. 2007 में Ford ने अपनी हिस्सेदारी निवेशकों के समूह को बेच दी.

इन सौदों के बाद Ford दुनिया के कई बड़े कार ब्रांडों का मालिक बन गया था. लेकिन इन कंपनियों को संभालना आसान नहीं था. हर ब्रांड को नए मॉडल, तकनीक, उत्पादन और मार्केटिंग पर निवेश की जरूरत थी.

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फिर Ford ने इन कंपनियों को बेच क्यों दिया?

Ford ने दूसरी कंपनियों को खरीदकर अपना कारोबार बढ़ाया था, लेकिन 2000 के दशक में आर्थिक दबाव बढ़ने लगा. कंपनी को अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देने और खर्च नियंत्रित करने की जरूरत महसूस हुई.

इसी दौरान Ford ने अपनी कारोबारी रणनीति बदली. 2007 में Aston Martin में अपनी हिस्सेदारी बेची. 2008 में Jaguar और Land Rover को Tata Motors के हाथों बेच दिया. 2010 में Volvo Cars का कारोबार Geely को बेच दिया गया.

इसका मतलब यह नहीं था कि ये ब्रांड खराब हो गए थे. Ford की प्राथमिकताएं बदल रही थीं. कंपनी अपने मुख्य वाहन कारोबार को मजबूत करना और गैर-प्रमुख संपत्तियों से संसाधन जुटाना चाहती थी.

आज Jaguar Land Rover, Tata Motors के स्वामित्व वाले समूह का हिस्सा है. Volvo Cars और Aston Martin भी Ford से अलग कंपनियों के स्वामित्व में हैं.

आज Ford के अंदर कितने कार ब्रांड हैं?

इतनी बड़ी खरीद-बिक्री के बाद सवाल उठता है कि आज Ford के पास कितने कार ब्रांड हैं? कंपनी के दो प्रमुख वाहन ब्रांड हैं- Ford और Lincoln. Lincoln अमेरिका का लग्जरी कार ब्रांड है. Ford के कारोबार को अलग-अलग इकाइयों में भी बांटा गया है:

  • Ford Blue: पेट्रोल और हाइब्रिड वाहन.
  • Ford Model e: इलेक्ट्रिक वाहन और उनसे जुड़ी तकनीक.
  • Ford Pro: कमर्शियल वाहन और फ्लीट सेवाएं.
  • Ford Credit: वाहन खरीदने के लिए फाइनेंस और वित्तीय सेवाएं.

ध्यान रहे कि ये सभी अलग-अलग कार कंपनियां नहीं हैं, बल्कि Ford के कारोबार की अलग-अलग इकाइयां हैं. कंपनी के कई सहायक कारोबार और संयुक्त उद्यम भी हैं, जिनमें उसकी हिस्सेदारी अलग-अलग हो सकती है.

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भारत में Ford की एंट्री, EcoSport से मिली पहचान

Ford ने 1995 में भारत में अपना परिचालन शुरू किया. कंपनी ने यहां Figo, Aspire, Freestyle, EcoSport और Endeavour जैसे मॉडल पेश किए.

इनमें EcoSport ने कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में खास पहचान बनाई. इसकी स्टाइलिंग और ड्राइविंग अनुभव ने ग्राहकों को आकर्षित किया. Endeavour ने प्रीमियम SUV बाजार में अपनी जगह बनाई.

इसके बावजूद कंपनी भारतीय बाजार में लंबे समय तक पर्याप्त बिक्री और मुनाफा हासिल नहीं कर सकी. Maruti Suzuki और Hyundai की मजबूत पकड़ थी. बाद में Tata Motors और Mahindra ने भी नए मॉडल पेश करके प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी.

भारतीय ग्राहकों के लिए कीमत, माइलेज, सर्विस नेटवर्क और रीसेल वैल्यू महत्वपूर्ण हैं. Ford के सामने इन पहलुओं पर प्रतिस्पर्धा करना बड़ी चुनौती बना रहा.

2018 Ford EcoSport S review, test drive - Introduction | Autocar India

2021 में क्यों बंद किया भारत में कारों का उत्पादन?

सितंबर 2021 में Ford ने भारत में घरेलू बाजार के लिए वाहन निर्माण बंद करने का फैसला घोषित किया. कंपनी ने बताया था कि पिछले 10 वर्षों में उसे भारत में 2 अरब डॉलर से अधिक का परिचालन नुकसान हुआ था.

