Connected Cars Cybersecurity: क्या इंटरनेट से जुड़ी आपकी कार सुरक्षित है? जानें CERT-In के अहम सेफ्टी टिप्स
कनेक्टेड वाहनों के युग में रखें अपना पर्सनल डेटा सुरक्षित
सॉफ्टवेयर-डिफाइंड और कनेक्टेड कार्स के दौर में आपकी गाड़ी साइबर हैकर्स के निशाने पर आ सकती है. जानिए व्हीकल साइबर सिक्योरिटी का आसान गणित और कार का पर्सनल डेटा सुरक्षित रखने के प्रैक्टिकल टिप्स.
सड़क पर दौड़ती आपकी कार अब केवल एक लोहे का ढांचा और चार पहिए नहीं रही, बल्कि पहियों पर चलता-फिरता एक 'स्मार्ट सुपरकंप्यूटर' बन चुकी है. भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में कनेक्टेड कार्स (Connected Cars) और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (SDV) की मांग तेजी से बढ़ रही है. इंटरनेट से कनेक्टेड इन गाड़ियों में नेविगेशन, रिमोट इंजन स्टार्ट/स्टॉप, लाइव ट्रैकिंग और ऐप-आधारित कंट्रोल जैसे ढेरों फीचर्स मिलते हैं. लेकिन जैसे-जैसे आपकी कार डिजिटल हो रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों और हैकर्स की नजरें भी आपकी गाड़ी पर टिक गई हैं.
कनेक्टेड कार्स में साइबर सिक्योरिटी क्यों बनी सबसे बड़ी चुनौती?
आधुनिक कनेक्टेड कारों में दर्जनों इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट्स (ECU) और जटिल सॉफ्टवेयर कोड्स लगे होते हैं. ये सिस्टम लगातार इंटरनेट, ब्लूटूथ, जीपीएस (GPS) और मोबाइल ऐप्स से जुड़े रहते हैं. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In के अनुसार, वाहनों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता के कारण व्हीकल साइबर सिक्योरिटी (Vehicle Cybersecurity) अब एक बेहद महत्वपूर्ण विषय बन गया है.
यदि हैकर्स किसी गाड़ी के सॉफ्टवेयर में सेंध लगाने में कामयाब होते हैं, तो वे न केवल आपकी निजी जानकारी (जैसे आपकी लाइव लोकेशन, कॉन्टैक्ट लिस्ट और ट्रैवल हिस्ट्री) चुरा सकते हैं, बल्कि गाड़ी के स्टीयरिंग, ब्रेक, इंफोटेनमेंट सिस्टम और डोर लॉक्स का रिमोट ऐक्सेस भी हासिल कर सकते हैं. यह न केवल आपकी गोपनीयता (Privacy) बल्कि आपकी शारीरिक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है.
स्मार्ट कार हैकिंग के मुख्य रास्ते: कहां से होता है खतरा?
- इन्फोटेनमेंट और वाई-फाई सिस्टम: ब्लूटूथ या सार्वजनिक वाई-फाई के जरिए कार से जुड़े फोन का डेटा लीक हो सकता है.
- रिमोट मोबाइल ऐप्स: कार निर्माता कंपनियों के मोबाइल ऐप्स के जरिए हैकर्स गाड़ी के रिमोट फंक्शंस में अनधिकृत पहुंच बना सकते हैं.
- ओटीए (Over-The-Air) अपडेट्स: यदि सॉफ्टवेयर अपडेट के दौरान कोई सुरक्षा खामी रह जाए, तो मालवेयर सीधे गाड़ी में प्रवेश कर सकता है.
डिजिटल दौर में अपनी कार को सुरक्षित रखने के आसान और प्रैक्टिकल टिप्स
एक सतर्क वाहन मालिक के रूप में आप कुछ आसान सावधानियां बरतकर अपनी कार को साइबर हमलों से सुरक्षित रख सकते हैं:
- सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें: जैसे आप अपने स्मार्टफोन को अपडेट करते हैं, ठीक वैसे ही कार के इंफोटेनमेंट और ईसीयू (ECU) सॉफ्टवेयर को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखें. कार कंपनियां सुरक्षा खामियों को ठीक करने के लिए नियमित 'सिक्योरिटी पैच' जारी करती हैं.
- संबद्ध ऐप्स के लिए मजबूत पासवर्ड बनाएं: कार से जुड़े आधिकारिक मोबाइल ऐप के लिए एक मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन रखें.
- सार्वजनिक वाई-फाई और अनजान यूएसबी पेनड्राइव से बचें: अपनी कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम को कभी भी अनजान या असुरक्षित सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट न करें. साथ ही, किसी अनजान पेनड्राइव को कार में लगाने से बचें.
- ब्लूटूथ और वाई-फाई बंद रखें: जब आप कार में नेविगेशन या म्यूजिक का इस्तेमाल न कर रहे हों, तब ब्लूटूथ और वाई-फाई को बंद रखें ताकि कोई अनधिकृत डिवाइस आपकी कार से पेयर न हो सके.
- कार बेचने या सर्विस पर देते समय डेटा रीसेट करें: अपनी गाड़ी को सर्विस सेंटर पर देते समय या सेकेंड हैंड बाजार में बेचते समय इंफोटेनमेंट सिस्टम से अपना पर्सनल फोन पेयरिंग डेटा और लोकेशन हिस्ट्री डिलीट (Factory Reset) कर दें.
सड़क सुरक्षा के साथ-साथ अब 'डिजिटल सुरक्षा' भी हर कार मालिक की प्राथमिकता होनी चाहिए. ऑटोमोबाइल कंपनियां सुरक्षा मानकों को मजबूत कर रही हैं, लेकिन आपकी सतर्कता ही आपकी स्मार्ट कार को सबसे ज्यादा सुरक्षित रखेगी.
सिद्धांत रूप में और रिसर्च टेस्ट्स में ऐसा संभव पाया गया है. हालांकि, आधुनिक कारों में कंपनियां एडवांस एन्क्रिप्शन और फायरवॉल का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन सुरक्षा अपडेट न करने पर यह खतरा बना रहता है.
जब आप अपने स्मार्टफोन को कार से कनेक्ट करते हैं, तो आपकी कॉल हिस्ट्री, कांटेक्ट लिस्ट, सेव की गई लोकेशन हिस्ट्री (घर/दफ्तर का पता) और मैसेज जैसी जानकारी कार की मेमोरी में सेव हो जाती है, जो लीक हो सकती है.
हमेशा अधिकृत (Authorized) सर्विस सेंटर से ही अपनी कार की सर्विसिंग और सॉफ्टवेयर अपडेट करवाएं. साथ ही, थर्ड-पार्टी अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज या प्लग-इन डिवाइस लगाने से बचें.
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