अभिमत

Columns, Review, Guest Authors

संघर्ष और प्रतिरोध के सौ वर्ष

।। इ एस रेड्डी ।।
- दक्षिण अफ्रीका में 1912 में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस की स्थापना में महात्मा गांधी का महत्वपूर्ण सहयोग था, जिन्होंने तब तक रंगभेद के खिलाफ़ व्यापक जनसंघर्ष की शुरुआत कर दी थी. -

ईरान की पहेली में फ़ंसा भारत

।। डॉ हर्ष वी पंत ।।
- वर्तमान में भारत का महत्वपूर्ण हित अरब खाड़ी से जुड़ा है. जैसे-जैसे अरब और ईरान के बीच तनाव बढ़ेगा, भारत का अरब में सिक्का मजबूत होगा और भारत व ईरान के बीच संबंध मजबूत होंगे. -

किंगफ़िशर का संकट देश का संकट कैसे!

।। अवधेश कुमार ।।
ऐसा लग रहा है जैसे किंगफ़िशर का संकट देश का संकट हो गया हो. न जाने दुनिया की कितनी विमानन कंपनियां बंद हुईं, पर किंगफ़िशर को लेकर भारत में जैसा वातावरण बनाया जा रहा है, वैसा कहीं नहीं देखा गया.

मंद हो रहे आर्थिक सुधार

।।डॉ भरत झुनझुनवाला।।
आम आदमी को पिछले कई वर्षो से जो त्रास दिया जा रहा था, वह तीव्र आर्थिक विकास से कुछ हद तक ढक गया था. मंदी के कारण अब इन नीतियों के दुष्प्रभाव पर परदा डालना संभव नहीं रह गया है.

जनादेश हथियाने की कुटिलताओं का दौर

।।कृष्ण प्रताप सिंह।।
अगर आप किसी ऐसे खेल की कल्पना कर सकते हैं जिसे खेलने वाले न तो उसके नियमों की परवाह करते हों, न ही अंपायरों के फ़ैसलों की और किसी भी कीमत पर ’बस, जीतना ही जीतना‘ चाहते हों, तो आप उत्तर प्रदेश की ताजा चुनावी स्थिति को ठीक से समझ सकते हैं.

राजनीति से प्रेरित है विरोध

।। सी पी भांभरी ।।
- भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए एनसीटीसी अब तक की शायद सबसे सख्त पहल है, लेकिन राज्य सरकारों के सहयोग के बिना एनसीटीसी के लिए एक कदम भी चलना संभव नहीं हो सकेगा.

चुनावी वायदे और आदर्श आचार संहिता

।। सुधांशु रंजन ।।
केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा खेद जताने के बाद चुनाव आयोग ने मामले को खत्म कर दिया था, किंतु तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने अल्पसंख्यकों को पिछड़ों के लिए तय 27 प्रतिशत आरक्षण के कोटे से 9 प्रतिशत आरक्षण देने की बात दोहरा कर आचार संहिता पर बहस तेज कर दी है.

नेता और नैतिकता की परिभाषा

।।एमजे अकबर।।

भारतीय कभी भी सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और निजी जीवन के दबाव को लेकर दुविधा में नहीं रहते. वे गांधी को राष्ट्रपिता स्वीकार करते हैं, उनकी ऐसी स्वीकारोक्ति के बावजूद भी जो किसी दूसरे समाज में पिता की उनकी छवि को तार-तार कर देती. कई भारतीय प्रधानमंत्रियों को लेकर अफ़वाहें सुनी जाती रही हैं, लेकिन मतदाता को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता.

ईरानी परमाणु हथियारों के खतरे

।।इतमर रैबिनोविच।।

इस्रइल के लिए बुद्धिमतापूर्ण कदम यही होगा कि वह अपने पूर्व प्रधानमंत्री शेरॉन के सचेत करने वाले बयानों को याद करे और अमेरिकी प्रशासन पर कूटनीतिक अभियान के लिए दबाव बनाये.

यौन वर्जनाओं को तोड़ते संचार माध्यम

।।पंकज चतुर्वेदी।।

कर्नाटक विधानसभा में पोर्न वीडियो देखते चार मंत्री पकड़े गये, उनके इस्तीफ़े हुए, दो-तीन दिन हो-हल्ला हुआ और फ़िर देश अपनी गति से चल निकला. यह प्रकरण समाज में फ़ैलती जिस बीमारी की ओर इशारा कर रहा था, उसका कोई इलाज नहीं किया गया. यह प्रकरण हमें फ़िर याद दिलाता है कि संचार के आधुनिक साधन अश्‍लीलता का खुला बाजार बन गये हैं.