कंपनी के दो प्रमुख उत्पादन केंद्र थे- चेन्नई के पास मरैमलाई नगर और गुजरात का साणंद. यहां से वह घरेलू बाजार के लिए कारें बनाती थी और निर्यात भी करती थी.

हालांकि, Ford ने भारत से जुड़ी सभी गतिविधियां खत्म नहीं कीं. कंपनी ने ग्राहकों के लिए सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और वारंटी सहायता जारी रखने की बात कही थी.

2024 में Ford ने तमिलनाडु में अपने चेन्नई प्लांट को वैश्विक बाजारों के लिए निर्यात उत्पादन पर केंद्रित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार को लेटर ऑफ इंटेंट सौंपा था. इसे भारत में घरेलू कार बिक्री दोबारा शुरू होने की पक्की घोषणा नहीं समझना चाहिए.

बिक्री बढ़ी, फिर घाटे में क्यों आई कंपनी?

Ford की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का राजस्व करीब 187.3 अरब डॉलर रहा. इसके बावजूद कंपनी को 2025 में करीब 8.2 अरब डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि 2024 में उसे करीब 5.9 अरब डॉलर का शुद्ध मुनाफा हुआ था.

इसके पीछे इलेक्ट्रिक वाहन कार्यक्रमों से जुड़े नुकसान, टैरिफ और कारोबार की लागत जैसे कई कारण रहे. कंपनी का समायोजित EBIT 2024 के 10.2 अरब डॉलर से घटकर 2025 में 6.8 अरब डॉलर रह गया.

इससे साफ है कि बड़ी बिक्री के बावजूद मुनाफा कमाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. Ford को एक तरफ अपने पुराने सफल कारोबार को मजबूत रखना है, तो दूसरी तरफ नई तकनीक में निवेश भी करना है.

कितने देशों में कारोबार करती है Ford?

Ford दुनिया के 125 से अधिक देशों में परिचालन करती है. कंपनी का मुख्यालय अमेरिका के मिशिगन राज्य के डियरबॉर्न में है.

अमेरिका के अलावा कनाडा, मैक्सिको, यूरोप और एशिया के कई बाजार उसके लिए महत्वपूर्ण हैं. कंपनी अलग-अलग देशों में वाहन और पुर्जे बनाती है तथा जरूरत के मुताबिक उन्हें दूसरे बाजारों में भेजती है.

भारत में भी Ford ने अपने उत्पादन केंद्रों से पहले कई देशों में वाहन और इंजन निर्यात किए थे. हालांकि, हर देश में कंपनी का अपना कारखाना नहीं है.

फोर्ड इन्फोग्राफिक्स (फोटो: AI)
फोर्ड इन्फोग्राफिक्स (फोटो: AI)

आगे क्या है Ford की योजना?

Ford के सामने आने वाले समय में तीन बड़ी चुनौतियां हैं.

  • मुनाफा बढ़ाना: F-Series और कमर्शियल वाहन कारोबार से कमाई मजबूत रखना.
  • नई तकनीक अपनाना: इलेक्ट्रिक वाहन, कनेक्टेड कार और सॉफ्टवेयर सेवाओं में निवेश करना.
  • लागत नियंत्रित करना: बदलती मांग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच खर्च को बेहतर तरीके से संभालना.

Ford की कहानी बताती है कि दुनिया की बड़ी कंपनी बनना और लंबे समय तक सफल बने रहना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं. Model T ने उसे नई पहचान दी, Mustang और F-Series ने उसकी ताकत बढ़ाई और दूसरी कंपनियों को खरीदने से उसका साम्राज्य फैला. लेकिन बदलते बाजार ने उसे अपनी रणनीति बार-बार बदलने पर मजबूर किया.

नोट: ये लेख प्रभात खबर की 'सफरनामा सीरीज' का हिस्सा है. जिसके तहत हम दुनिया की अलग-अलग कंपनियों की डीप एनालिसिस करेंगे और ये जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे कंपनियों ने अपने मुकाम को हासिल किया और क्या रही उनके सफलता की कहानी. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम एक और कंपनी के बारे में जानेंगे. साथ ही कंपनी के कुछ अनछुए पहलुओं से भी रूबरू होंगे, तो जुड़े रहिए हमारे साथ. अगर आपके पास कोई सलाह या कोई सवाल हो तो आप हमें इस मेल आईडी पर लिख सकते हैं- (imsuyash001@gmail.com). हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि हम आपकी हर उलझन को दूर कर सकें. वाहनों से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें प्रभात खबर.

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