पेशे से नाई की बेटी ने किया नाम रोशन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 May 2016 1:18 AM

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मालदा: राज्य में आठवां स्थान हासिल करनेवाली मानसी प्रमाणिक अत्यंग गरीब परिवार की है. उसके पिता निरंजन प्रमाणिक पेशे से नाई हैं जो मालदा शहर से 40 किलोमीटर दूर गाजोल के सुकांतपल्ली इलाके में टीन की छत वाले घर में रहते हैं. निरंजन प्रमाणिक गाजोल बस स्टैंड के पास फुटपाथ पर काफी दिनों से अस्थायी […]

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मालदा: राज्य में आठवां स्थान हासिल करनेवाली मानसी प्रमाणिक अत्यंग गरीब परिवार की है. उसके पिता निरंजन प्रमाणिक पेशे से नाई हैं जो मालदा शहर से 40 किलोमीटर दूर गाजोल के सुकांतपल्ली इलाके में टीन की छत वाले घर में रहते हैं. निरंजन प्रमाणिक गाजोल बस स्टैंड के पास फुटपाथ पर काफी दिनों से अस्थायी किस्म का सैलून चलाते हैं. मानसी की इस सफलता से उसके स्कूल के शिक्षक-शिक्षिका और मोहल्ले के पड़ोसी खुशी से झूम उठे हैं.

बेटी के रिजल्ट के बारे में खबर मिलने के बाद से ही पिता निरंजन प्रमाणिक और मां उषा प्रमाणिक की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है. उषा प्रमाणिक एक गृहिणी हैं. उनका एक बेटा राजेश प्रमाणिक स्नातक कर चुका है और नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है. घर-गृहस्थी में अभाव के बावजूद जिस तरह निरंजन और उषा ने अपने दोनों बच्चों को पढ़ाया-लिखाया, इसे लेकर आसपास के लोग उनकी प्रशंसा करते नहीं थकते.

मंगलवार की सुबह जैसे ही बेटी के माध्यमिक में आठवां स्थाना पाने की खबर मिली निरंजन प्रमाणिक दुकान बंद करके फौरन घर पहुंचे. घर में उत्सव का माहौल था. पड़ोसी लोग प्लेट में मिठाई लेकर आ रहे थे और मानसी को खिला रहे थे. कुछ देर में स्कूल के शिक्षक-शिक्षिका भी मानसी के घर पहुंच गये. सभी कह रहे थे कि मानसी ने गाजोल का नाम रोशन कर दिया. मानसी को कुल 676 अंक मिले हैं. उसे अंगरेजी में 92, बांग्ला में 97, गणित में 98, भौतिक विज्ञान में 99, जीवन विज्ञान में 99, इतिहास में 94 और भूगोल में 97 अंक मिले हैं. मानसी ने बताया कि पांच-छह शिक्षक-शिक्षिका ने प्राइवेट ट्यूशन के जरिये उसकी काफी मदद की. टेस्ट में उसे 659 नंबर मिले थे. वह रोज पांच-छह घंटे पढ़ाई करती थी. मानसी को रहस्यपूर्ण कहानियां पढ़ने ओर गाने सुनने का काफी शौक है. घर में अभाव की वजह से उसके पास मोबाइल नहीं है.
डॉक्टर बनने की इच्छा रखनेवाली मानसी ने बताया, पिता ने बहुत मेहनत करके मुझे कुछ बनाया है. पिता का सपना है कि मैं डॉक्टर बनूं और गांव के रोगियों की सेवा करूं. यह सपना पूरा करने के लिए मुझे और अच्छे से पढ़ना होगा.
मानसी के बड़े भाई राजेश प्रमाणिक ने बताया कि बहन के जितने भी प्राइवेट शिक्षक-शिक्षिका थे, किसी ने कभी पैसे के लिए नहीं कहा. सभी हमारे परिवार की स्थिति से वाकिफ थे. बहन का सपना डॉक्टर बनने का है. उसका सपना पूरा करने के लिए, बड़ा भाई होने के नाते हर संभव सहायता करूंगा.
गाजोल के श्यामसुखी बालिका विद्यालय की प्रधान शिक्षिका प्रतिभा पोद्दार ने बताया कि मानसी पढ़ने में मेधावी है. उसनी अपनी सफलता से स्कूल का नाम रोशन किया है. भविष्य में उसकी पढ़ाई में हमलोग हरसंभव मदद करेंगे.
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