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IOC: 40 साल बाद भारत में आइओसी का सत्र होना गौरव की बात : PM MODI

Updated at : 15 Oct 2023 8:25 AM (IST)
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IOC: 40 साल बाद भारत में आइओसी का सत्र होना गौरव की बात : PM MODI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में 141वें अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आइओसी) सत्र का उद्घाटन किया. उद्घाटन के बाद पीएम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति का 141वां सत्र भारत में होना बहुत ही खास है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में 141वें अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आइओसी) सत्र का उद्घाटन किया. उद्घाटन के बाद पीएम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति का 141वां सत्र भारत में होना बहुत ही खास है. 40 साल बाद भारत में आइओसी का सत्र होना हमारे लिए बहुत गौरव की बात है. उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने हर प्रकार के वैश्विक खेल टूर्नामेंट आयोजित करने के अपने सामर्थ्य को साबित किया है. हमने हाल ही में शतरंज ओलिंपियाड का आयोजन किया, जिसमें विश्व के 186 देश शामिल हुए. हमने महिला फुटबॉल अंडर-17 विश्व कप, पुरुष हॉकी विश्व कप, निशानेबाजी विश्व कप की भी मेजबानी की. उन्होंने कहा कि भारत हर वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में से एक (आइपीएल) का भी आयोजन करता है.

खेल में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सशक्त भाव निहित

प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल हमारे ‘ वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव को भी सशक्त करते हैं, इसलिए हमारी सरकार हर स्तर पर खेल को बढ़ावा देने का काम कर रही है. खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, खेलो इंडिया विंटर गेम्स और जल्द आयोजित होनेवाले खेलो इंडिया पैरा खेल इसके उदाहरण है. उन्होंने कहा कि खेल दुनिया को जोड़ने का एक और सशक्त माध्यम है.

खेलों के बिना हमारा हर उत्सव अधूरा है

भारत की प्राचीन खेल परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि खेल भारत में हमारी संस्कृति का, हमारी जीवनशैली का अहम अंग रहा है. भारत के गांवों में खेलों के बिना हमारा हर उत्सव अधूरा है. हम भारतीय सिर्फ खेलप्रेमी नहीं, बल्कि हम खेलों को जीनेवाले लोग हैं. और यह हजारों वर्षों के हमारे इतिहास में परिलक्षित होता है . उन्होंने कहा : सिंधु घाटी की सभ्यता हो, हजारों साल पहले का वैदिक काल हो, हर कालखंड में खेलों को लेकर भारत की विरासत समृद्ध रही है. हमारे यहां हजारों साल पहले लिखे ग्रंथों में 64 विधाओं में पारंगत होने की बात कही जाती है, जिनमें से अनेक विधाएं खेलों से जुड़ी हैं, जैसे घुड़सवारी, धनुर्विद्या, तैराकी, कुश्ती आदि उन्होंने कहा कि खेलों में कोई हारता नहीं है.

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