केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ वामदलों का राजभवन मार्च, कहा- किसान बिल से परेशान हैं किसान

Updated at : 14 Oct 2020 4:25 PM (IST)
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केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ वामदलों का राजभवन मार्च, कहा- किसान बिल से परेशान हैं किसान

Jharkhand news, Ranchi news : किसान बिल, कोयले के व्यवसायिक खनन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला, स्वास्थ्य सेवा की बदहाली, कोरोना वायरस संक्रमण के नाम पर निजी स्वास्थ्य केंद्रों की मनमानी आदि के विरोध में बुधवार को वामदलों ने रांची में शहीद चौक से राजभवन तक मार्च किया. राजभवन मार्च का आयोजन सीपीआई (CPI), सीपीआईएम (CPIM), सीपीआई माले और मासस ने संयुक्त रूप से किया. मार्च के बाद राज्यपाल को 10 सूत्री ज्ञापन सौंप कर राज्य एवं केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाये जाने की अपील की गयी.

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Jharkhand news, Ranchi news : रांची : किसान बिल, कोयले के व्यवसायिक खनन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला, स्वास्थ्य सेवा की बदहाली, कोरोना वायरस संक्रमण के नाम पर निजी स्वास्थ्य केंद्रों की मनमानी आदि के विरोध में बुधवार को वामदलों ने रांची में शहीद चौक से राजभवन तक मार्च किया. राजभवन मार्च का आयोजन सीपीआई (CPI), सीपीआईएम (CPIM), सीपीआई माले और मासस ने संयुक्त रूप से किया. मार्च के बाद राज्यपाल को 10 सूत्री ज्ञापन सौंप कर राज्य एवं केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाये जाने की अपील की गयी.

राजभवन मार्च की शुरुआत राजधानी रांची के जिला स्कूल मैदान से हुई. इसका नेतृत्व भाकपा जिला सचिव अजय कुमार सिंह, माकपा के जिला सचिव सुखनाथ लोहरा, भाकपा माले के जिला सचिव भुवनेश्वर केवट ने किया. राजभवन मार्च में शामिल सैकड़ों की संख्या में वाम कार्यकर्ताओं ने किसान एवं किसानी की हिफाजत, कोयले के व्यवसायिक खनन पर रोक लगाने, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में नारे लगा रहे थे.

मार्च राजभवन पहुंच कर केंद्र की विभिन्न जनविरोधी कानूनों एवं कार्रवाईयों के खिलाफ आक्रोश पूर्ण प्रदर्शन किया. उसके बाद एक सभा में बदल गयी. सभा की अध्यक्षता भाकपा नेता केडी सिंह ने किया. सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों पर कुठाराघात किया है और कहा कि यह किसान एवं कृषि दोनों के अस्तित्व के लिए खतरनाक है. यही कारण है कि पूरे देश के किसान इन कानूनों के खिलाफ है. लेकिन, केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से तानाशाही पर उतर कर कॉरपोरेट घरानों को खुश करने में लगी है.

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वहीं, अन्य वक्ताओं ने कहा कि देश के अंदर राजनीतिक- सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बुद्धजीवियों को गिरफ्तार कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला किया जा रहा है. साथ ही कोरोना के नाम पर निजी स्वास्थ्य केंद्रों की मनमानी लूट पर वक्ताओं ने सवाल उठाये.

सभा को भाकपा के सहायक राज्य सचिव महेंद्र पाठक, केडी सिंह, प्रमोद साहू, डॉ मिथिलेश दांगी, फरजाना फारूकी, मेहुल मृगेंद्र, सीपीआई- एम के सुफल महतो, वीणा लिंडा, प्रकाश विप्लव, भाकपा माले के जनार्दन प्रसाद, अजब लाल सिंह समेत कई लोगों ने संबोधित किया. धन्यवाद ज्ञापन उमेश नजीर ने किया.

Posted By : Samir Ranjan.

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