Purnea : शराबी पति से परेशान पत्नी ने दी तलाक की अर्जी, कहा- पहले तय करे दारू चाहिए या पत्नी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Apr 2022 1:10 PM
Purnea : पूर्णिया में शराबी पति से परेशान एक पत्नी तलाक लेने पर अडिग है. घर में बात नहीं सुलझने पर मामला पुलिस परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा. पत्नी ने कहा कि पति पहले तय करे कि दारू चाहिए या पत्नी.
Purnea : पूर्णिया में शराबी पति से परेशान एक पत्नी तलाक लेने पर अडिग है. घर में बात नहीं सुलझने पर मामला पुलिस परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा. केंद्र में पति-पत्नी दोनों पहुंचे. पत्नी की शिकायत थी कि उसका पति शराबी है. शराब पीकर रोज गाली-गलौज और मारपीट करना उसकी आदत हो गयी है.
पत्नी ने कहा कि रोज-रोज के झंझट से तंग आ चुकी है. उसके सिर पर दो बच्चों की जवाबदेही है. इसलिए वह किसी भी कीमत पर उसके साथ नहीं रहेगी. पहले वह तय करे कि उसे दारू चाहिए या पत्नी. हालांकि, पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में महिला को काफी समझाने की कोशिश की गयी, लेकिन वह तलाक लेने पर अड़ी रही. अंतत: केंद्र को कहना पड़ा कि यहां उजड़े घर को बसाया जाता है, तलाक नहीं. यदि तलाक लेना है, तो आप लोग न्यायालय का शरण ले सकते हैं.
वहीं, पूर्णिया की रहनेवाली महिला (पत्नी) और सहरसा के रहनेवाले उसके पति का मामला पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में आया. इसमें पत्नी का आरोप था कि उसका पति उसे प्रताड़ित करता है और उसने दूसरी शादी भी कर ली है. इसलिए वह उसके साथ किसी कीमत पर नहीं रहेगी. उसे भरण पोषण के लिए उचित रुपये दिलवाये जाएं.
केंद्र ने कहा कि भरण पोषण लेना है, तो इसके लिए न्यायालय जाइए. वहीं, लड़का पक्ष का कहना था कि मामले को लेकर पंचायत हुई है. पंचायत में तय हुआ है कि संबंध विच्छेद के एवज में दो लाख 10 हजार रुपये लड़का पक्ष लड़की को देगा. केंद्र ने जब पंचायत के कागजात मांगे, तो दोनों पक्षों ने कागजात प्रस्तुत नहीं किये.
केंद्र ने कहा कि मामला न्यायालय से सुलझा लें, तब जाकर दोनों पक्ष इस बात पर राजी हुए कि लड़का पक्ष द्वारा लड़की पक्ष को ढाई लाख रुपये दिया जायेगा. लड़का पक्ष की ओर से बैंक का एक चेक ढाई लाख रुपये का दिया गया.
परिवार परामर्श केंद्र में 35 मामलों की सुनवाई की गई. इनमें नौ मामलों का निष्पादन किया गया. इनमें सात मामले पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद के थे, जिन्हें सुलझा लिया गया, जबकि दो मामलों में दोनों पक्षों की सहमति नहीं होने के कारण उन्हें थाना या न्यायालय में सुलझाने का सुझाव दिया गया. मामले को सुलझाने में केंद्र की संयोजिका सह महिला थानाध्यक्ष किरण बाला, दिलीप कुमार दीपक, स्वाति वैश्यंत्री, जीनत रहमान, प्रमोद जायसवाल, रविंद्र कुमार साह एवं कार्यालय सहायक नारायण गुप्ता शामिल थे.
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