निष्कासित नेताओं की तृणमूल कांग्रेस में घर वापसी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Jan 2018 5:06 AM (IST)
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कूचबिहार में भाजपा के बढ़ते कदम रोकने की तैयारी रवींद्रनाथ घोष ने कहा : राज्य अध्यक्ष ने दी है मंजूरी कूचबिहार : जिले में भाजपा के बढ़ते कदम को रोकने के लिए कूचबिहार तृणमूल अपने निष्कासित नेताओं की घर वापसी करा रही है. इतना ही नहीं उन्हें महत्वपूर्ण पद भी सौंपे जा रहे हैं. पार्टी […]
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कूचबिहार में भाजपा के बढ़ते कदम रोकने की तैयारी
रवींद्रनाथ घोष ने कहा : राज्य अध्यक्ष ने दी है मंजूरी
कूचबिहार : जिले में भाजपा के बढ़ते कदम को रोकने के लिए कूचबिहार तृणमूल अपने निष्कासित नेताओं की घर वापसी करा रही है. इतना ही नहीं उन्हें महत्वपूर्ण पद भी सौंपे जा रहे हैं. पार्टी के निचले स्तर के नेताओं तथा निष्कासित नेताओं में भाजपा की ओर झुकाव को देखते हुए पार्टी की राज्य कमेटी के निर्देश पर यह कदम उठाया जा रहा है. इस रणनीति के साथ तृणमूल अपने संगठन को और मजबूत करने में जुट गयी है.
मंगलवार को ऐसे ही कई लोगों को तृणमूल कांग्रेस में शामिल किया गया. पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता सचिन दास 14 साल जेल की सजा काट कर छूटे हैं. उन्हें पार्टी के जिला उपाध्यक्ष का पद सौंपा गया. दूसरी ओर दो साल पहले पार्टी से निष्कासित नजरूल हक का निलंबन रद्द कर मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने उन्हें भी पार्टी में शामिल कर लिया. इस मामले में श्री घोष ने बताया कि राज्य अध्यक्ष सुब्रत बक्सी की अनुमति मिलने पर दोनों नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया.
वाम मोर्चा के जमाने में सचिन दास ने तृणमूल के लिए सम्मेलन करते हुए तूफानगंज में कई सभाओं में भारी भीड़ जुटायी थी. तृणमूल के लोगों का कहना है कि वाम मोर्चा ने उन्हें झूठे आरोपों में फंसाकर 14 साल की सजा दिलवा दी. 2015 में रिहा होने के बाद से ही वह पार्टी में वापस शामिल होना चाहते थे. अब उन्हें पार्टी में शामिल कर के जिला उपाध्यक्ष के साथ ही तूफानगंज विधानसभा क्षेत्र के पर्यवेक्षक का पदभार भी सौंपा गया है. दलीय सूत्रों से पता चला है कि तूफानगंज के विधायक फजले करीम मियां के साथ पार्टी का संबंध इनदिनों खराब चल रहा है. उस इलाके में वरिष्ठ नेता सचिन दास को बड़ा पद देकर विधायक के गुट पर पार्टी दबाव बनाना चाहती है.
दूसरी ओर दो साल पहले शीतलकुची के नेता व जिला परिषद सदस्य नजरूल हक को इलाके के विधायक हितेन बर्मन गुट के साथ विवाद के कारण पार्टी से निकाल दिया गया था. विधायक हितेन बर्मन के सामने ही मंगलवार को नजरूल हक को पार्टी में शामिल कर लिया गया. हालांकि उन्हें पार्टी का सांगठनिक दायित्व देने का फैसला राज्य कमेटी ने अभी नहीं लिया है.
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