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कोलकाता : ‘रथ यात्रा'' की अनुमति के लिए हाइकोर्ट पहुंची भाजपा

Updated at : 06 Dec 2018 2:47 AM (IST)
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कोलकाता :   ‘रथ यात्रा''  की अनुमति के लिए हाइकोर्ट पहुंची भाजपा

कोलकाता : भाजपा ने राज्य में ‘रथ यात्रा’ निकालने की अनुमति के लिए कलकत्ता हाइकोर्ट का रुख किया है. पार्टी का कहना है कि राज्य में सात दिसंबर से तीन रैलियां निकालने के लिए उसे अभी तक अनुमति नहीं मिली है. बुधवार को न्यायाधीश तपोव्रत चक्रवर्ती की अदालत में मामले की सुनवाई हुई, लेकिन कोई […]

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कोलकाता : भाजपा ने राज्य में ‘रथ यात्रा’ निकालने की अनुमति के लिए कलकत्ता हाइकोर्ट का रुख किया है. पार्टी का कहना है कि राज्य में सात दिसंबर से तीन रैलियां निकालने के लिए उसे अभी तक अनुमति नहीं मिली है. बुधवार को न्यायाधीश तपोव्रत चक्रवर्ती की अदालत में मामले की सुनवाई हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
गुरुवार को फिर सुनवाई होगी.अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि वह गुरुवार को इस संबंध में अपना अंतिम फैसला बताये. गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भाजपा की रथायात्रा की अनुमति अभी तक नहीं दी है. राज्य सरकार की ओर से अनुमति न देने की भी जानकारी नहीं दी गयी है. इसे लेकर प्रदेश भाजपा ने कलकत्ता हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
पार्टी का कहना है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राज्य में तीन ‘रथ यात्रा’ के साथ पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ अभियान की शुरुआत करेंगे. अनुमति के संबंध में अदालत के हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की गयी है. भाजपा के वकील सप्तांशु बसु व अनिंद्य मित्रा ने कहा कि रथयात्रा में बड़ी तादाद में लोगों का समागम होगा.
प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री इसमें मौजूद रहेंगे. विभिन्न राज्यों से भी मंत्री पहुंचेंगे. बावजूद इसके राज्य प्रशासन इस संबंध में खामोश है. न तो वह सहमति जता रहा है और न ही असहमति. सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाये गये हैं वह भी नहीं बताया जा रहा है. इससे पहले भी राज्य प्रशासन ने ऐन यही काम किया है.
इससे पहले भी भाजपा को अदालत आना पड़ा है और एक बार फिर वह अदालत की शरण में आये हैं. अदालत ने महाधिवक्ता किशोर दत्ता से पूछा कि अनुमति क्यों नहीं दी गयी? रथयात्रा को लेकर स्वयं राज्यपाल ने पूछा है. इसके बाद भी क्यों अनुमति नहीं दी गयी? इसपर किशोर दत्ता ने कहा कि डीजी या आइजी या गृह सचिव रैलियों की अनुमति देने के लिए सक्षम अधिकारी नहीं हैं.राज्यपाल का हस्तक्षेप करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है .
जवाब सुनकर अदालत ने नाराजगी प्रकट की. अदालत का कहना था कि डीजी या आइजी यह स्पष्ट कर सकते थे कि कहां अनुमति लेनी होगी. न्यायाधीश कोई मसीहा नहीं है जो सभी राजनीतिक समस्या का समाधान अदालत में करेंगे. दोनों पक्षों को बैठ कर समस्या के समाधान का परामर्श न्यायाधीश ने दिया.
हालांकि महाधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि कितने लोग पहुंचेंगे. भाजपा के कौन केंद्रीय नेता आयेंगे या उन्हें किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है. सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक को साथ बैठना होगा. महाधिवक्ता का जवाब सुनकर न्यायाधीश का कहना था कि सभी राजनीतिक दल जुलूस निकालेंगे और क्यों उन्हें बार-बार अदालत से समस्या का समाधान हासिल करना होगा? इन समस्याओं का समाधान राज्य सरकार को करना होगा.
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