झारखंड के 20 लाख हरा राशनकार्डधारी लगा रहे PDS दुकानों के चक्कर, इतने दिनों से नहीं मिला योजना का लाभ
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 11 Jan 2023 7:03 AM
राज्य सरकार ने जनवरी 2021 से ‘झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना’ लागू की थी. इसके तहत ‘खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ से जुड़े 15 लाख लाभुकों को एक रुपये प्रति किलो की दर से पांच किलो चावल प्रति माह उपलब्ध कराया जा रहा था
झारखंड सरकार की ओर से 20 लाख गरीबों को हरा राशन कार्ड तो जारी कर दिया गया है, लेकिन छह माह से इन्हें राशन नहीं मिल रहा है. लाभुक केवल हरा राशन कार्ड लेकर पीडीएस दुकानों की चक्कर लगा रहे हैं. बताया जा रहा है कि एफसीआइ द्वारा चावल देने से इनकार करने की वजह से यह दिक्कत हो रही है.
राज्य सरकार ने जनवरी 2021 से ‘झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना’ लागू की थी. इसके तहत ‘खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ से जुड़े 15 लाख लाभुकों को एक रुपये प्रति किलो की दर से पांच किलो चावल प्रति माह उपलब्ध कराया जा रहा था. पिछले अगस्त माह में सरकार ने पांच लाख और गरीबों को इस योजना से जोड़ा है. यानी अब राज्य में इस योजना के लाभुकों की संख्या बढ़ कर 20 लाख हो गयी है. इधर 10 माह हो गये, अनुदानित दर पर एक किलो दाल की योजना भी शुरू नहीं हो पायी.
हरा राशन कार्डधारियों को देने के लिए राज्य सरकार पहले एफसीआइ से चावल खरीदती थी. एफसीआइ ने अगस्त से चावल देना बंद कर दिया है. इसके बाद झारखंड सरकार ने छत्तीसगढ़ से चावल खरीदने को लेकर प्रयास किया, लेकिन निराशा हाथ लगी. इधर, एक बार फिर हरा राशन कार्डधारियों के लिए चावल खरीद को लेकर निविदा निकाली गयी है. कहा जा रहा है कि चावल खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हरा राशन कार्डधारियों को अनाज मिल पायेगा.
केंद्र सरकार ने केरोसिन पर सब्सिडी खत्म कर दी है. ऐसे में ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ के लाभुकों को एक लीटर केरोसिन के लिए 83 से 90 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. ऐसे में गरीब केरोसिन की डिमांड नहीं कर रहे हैं. इधर, दाम बढ़ने के कारण राज्य के पीडीएस दुकानदार भी केरोसिन का उठाव न के बराबर कर रहे हैं. केरोसिन के एक थोक विक्रेता ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार ने जनवरी से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़े राज्य के 2.64 करोड़ लाभुकों को मुफ्त राशन देने का फैसला किया है. वहीं, केरोसिन पर सब्सिडी खत्म कर दी. इसलिए गरीबों ने केरोसिन लेने से किनारा कर लिया है.
चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के नौ लाख अंत्योदय परिवार को नौ माह बाद अक्तूबर में चीनी मिलना शुरू हुआ, लेकिन दिसंबर से इसका वितरण बंद हो गया है. अक्तूबर में चीनी का आवंटन होने के बावजूद 16.02 प्रतिशत लाभुकों के बीच वितरण हुआ. नवंबर में 30 प्रतिशत प्रतिशत लाभुकों को ही चीनी मिल पायी.
सरकार की ओर से बजट में चालू वित्तीय वर्ष से गरीबों को प्रति परिवार अनुदानित दर पर एक किलोग्राम दाल देने की योजना शुरू करने की घोषणा की गयी. लेकिन 10 माह बीतने के बावजूद अब तक दाल वितरण योजना शुरू नहीं हो पायी है. विभागीय अधिकारियों को अनुसार दाल खरीद को लेकर निविदा निकाली गयी है. राज्य में फरवरी से दाल वितरण की योजना शुरू हो सकती है.
अगस्त से एफसीआइ चावल नहीं दे रहा है. सरकार ने छत्तीसगढ़ से चावल खरीदने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पायी. चावल खरीद की निविदा निकाली गयी है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हरा राशन कार्डवालों को अनाज मिल पायेगा. चीनी-दाल के लिए भी निविदा निकाली गयी है.
– दिलीप तिर्की, निदेशक, जेएसएफसी
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