टूट के कगार पर सपा, अब अखिलेश ने जारी की 235 उम्‍मीदवारों की नयी लिस्‍ट

Published at :29 Dec 2016 9:42 PM (IST)
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टूट के कगार पर सपा, अब अखिलेश ने जारी की 235 उम्‍मीदवारों की नयी लिस्‍ट

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी समाजवादी पार्टी टूटने की कगार पर नजर आ रही है. पार्टी के अंदर पिता-पुत्र (अखिलेश,मुलायम) का मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है. सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कल 325 उम्‍मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें अखिलेश समर्थकों […]

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी समाजवादी पार्टी टूटने की कगार पर नजर आ रही है. पार्टी के अंदर पिता-पुत्र (अखिलेश,मुलायम) का मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है. सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कल 325 उम्‍मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें अखिलेश समर्थकों की अनदेखी की गयी थी. इससे नाराज मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने आज 235 उम्‍मीदवारों की नयी सूची जारी कर दी है.

विधानसभा चुनाव के लिए कल जारी 325 उम्मीदवारों की सूची से नाखुश अखिलेश ने आज सपा मुखिया से भेंट की और फिर पार्टी टिकट से वंचित विधायकों के साथ अपने सरकारी आवास पर बैठक की.

मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद टिकट से वंचित सपा विधायक इंदल सिंह ने पहले ही संकेत दे दिया था कि ‘‘अखिलेश उम्मीदवारों की अपनी सूची जारी कर सकते हैं.’ पार्टी में वर्चस्व को लेकर मुख्यमंत्री और उनके चाचा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के बीच चल रही जंग कल अपने चरम को छूती दिखाई दी, जब मुलायम ने अखिलेश की लगभग अनदेखी करते हुए 403 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लिए 325 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी.

इंदल सिंह ने मुख्यमंत्री के साथ टिकट पाने से वंचित विधायकों की बैठक के बाद कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने आज हमें बुलाया और अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा’.

तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में टिकट से वंचित विधायकों से मुलाकात के बाद अखिलेश अपने पिता मुलायम के आवास पहुंचे और उन्हें विधायकों के असंतोष से अवगत कराया. वहां से लौटने के बाद अखिलेश ने अपने आवास पर पुन: अपने नजदीकी और विश्वासपात्र नेताओं के साथ बैठक की. इस घटनाक्रम के बाद मुलायम ने शिवपाल को बुलावा भेजा. संभावना है कि वह ताजा स्थिति की समीक्षा करके आगे की रणनीति तय करेंगे.

इस बीच पार्टी से निष्कासन के बावजूद अखिलेश सरकार में मंत्री बने रहे अयोध्या से विधायक तेज नारायण उर्फ पवन पांडेय ने कहा, ‘‘हम अपने-अपने क्षेत्रों में जा रहे हैं, मेहनत से काम करेंगे और अखिलेश को फिर मुख्यमंत्री बनाएंगे.’ टिकट से वंचित एक अन्य विधायक और अखिलेश समर्थक अतुल प्रधान ने कहा, ‘‘जो भी हो जाए, हम विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. मुख्यमंत्री अखिलेश ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत काम किया है और हम उनके चेहरे पर चुनाव लड़ कर जीतेंगे.’ मौजूदा घटनाक्रम को और धार देते हुए सपा मुखिया मुलायम के चचेरे भाई और पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा कि पार्टी में ही कुछ ऐसे लोग है, जो नहीं चाहते कि अखिलेश फिर मुख्यमंत्री बने. उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश की जनता तो अखिलेश को फिर मुख्यमंत्री बनाने का मन बना चुकी है.

मुलायम ने कल पार्टी उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद अखिलेश को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने की संभावना को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पार्टी में मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करके चुनाव लड़ने की प्रथा नहीं है.

इससे पहले, टिकट बंटवारे को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच मुख्यमंत्री एवं उनके चाचा शिवपाल ने सुबह अपने-अपने वफादारों से मुलाकात की. अखिलेश ने अपने सरकारी आवास, 5 कालिदास मार्ग, पर समर्थकों से मुलाकात की. बाद में उन्होंने पिता मुलायम से बात की. समझा जाता है कि विधानसभा की 403 सीटों में से 325 सीटों के लिए जारी उम्मीदवारों की सूची पर अखिलेश ने नाराजगी जताई है क्योंकि सूची में अखिलेश के करीबी लोगों के नाम गायब हैं.

सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं. पार्टी नेताओं का अखिलेश और मुलायम के आवास के सामने जमावडा शुरू हो गया था. शिवपाल के आवास के बाहर भी भीड़ इकट्ठा होने लगी थी. शिवपाल की मौजूदगी में मुलायम द्वारा सूची जारी करने के कुछ घंटे के भीतर ही बुंदेलखंड दौरे से लौटे अखिलेश ने कल कहा था कि वह उम्मीदवारों को लेकर सपा मुखिया से बातचीत करेंगे.

अखिलेश ने कल रात संवाददाताओं से कहा था, ‘‘सूची में कुछ ऐसे लोगों के नाम नहीं हैं, जो निश्चित तौर पर जीत सकते हैं. मैं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष ये मुददा उठाउंगा और उनसे कहूंगा कि कुछ ने वाकई अच्छा कार्य किया है और उन्हें टिकट मिलना चाहिए.’ जवाबी कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री ने रात में ही शिवपाल के दो करीबियों सुरभि शुक्ला और उनके पति संदीप शुक्ला को बर्खास्त कर दिया. दोनों को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था. सुरभि उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की उपाध्यक्ष और संदीप राजकीय निर्माण निगम में सलाहकार के पद पर थे. संदीप को सुल्तानपुर सदर सीट से टिकट मिला है. बुंदेलखंड से लौटने पर अखिलेश ने पार्टी नेताओं की बैठक बुलाकर उनकी शिकायतें सुनने का फैसला किया.

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