अपने वर्तमान काम से संतुष्ट रहना सीखें

लगभग डेढ़ दशक पुरानी बात है. मैं उस समय दिल्ली में नौकरी कर रहा था. हमारी कंपनी में एक लड़का रजनीश आया. उसकी बहाली जूनियर पोस्ट पर हुई थी. वह अपने काम से खुश नहीं रहता था और हमेशा यही कहता कि काश! अगर मेरा प्रमोशन हो जाता, तो लाइफ़ सेट हो जाती.

उसका प्रमोशन भी हुआ. मैंने पूछा कि खुश हो. उसने कहा, हां. लेकिन कुछ ही दिनों बाद फ़िर से वही पुराना राग. काश! मैं मैनेजर बन जाता.. तीन सालों बाद जब मैनेजर बन गया, तो फ़िर नया राग..काश! मैं जीएम होता.

कहने का मतलब यह कि वह किसी भी स्थिति में खुश नहीं था. हम जो भी काम कर रहे हों, हमें यह समझना चाहिए कि हम विशिष्ट हैं. अपने गुणों और संसाधन को पहचान कर उसका बेस्ट यूज करने की कोशिश करनी चाहिए.

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी एक आदमी पत्थर काटने का काम करता था, लेकिन वह खुद से खुश नहीं था. उसने पत्थर काटने का काम बंद कर दिया और नौकरी खोजने के लिए निकल पड़ा. एक दिन वह नौकरी के सिलसिले में एक व्यापारी से मिलने गया. वहां उसने उस व्यापारी का घर देखा. घर देखते ही उसके मन में ख्याल आया की काश! वह भी एक अमीर व्यापारी बन पाता और उसके पास भी इतना ही आलीशान मकान होता.

भगवान ने उसकी सुन ली और उसे एक व्यापारी बना दिया. दिन बीतते गये और एक दिन राजा का मंत्री राज्य के दौरे पर निकला. उसने देखा कि राजा का एक मंत्री दूसरे व्यापारी के घर आ रहा है. डरा हुआ व्यापारी मंत्री के आगे घुटने के बल झुक गया. उसने सोचा की काश! भगवान मुझे भी मंत्री बना देता. भगवान ने एक बार फ़िर से सुन ली और उसे मंत्री बना दिया.

मंत्री बनाने के बाद उसे लगातार राज्य के दौरे करने पड़ते. एक दिन भरी दोपहरी में जब सूरज अपनी पूरी गरमी के साथ चमक रहा था. मंत्री बने आदमी को लगा कि सूरज ही सबसे ज्यादा शक्तिशाली है और उसने सूरज बनाने की इच्छा की. भगवान ने उसे सूरज भी बना दिया. सूरज बनने के बाद उसने महसूस किया कि बादल सूरज की किरणों को रोक देते हैं.

उसे लगा कि बादल बन कर वह ज्यादा खुश होगा और भगवान ने उसे बादल बना दिया. तब उसने सोचा कि हवा सबसे ज्यादा शक्तिशाली है. बादलों को उड़ाकर ले जाती है, लेकिन चट्टान को नहीं हिला सकती. उसने सोचा काश ! मैं चट्टान होता ! जो सबसे ज्यादा मजबूत है. भगवान ने उसे चट्टान बना दिया.

फ़िर एक दिन चट्टान ने देखा, हथौड़ा और छेनी लिए एक पत्थर काटनेवाला चट्टान की तरफ़ चला आ रहा था. अब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. कोई भी संपूर्ण नहीं होता. अपने गुण और संसाधन पहचान कर उनका बेहतरीन उपयोग ही किसी को संतुष्ट बना सकता है.

* बात पते की
* कोई भी संपूर्ण नहीं होता, यह बात हमें हमेशा याद रखनी चाहिए.
* आप जो भी काम कर रहे हों, आपको उस काम से संतुष्ट होना चाहिए.
* अपने गुण और संसाधन पहचान कर उनका बेहतरीन उपयोग ही किसी को संतुष्ट बना सकता है.

This Article Posted on: February 16th, 2012 in : Sections.

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