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Etawah News: सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को 17 साल बाद उम्रकैद की सजा,10-10 हजार रुपये जुर्माना

यूपी के इटावा जिले में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को 17 साल बाद उम्रकैद की सजा सुनाई गयी. इसके साथ ही उन पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Kanpur
Updated Date
Etawah News: सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को 17 साल बाद उम्रकैद की सजा
Etawah News: सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को 17 साल बाद उम्रकैद की सजा
सांकेतिक तस्वीर

Etawah News: 17 वर्ष पहले घर से कॉलेज जा रही छात्रा को अगवा करके सामूहिक दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट शीरीन जैदी ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. घटना के समय मामला काफी चर्चा में रहा था. तब सामाजिक संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के चलते पुलिस ने आरोपितों को जल्दी पकड़कर जेल भिजवा दिया था.

अधिवक्ता तरुण कुमार बताया कि थाना चौबिया में 11 नवंबर 2004 को तत्कालीन एसएसपी के आदेश पर संजीव यादव, उमेश यादव निवासी गांव कांकरपुरा चौबिया व गुड्डू यादव निवासी वमुरी थाना सैफई के खिलाफ मारपीट-सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था.

मुकदमे में घटना के मुताबिक, छह नवंबर 2004 को सुबह करीब 10 बजे 15 साल की कक्षा 11 की छात्रा अपने छोटे भाई व गांव के अन्य बच्चों के साथ पैदल कॉलेज जा रही थी. तभी रास्ते में तीनों युवकों ने बाइक से उसे अगवा कर लिया था. छात्रा की तलाश परिवार जन करते रहे, लेकिन उसका पता नहीं चल सका था. तीसरे दिन 8 नवंबर को रात 8 बजे के करीब युवक छात्रा को बेहोशी हालत में उसके घर के पास फेंक गए थे.

होश में आने पर उसने बताया था कि मैनपुरी जिले के कुर्रा के पास एक गांव मेंआरोपियों ने उसे रखा था. वहां पर तीनों ने पिस्टल दिखाकर उससे जबरन सामूहिक दुष्कर्म करते रहे. घटना के बाद पीडि़ता को लेकर परिजन थाने ले गए, लेकिन उसकी एफआईआर नहीं दर्ज हुई. मामले ने तूल पकड़ा, तब तत्कालीन एसएसपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ था.

तीनों आरोपियों को पकड़ कर जेल भेज दिया गया. उसके कुछ महीने बाद हाईकोर्ट से आरोपियों ने जमानत करा ली. तत्कालीन एसओ चौबिया ने विवेचना कर तीनों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया था. विभिन्न कारणों से यह मामला विचाराधीन बना रहा, लेकिन फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई शुरू होने पर एक साल में अपर सत्र न्यायाधीश शीरीन जैदी ने साक्ष्य के आधार पर निर्णय सुना दिया.

रिपोर्ट- आयुष तिवारी, कानपुर

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