सिंहभूम : चार साल से अधूरा पड़ा है जेल का निर्माण कार्य

Updated at : 12 Mar 2019 9:43 AM (IST)
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सिंहभूम : चार साल से अधूरा पड़ा है जेल का निर्माण कार्य

शीन अनवर चाईबासा : चक्रधरपुर अनुमंडल में प्रस्तावित 1500 की क्षमता वाली जेल का निर्माण कार्य विगत चार वर्षों से बंद है. जेल के निर्माण पर 40 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं. बोड़दा के पास लगभग 24 एकड़ में फैली अधूरी जेल में एस्टीमेट से अधिक पैसे खर्च होने की बात कही गयी […]

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शीन अनवर

चाईबासा : चक्रधरपुर अनुमंडल में प्रस्तावित 1500 की क्षमता वाली जेल का निर्माण कार्य विगत चार वर्षों से बंद है. जेल के निर्माण पर 40 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं. बोड़दा के पास लगभग 24 एकड़ में फैली अधूरी जेल में एस्टीमेट से अधिक पैसे खर्च होने की बात कही गयी है.

सरकार ने अतिरिक्त राशि देने से मना कर दिया. अब काम बंद है. गौरतलब है कि जेल का निर्माण कार्य वर्ष 2008 में आरंभ हुआ और 2014 से बंद पड़ा है. सरकार के मुताबिक जब तक रिटेंडर नहीं होगा, तब तक जेल का निर्माण कार्य फिर से शुरू करना संभव नहीं है. 10 एकड़ से अधिक जमीन पर सिर्फ जेल का ही निर्माण हो रहा है, जबकि पांच एकड़ में आवास का निर्माण हो रहा है. इसमें जेल के पदाधिकारी व कर्मचारी रहेंगे. जिले में एक ही जेल होने से यहां के कैदियों को 120 किलोमीटर दूर रांची, जमशेदपुर भेजना पड़ रहा है.

विरोध के कारण ईचा-खरकाई डैम निर्माण लटका

दो जिला प सिंहभूम व सरायकेला-खरसावां के अंतर्गत बननेवाले ईचा-खरकाई डैम निर्माण भी वर्षों से लंबित है. जल संसाधन विभाग के अनुसार, डैम निर्माण से कुल 87 गांव प्रभावित होंगे. इनमें से 26 गांव पूरी तरह तथा शेष आंशिक रूप से जलमग्न होंगे. डूब क्षेत्र होने सहित अन्य कारणों से डैम व इसके नहर के निर्माण को लेकर जनविरोध होता रहा है. एक बार तो वहां गोलीबारी भी हो चुकी है. इससे पहले ईचा डैम का निर्माण कार्य फंड के अभाव में 1991 में बंद हो गया था.

वहीं डैम छोड़ नहरों का काम बाद में शुरू किया गया. पर बार-बार के जन विरोध के बीच नहरों का भी 30 फीसदी तक काम ही पूरा हो पाया है. 1978 में शुरू हुई स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना में ग्रामीण लगातार डैम का विरोध कर रहे हैं. शुरुआत में विश्व बैंक संपोषित करीब 129 करोड़ लागतवाली यह परियोजना वर्तमान में 6613.74 करोड़ की हो गयी है. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को यह आश्वासन दिया है कि करीब 99 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमतावाली यह परियोजना 31 मार्च 2019 तक पूरी कर ली जायेगी.

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