सुकना मामला:एएफटी की टिप्पणी,कहा,वीके सिंह ने गिरायी सेना की प्रतिष्ठा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Sep 2014 12:22 PM
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नयी दिल्ली:सशस्त्र बल नयायाधिकरण(आर्म्ड फोर्सेस ट्रब्यूनल)पूर्व थलसेनाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंहके फैसले के खिलाफ ने लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ का कोर्ट मार्शल रद्द कर दिया है. वीके सिंह ने इस मामले मे जांच करवाई थी जिसमें कथित सुकना घोटाने में शामिल होने के लिए पीके रथ के खिलाफ कोर्ट मार्शल का फैसला किया […]
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नयी दिल्ली:सशस्त्र बल नयायाधिकरण(आर्म्ड फोर्सेस ट्रब्यूनल)पूर्व थलसेनाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंहके फैसले के खिलाफ ने लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ का कोर्ट मार्शल रद्द कर दिया है. वीके सिंह ने इस मामले मे जांच करवाई थी जिसमें कथित सुकना घोटाने में शामिल होने के लिए पीके रथ के खिलाफ कोर्ट मार्शल का फैसला किया गया था.
ट्रब्यूनल अपने फैसले में कहा कि जनहरल वीके सिंह ने नियमों का उल्लंघन किया और मिलिट्री कोर्ट को प्रभावित किया है. साथ ही अपने फैसले में कहा कि वीके सिंह ने बदले की भावना से एक सीनियर आफिसर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है.
पीके रथ ने मीडिया से बात करते हुए इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा है कि वे आर्म्ड फोर्सेस ट्रब्यूनल के आभारी है. रथ ने कहा कि इसे घोटाला कहा ही नहीं जाना चाहिए. मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. उनका कहना है कि इससे उनके 40 साल के सम्मान को ठेस पहुंची है और अब उसकी क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती.साथ ही पीके रथ ने कहा कि आर्मी एक्ट आजादी से पहले का है और अब उसमें बदलाव किया जाना चाहिए.
गौरतलब है कि 2011 में कथित घोटाने में रथ को दोषी ठहराया था. उन पर सुकना घोटाले में शामिल होने का आरोप था .उन पर पश्चिचम बंगाल के सुकना में सैन्य छावनी के करीब ही 70 एकड़ की जमीन पर शिक्षण संस्थान ने बनाने के लिए एक निजी बिल्डर को अनापत्ति प्रमाणपत्र देने का आरोप था.
यह मामला 2008 में सामने आया था. उस समय जनरल वीके सिंह पूर्वी थलसेना कमांडर थे. उन्होंने कथित जमीन घोटाने मामले में कोर्ट आफ एन्क्वाइरी की.
न्यायाधिकरण ने इस मामले में वीके सिंह पर एक लाख का जुर्माना लगाया है. पीके रथ तीन सितारा रैंक वाले ऐसे पहले अधिकारी थे जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी.
न्यायमूर्ति सुनील हाली की अध्यक्षता वाली न्यायाधिकरण की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को सभी आरोपों आरोपों से बरी करते हुए कहा कि वे 12 फीसदी ब्याज के साथ सभी लाभ की बहाली के हकदार है.
पीके रथ ने वीके सिंह के खिलाफ याचिका दायर की थी. उन्होंने वीके सिंह पर मामले को अनुचित महत्व देने का आरोप लगाया था.उनका आरोप था कि त्तकालीन सैन्य लेफ्टिनेंट जनरल अवधेष प्रकाश के बनती नहीं थी.
वीके सिंह का जन्म तिथि वाला विवाद जब आया हुआ तो वीके सिंह इसके लिए प्रकाश को जम्मेदार ठहराया था. जन्म तिथि को लेकर विवाद के कारण ही वीके सिंह समय से पहले सेवानिवृत हो गए थे.न्यायधिकरण के मुताबिक मामले के कुछ गवाह दोषी पाए गए थे लेकिन थलसेना ने उन्हें मामूली सजाएं दीं.
न्यायधिकरण के मुताबिक उनमें से कुछ लोगों को थलसेनाध्यक्ष के तौर पर पदोन्नति भी दी गई .लेकिन उनकी सजाएं दरकिनार कर जनरल कोर्ट मार्शल ने उनका बयान दर्ज किया गया और उसके बाद ही फैसला किया
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