पाक सेना को अपने टीवी चैनल की जरुरत

Published at :16 Dec 2013 3:39 PM (IST)
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पाक सेना को अपने टीवी चैनल की जरुरत

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने सुझाव दिया है कि देश में भारतीय टीवी और समाचार चैनलों की बढती पैठ रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना को एक टीवी चैनल शुरु करना चाहिए.‘द न्यूज’ समाचार पत्र ने आज बताया कि पाकिस्तानी सेना की प्रतिष्ठित ‘ग्रीन बुक’ के लिए लिखे गए रणनीति पत्रों में […]

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने सुझाव दिया है कि देश में भारतीय टीवी और समाचार चैनलों की बढती पैठ रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना को एक टीवी चैनल शुरु करना चाहिए.‘द न्यूज’ समाचार पत्र ने आज बताया कि पाकिस्तानी सेना की प्रतिष्ठित ‘ग्रीन बुक’ के लिए लिखे गए रणनीति पत्रों में से एक में यह विचित्र सिफारिश की गई है. पत्र में कहा गया है, ‘‘ भारतीय मीडिया की घुसपैठ को करगिल मामले के दौरान रोका नहीं जा सका था.’’ ये रणनीति पत्र ग्रीन बुक के ‘सब कन्वेन्शनल वारफेयर’ नामक विशेष अध्याय का हिस्सा हैं.

मेजर जनरल मोहम्मद आजम आसिफ ने भारतीय टीवी और समाचार पत्रों की पैठ को प्रभावशाली तरीके से नहीं रोक पाने पर पाकिस्तानी मीडिया की आलोचना करते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना का एक टी वी चैनल और रेडियो स्टेशन होना चाहिए ताकि ‘‘भारतीय प्रचार’’ का मुकाबला किया जा सके. आसिफ ने दावा किया कि पाकिस्तानी मीडिया में विश्वसनीयता की कमी है इसलिए संकट के समय या कोई महत्वपूर्ण घटना होने पर लोगों को ऑल इंडिया रेडियो, बीबीसी और भारतीय चैनलों को देखना पड़ता है.

आसिफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध का हवाला देते हुए कहा ‘‘भारतीय मीडिया का मुख्य ध्येय दुश्मन को मनोवैज्ञानिक तरीके से हराना और नैतिक रुप से निहत्था करना था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे शत्रु :भारत: ने मीडिया शक्ति हासिल करने के लिए काफी प्रयत्न किया है और वह इसे अपने लाभ के लिए अच्छी तरह इस्तेमाल कर रहा है.’’ आसिफ ने कहा, ‘‘ कई टेलीविजन चैनलों और सूचना प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय प्रगति के साथ भारत इलेक्ट्रानिक मीडिया के मामले में पाकिस्तान से बहुत आगे निकल गया है.’’ पाकिस्तान सेना आंतरिक प्रकाशन के तहत हर दो वर्षों में ग्रीन बुक प्रकाशित करती है.

एक सैन्य अधिकारी ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि यह जरुरी नहीं है कि ग्रीन बुक सेना के आधिकारिक नजरिए का प्रतिनिधित्व करे. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मौजूदा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने अपने रणनीति पत्रों में चिंता जताई है कि भारतीय टीवी और प्रिंट प्रकाशन पाकिस्तान में विस्तृत स्तर पर उपलब्ध हैं.

इसमें कहा गया है कि सैन्य दायरे में ऐसी भावना है कि भारतीय टीवी चैनलों की बढती पैठ ने पाकिस्तान को इस हद तक हतोत्साहित कर दिया है कि भारत को एक ऐसे शत्रु के तौर पर देखा जा रहा है जिसे युद्ध में हराया ही नहीं जा सकता है. ग्रीन बुक में यह भी दावा किया गया है कि 1999 में करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान को इसलिए हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि मीडिया ने लगातार भारतीय बलों की बहादुरी की प्रशंसा की और पाकिस्तानी सेना का जोश नष्ट कर दिया.

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