झारखंड : कैंसर का दर्द भूल कर दूसरों के दुख बांट रहीं बसंती

Updated at : 13 Nov 2017 8:18 AM (IST)
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झारखंड : कैंसर का दर्द भूल कर दूसरों के दुख बांट रहीं बसंती

मनोज कुमार चाईबासा : वर्ष 1995 का साल था. चाईबासा के बरकंदाज टोली में एक अनाथ नाली के पास गिरे चावल को चुनकर खा रहा था. इस दृश्य को एक महिला बड़े गौर से देख रही थी. महिला को उस अनाथ के अंदर अपनी ही तरह का एक आदमी नजर आ रहा था. बस यहीं […]

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मनोज कुमार
चाईबासा : वर्ष 1995 का साल था. चाईबासा के बरकंदाज टोली में एक अनाथ नाली के पास गिरे चावल को चुनकर खा रहा था. इस दृश्य को एक महिला बड़े गौर से देख रही थी. महिला को उस अनाथ के अंदर अपनी ही तरह का एक आदमी नजर आ रहा था. बस यहीं से उसके दिल में करुणा का भाव पैदा हुआ और घर की देहरी लाघकर समाज सेवा के लिए निकल पड़ी.
आज वह महिला किसी पहचान की मोहताज नहीं है. बसंती गोप नाम ही काफी है. चाईबासा की बरकंदाज टोली निवासी बसंती का नाम लेते ही लोग उनके कार्यों के किस्से सुनाने लगेंगे. अनाथ, अज्ञात शवों का दाह संस्कार करना, विक्षिप्तों को अस्पताल पहुंचाना आदि बसंती गोप की पहचान बन चुकी है.
उन्हें चाईबासा में ‘मदर टेरेसा’ के नाम से जाना जाने लगा है. उनके कार्यों की चर्चा अब चाईबासा और झारखंड से होकर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गयी है. बतौर पारा लीगल वॉलेंटियर (पीएलवी), बसंती द्वारा की गयी समाज सेवा के लिए सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने बीते नौ नवंबर को उसे सर्वश्रेष्ठ पीएलवी मेंबर अवार्ड से नवाजा है. इससे पूर्व बसंती को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ पीएलवी मेंबर चुना जा चुका है.
पीएलवी सदस्यता ने दिलायी पहचान
बसंती गोप की समाज सेवा को देखते हुए वर्ष 2005 में उन्हें पुलिस हेल्प लाइन से जोड़ा गया. यहां वह छोटे-छोटे घरेलू झगड़ों के निबटारे का कार्य करती थीं. प्रेम विवाह की बाधाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुसार उसका समाधान निकालती थीं. उनकी रुचि और सक्रियता होने के कारण बसंती को कानूनी जागरुकता फैलाने के लिए गठित डीएलएसएस का पीएलवी मेंबर बना दिया गया. यहीं से बसंती की सक्रियता समाजसेवा में बढ़ गयी, जो उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ पारा लीगल वॉलेंटियर बना चुका है.
मां की राह पर दोनों बेटियां
बसंती गोप की दोनों बेटियां सुमन गोप व पूजा गोप भी समाजसेवा में अपनी मां का हाथ बंटाती हैं. दोनों को मां ने पीएलवी मेंबर बना दिया है. बेटियों के साथ-साथ बसंती को पति का भी पूरा सहयोग मिलता है.
बसंती के तीन बेटे हैं. बड़ा बेटा विकास आठवीं पास है. दूसरा संतोष नौवीं तक पढ़ा है. जबकि तीसरा सतीश अभी इंटर में पढ़ रहा है. बंसती के पति दिलीप गोप सेव व मिक्चर का घरेलू व्यवसाय करते हैं.
अनाथ को बेटी बनाकर पाल रहीं, बीमा तक करवाया
भटका हुआ बच्चा हो या छूटा हुआ, पुलिस पहले बसंती गोप के घर पर छोड़ जाती थी. बसंती उनकी देखरेख करती थी. इसी तरह आयी एक बच्ची को वह पाल रही हैं जो अब नौ साल की है. बसंती ने कानूनी रूप से उस बच्ची को अपनी बेटी बना लिया है. उन्होंने अपनी बेटियों का बीमा नहीं कराया लेकिन उस बच्ची का बीमा करा दिया है और हर साल नौ हजार रुपये प्रीमियम भरती हैं.
बसंती की महत्वपूर्ण उपलब्धियां
– 2004 में बरकंदाज टोली की 75 निरक्षर महिलाओं को किया साक्षर
– 75 निरक्षर महिलाओं के बच्चों को भी लालटेन की रोशनी में दी शिक्षा
– 2000 अज्ञात शवों का दाह संस्कार
– हाल ही में एनकाउंटर में मारे गये दोनों नक्सलियों का दाह संस्कार
– पांड्राशाली में एक ही परिवार के मारे गये पांच लोगों का अंतिम संस्कार
– चक्रधरपुर में डायन के आरोप में घर में बंद बुढ़िया को छुड़वाया
