बंगाल सरकार बन रही राह में रोड़ा
Updated at : 08 Nov 2019 2:34 AM (IST)
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कोलकाता : राज्यपाल जगदीप धनखड़ और ममता सरकार के बीच एक बार फिर टकराव बढ़ता जा रहा है. गुरुवार को राज्यपाल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत’ स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि इस योजना की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है, देशभर […]
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कोलकाता : राज्यपाल जगदीप धनखड़ और ममता सरकार के बीच एक बार फिर टकराव बढ़ता जा रहा है. गुरुवार को राज्यपाल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत’ स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि इस योजना की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है, देशभर केगरीब लोगों को इसका लाभ मिल रहा है, लेकिन ममता सरकार की ओछी राजनीति की वजह से यहां के लोग इस योजना का लाभ लेने से वंचित हो रहे हैं.
महानगर के स्वभूमि में चिकित्सकों के संगठन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल फिजिशिस्ट ऑफ इंडिया के 40वें राष्ट्रीय सम्मेलन
(एएमपीआइसीओएन 2019) के उद्घाटन के अवसर पर संवाददाताओं से बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनके पास पश्चिम बंगाल के 3000 से अधिक आवेदन पड़ा हुआ है, जो आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेना चाहते हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के रोड़ा बनने की वजह से उन्हें केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है.
उन्होंने कहा कि ममता सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर लोगों के हित में आयुष्मान भारत योजना को लागू करना चाहिए. राज्यपाल ने पूछा कि आखिर ममता बनर्जी की सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू क्यों नहीं कर रही हैं? श्री धनखड़ ने कहा कि लोगों के हित में केंद्रीय योजनाओं को लागू नहीं करना देश के संघीय ढांचे के प्रतिकूल है. ऐसा नहीं किया जाना चाहिए.
सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस पर स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा तक हर विषय पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल ने कहा : यहां हर बात पर राजनीति होती है, हर चीज को राजनीतिक रंग चढ़ा हुआ है. स्वास्थ्य को इससे अलग रखना जरूरी है. पिछले तीन महीने में मेरे पास 3000 आवेदन आये हैं, जिसमें पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू करने की मांग की गयी है. लोकसभा चुनाव से पूर्व जनवरी महीने में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को आयुष्मान भारत से अलग करने की घोषणा की थी.
उन्होंने कहा : राज्यपाल का दिल बहुत बड़ा है, लेकिन पास में दो करोड़ रुपये का छोटा-सा फंड है, जबकि एक सांसद को पांच करोड़ रुपये मिलते हैं. ज्यादातर राज्यों में विधायकों के पास (फंड के रूप में) दो से चार करोड़ रुपये होते हैं. यहां (पश्चिम बंगाल में) मुझे बताया गया है कि विधायकों का फंड 60 करोड़ रुपये का है. मुझे आवंटित किये गये दो करोड़ रुपये से मुझे 18 मदों का समाधान करना पड़ता है.
श्री धनखड़ ने कहा कि आवेदकों की बढ़ती संख्या से राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का पता चलता है. उन्होंने कहा : अगर मुझे तीन महीने में स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए 3000 आवेदन मिले हैं, तो निश्चित रूप से ये राज्य के हालात को दर्शाता है. उन्होंने कहा : मुझे ये अजीब लगता है कि एक केंद्रीय योजना, जो इतनी बड़ी सुविधा उपलब्ध कराती है, जिसे दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है, उसे लोगों के लाभ के लिए यहां क्यों नहीं अपनाया जा रहा है.
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