शराबबंदी के लिए महिलाओं ने निकाला मोरचा

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दुर्गापुर : अखिल बांग्ला परिचालित समिति के सदस्यों ने शुक्रवार को अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में स्थानीय सिटी सेंटर बस पड़ाव के समीप विरोध प्रदर्शन किया तथा अनुमंडल अधिकारी शंख सांतरा को मा ंगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. महिलाओं ने जुलूस निकाल कर बस पड़ाव की परिक्र मा की. शराबबंदी के समर्थन में नारे […]

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दुर्गापुर : अखिल बांग्ला परिचालित समिति के सदस्यों ने शुक्रवार को अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में स्थानीय सिटी सेंटर बस पड़ाव के समीप विरोध प्रदर्शन किया तथा अनुमंडल अधिकारी शंख सांतरा को मा ंगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. महिलाओं ने जुलूस निकाल कर बस पड़ाव की परिक्र मा की. शराबबंदी के समर्थन में नारे लगाये.

समिति की सचिव मयना कर्मकार ने बताया कि समाज में ऐसे बहुत महिलाएं हैं जो दूसरे के घरो में काम करके अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण करती हैं. उन्हें अपने भी घर का सारा काम करना पड़ता है.

लेकिन उन्हें वेतन के रूप में मामूली राशि दी जाती है. उन्होंने इन महिलाओं की एक निश्चित राशि वेतन मद में तय करने की मांग की. साथ ही हफ्ते में एक दिन की छूट्टी दिये जाने की व्यवस्था की जाये. उन्होंने कहा कि शराब सेवन समाज के लिए कोढ़ बनता जा रहा है. इसके कारण निम्न मध्यवर्गीय परिवार बुरी तरह से बर्बाद हो रहे हैं. परिवार के पुरुष सदस्य हताशा में या शौकिया शराब सेवन करते हैं.

इनके कारण शराब की अवैध दुकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सरकार या प्रशासन के स्तर से इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो रहा है. दैनिक मजदूरी करके अजिर्त पूरी राशि शराबसेवन में समाप्त हो जाती है. घर में हमेशा अशांति तथा आर्थिक परेसानी बनी रहती है. उन्होंने कहा कि बिहार की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी पूर्ण शराब बंदी लागू की जाये. उन्होंने कहा कि इन सभी मांगों के समर्थन में महकमाशासक को ज्ञापन सौंपा गया है.

समिति की अध्यक्ष सुचेता कुंडू, शेफाली बाउरी, सुमिता रु ईदास आदि ने भी संबोधित किया. महकमाशासक श्री सांतरा ने कहा कि मांगों पर उचित कार्रवाई की जायेगी.

महिलाओं के इस प्रदर्शन से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल देखा गया. लोगों ने कहा िक जो काम हमलोगों को करना चािहए आज वो काम महिलाओं ने सफलतापूर्वक कर िदखाया.

इस दौर में सर्वाधिक प्रासंगिक हैं कबीर

‘आज का समय और कबीर’ विषय पर अायोजन को सराहा प्रो. हरिश्चंद्र ने

रानीगंज :स्थानीय टीडीबी कॉलेज के हिंदी विभाग ने शुक्रवार को कॉलेज परिसर में ‘आज का समय और कबीर’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की. मुख्य वक्ता विश्वभारती (शांतिनिकेतन) से हिंदी विभाग के प्रोफेसर सह पूर्व विभागाध्क्ष प्रमुख डॉ हरिश्चंद्र मिश्र थे. संचालन विभाग की शिक्षिका मीना कुमारी ने किया.

डॉ मिश्र ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इस दौर में कबीर को कैसे देखा जाये? इस दौर में कबीर को समझने से पहले इस दौर के समय को समझना जरु री है. क्या समाज बदलते दौर के साथ खुद को बदल पाया है? क्या नये विचारों के साथ-साथ हम भी नये हो पाये है? उन्होंने कहा कि विद्यार्थी को हमेशा नये विचारों को प्रमुखता देनी चाहिए.

व्यक्ति विचारों से नया होता है. इतिहास को केवल कोष के रूप में न देखा जाना चाहिए. अपने वर्तमान को इतिहास के परिप्रेक्ष्य में देखने से ही सही स्थिति उभर कर सामने आयेगी. अतीत वर्तमान में ही आकर मूल्यवान बनता है.

उन्होंने कहा कि कबीर समाज में बहुत ही उत्पीड़ित थे. पर उसके पास आत्मबल था, जिसके कारण वह आज भी प्रासंगिक है. कबीर की क्रांतिकारी दृष्टि को नये सिरे से समझने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति सबके दर्द को, समाज के दर्द को अपना दर्द बना लेता हे तब वह क्रांतिकारी हो जाता है. उन्होंने हिन्दू मुसलिम के नाम पर धर्म आडम्बरो पर करारी चोट की. उन्होंने कहा कि कर्म कांडो को ही व्यक्ति धर्म समझ बैठा है. उन्होंने कहा कि कबीर जैसे संत कवियो ने ही व्यक्ति के अनुभूति में ईश्वर को उतार दिया.

हिंदी विभागाध्यक्ष मंजूली शर्मा ने इसका विषय प्रवर्त्तन करते हुए मौजूदा समाज में कबीर की प्रांसगिकता को मजबूती से रखा. उन्होंने कहा कि कबीर को बेहतर तरीके से समझने के लिए उनके काल प्ररिप्रेक्ष्य को समझना बहुत जरूरी है.

संगोष्ठी में हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ गणोश रजक, शिक्षिका रीना तिवारी तथा किरणलता दूबे भी उपस्थित थी. धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक डॉ महेन्द्र कुशवाहा ने किया.

कॉलेज की स्टूडेंट्स रूबी राय ने भ्रूण हत्या पर स्वरचित कविता का पाठ किया. जबकि मनीषा गुप्ता व अंजली कुमारी ने कवि नागाजरुन की ‘अकाल और उसके बाद’ तथा सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता ‘भिक्षुक ’का पाठ की. बेटियों की प्रताड़ना पर आधारित गजल यास्मीन खातून ने पेश की. संगोष्ठी के बाद प्रश्नोत्तर काल चला. कई स्टूडेंट्सों ने कबीर की रचनाओं व उनकी प्रांसगिकता से संबंधित प्रश्न पूछे. डॉ मिश्र ने उनका निराकरण किया.

ऊवश्व भारती के प्रो. डॉ मिश्र ने अपनी पुस्तक ‘बवंडर का भूत’ कॉलेज पुस्तकालय को अनुदान में दिया.

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