– एक दर्जन से अधिक अज्ञात मानसिक रोगियों को रांची पहुंचाया
– बेसहारा कुष्ठ रोगियों की मरहम पट्टी
– इप्टा की रंगकर्मी हैं बसंती. कई मंचों पर कर चुकी है नाट्य मंचन
– जेल में बंद महिला व पुरुष कैदियों की काउंसेलिंग करती हैं
बसंती की प्रोफाइल
बसंती गोप
आयु- 45 वर्ष
संतान – दो बेटे, दो बेटियां
शिक्षा 11 वीं तक
क्या काम करते हैं पारा लीगल वॉलेंटियर
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएससए) कानूनी जागरूकता फैलाने, अंधविश्वास मिटाने, कानूनी सहायता देने, कानूनी परामर्श देने, जो वकील का खर्च वहन नहीं कर सकते उनको वकील मुहैया कराने वाली विधिक संस्था है. घरेलू विवाद का निबटारा करना, समझौता कराना भी इसका कार्य है.
संस्था के तमाम कार्यों को गांव-गांव तक करने के लिए पारा लीगल वॉलेंटियर का चयन किया जाता है, जिन्हें पीएलवी मेंबर कहा जाता है. बसंती गोप भी इसी तरह का कार्य करने के लिए पीएलवी मेंबर बनायी गयी हैं.
मैं भी मां की तरह ही बनना चाहती हूं. अपने लिए तो सब करते हैं, मैं औरों के लिए कुछ करना चाहती हूं. इस कारण मैंने भी पीएलवी की सदस्यता ग्रहण कर ली है.
सुमन गोप, बसंती गोप की बेटी.
12 सीबीएस-15 बसंती गोप का परिवार
12 सीबीएस-16 गोद ली गयी बच्ची
12 सीबीएस-17 पति दिलीप कुमार गोप
12 सीबीएस-18 बेटी सुमन गोप
12 सीबीएस-19 बेटी पूजा गोप
12 सीबीएस-20 विक्षिप्त को पकड़ कर इलाज के लिए ले जाती बसंती गोप
12 सीबीएस-21 चीफ जस्टिस से सम्मान प्राप्त करती बसंती गोप
करुणा की मूर्ति हैं 45 साल की महिला, लोग कहते हैं ‘मदर टेरेसा’
कैंसर को हराने का संकल्प
बसंती गोप को वर्ष 2016 में ब्रेस्ट कैंसर हो गया. लेकिन वह खुद यह पीड़ा झेलकर दूसरे की पीड़ा को कम करने में लगी हुई हैं. संयोग है कि बीते साल जिस तारीख को बसंती के कैंसर का पहला ऑपरेशन हुआ, उसी तिथि को इस साल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन्हें बेस्ट पीएलवी अवार्ड से नवाजा. बसंती को कैंसर की चिंता नहीं है. उनका कहना है कि कैंसर को वह हराकर ही रहेंगी.
खास है बसंती की समाजसेवा: बसंती गोप और उनका पूरा परिवार अत्यंत गरीब है. अपना खुद का मकान नहीं है. मिट्टी की झोपड़ी में पति दिलीप गोप, तीन बेटे और बेटियों के साथ रहती हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद बसंती ने हिम्मत नहीं हारी. खुद जैसे-तैसे रहीं, लेकिन जब भी जरूरत पड़ी, आधी रात को भी घर से निकलकर सेवा की.
कर चुकी हैं नेत्रदान
अपने जीवन में समाजसेवा कर रही बसंती इस दुनिया से विदा होने के बाद भी कुछ देकर जाने की चाहत रखती हैं. इसी चाहत में वह अपनी और अपने पति का नेत्रदान कर चुकी हैं.
यह पूरे झारखंड, पीएलवी मेंबर्स व चाईबासा का सम्मान है. मेरी चाहत है कि और लोग भी मेरी तरह ही कार्य करें. गरीबों, असहायों, अनाथों की सेवा करें. कोई भी इलाज के अभाव में नहीं मरे.
बसंती गोप
छठ व्रत में भूखे-प्यासे चली गयी थीं विवाद निपटाने
दो साल पूर्व की बात है. बड़ाजामदा में प्रेमी-प्रेमिका के बीच विवाद चल रहा था. मामला थाना तक पहुंच गया था. बसंती को इसकी जानकारी हुई. खरना का दिन था. बसंती भूखी-प्यासी थीं. व्रत की चिंता छोड़ वह घर में बिना किसी को बताये विवाद का निपटारा करने चली गयी थीं. आसान नहीं रहा सफर: बसंती गोप एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रही थीं. कुष्ठ रोगियों की मरहम पट्टी करने के कारण कई लोग उनसे दूरी रखते थे. लोग उन्हें ही भिखारी कहा करते थे. काफी ताने सुनने पड़ते थे.
चीफ जस्टिस ने कहा- और मन लगाकर काम करिये
बसंती गोप ने बताया कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिलकर वह बहुत खुश हैं. चीफ जस्टिस ने उनसे बात की और मन लगाकर और बेहतर काम करने को प्रेरित किया. उन्होंने दूसरे पीएलवी को भी अपनी तरह तैयार करने को कहा.
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