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IIT Kanpur के प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला राष्ट्रीय खोसला पुरस्कार से सम्मानित, जानें वजह

Updated at : 20 Mar 2022 7:28 PM (IST)
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IIT Kanpur के प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला
राष्ट्रीय खोसला पुरस्कार से सम्मानित, जानें वजह

प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला ने तीन नोबेल पुरस्कार विजेताओं के मार्गदर्शन में शिक्षा ग्रहण की. उन्होंने दवाएं कैसे बीमारियों से परस्पर क्रिया करती हैं, इसे शोध के जरिये बताया. प्रोफेसर अरुण को सम्मानित किए जाने से आईआईटी कानपुर में खुशी का माहौल है.

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IIT Kanpur News: कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Kanpur) के बॉयोलाजिस्ट प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला को विज्ञान के प्रतिष्ठित खोसला राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. यह पुरस्कार जी प्रोटीन युग्मित रिसेप्टर्स यानी जीपीसीआर की संरचना , कार्य और मॉड्यूलेशव क्षेत्र में शोध कार्य करने के लिए दिया गया है. प्रोफेसर अरुण को खोसला राष्ट्रीय पुरस्कार आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. ए के चतुर्वेदी ने दिया.

आईआईटी कानपुर में खुशी का माहौल

दरअसल, प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला ने तीन नोबेल पुरस्कार विजेताओं के मार्गदर्शन में शिक्षा ग्रहण की. उन्होंने दवाएं कैसे बीमारियों से परस्पर क्रिया करती हैं, इसे शोध के जरिये बताया. प्रोफेसर अरुण को सम्मानित किए जाने से आईआईटी कानपुर में खुशी का माहौल है.

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मिली जानकारी के मुताबिक, प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जैव प्रौद्योगिकी में मास्टर ऑफ साइंस (M.Sc) की डिग्री हासिल की. इसके बाद वह जर्मनी चले गए. यहां उन्होंने 1988 के नोबल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर हार्टमट मिशेल के निर्देशन में फ्रैंकफर्ट स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ बायोफिजिक्स से पीएचडी की डिग्री हासिल की.

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डॉक्टर अरुण कुमार शुक्ला ने अमेरिका में वर्ष 2012 का नोबल पुरस्कार पाने वाले प्रोफेसर बॉब लेफकोविट्ज और ब्रायन कोबिल्का के निर्देशन में अपना पोस्ट-डाक्टोरल शोध किया. मौजूदा समय में वह आईआईटी कानपुर में बायोसाइंस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में जाय गिल चेयर प्रोफेसर हैं.

डॉ. अरुण कुमार शुक्ला ने जीपीसीआर की संरचना, कार्य और विनियमन पर शोध किया है. लगभग हर शारीरिक प्रक्रिया में जीपीसीआर जटिल रूप से शामिल हैं. उन्होंने बताया कि कैसे चिकित्सकीय रूप से निर्धारित दवाएं बीमारियों के साथ परस्पर क्रिया करती हैं और मानव शरीर में उनके रिसेप्टर्स के कार्य को नियंत्रित करती हैं. हाल ही में विभाग ने जीपीसीआर सक्रियण की निगरानी और सिग्नलिंग में उपयोग किये जाने वाले सिंथेटिक प्रोटीन जैसे एंटीबाडी टुकड़ों को तैयार किया है.

रिपोर्ट- आयुष तिवारी, कानपुर

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