महिला ट्रैफिकिंग से जाना जाता है झारखंड

By Prabhat Khabar Digital Desk
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फ ोटो---सुनील गुप्ता श्रम मंत्री केएन त्रिपाठी ने वर्क इन फ्र ीडम के लांचिंग में कहा80 हजार महिलाएं झारखंड से प्रत्येक वर्ष दूसरे राज्यों में करती हैं पलायन संवाददाता, रांची झारखंड का नाम अब महिलाओं और युवतियों के मानव व्यापार को लेकर ज्यादा प्रचलित होने लगा है. मानव व्यापार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालांकि सरकार की ओर से इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के प्रयास किये जा रहे हैं. यह बातें आज श्रम मंत्री केएन त्रिपाठी ने वर्क इन फ्रीडम कार्यक्रम की रांची में लांचिंग के अवसर पर कही. उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में बेहद कम पैसे पर राज्य की युवतियां व महिलाएं घरेलू नौकरानी के रूप में काम कर रही हैं. उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त भी किया जाता है. यही हाल बाल श्रमिकों का भी है. लगभग 80 हजार महिलाएं झारखंड से प्रत्येक वर्ष दूसरे राज्यों में पलायन करती हैं. वर्क इन फ्रीडम कार्यक्रम के तहत महिलाओं के पलायन, ट्रैफिकिंग की घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जायेगा. श्रम विभाग के विशेष सचिव केके सिन्हा ने कहा कि सरकार यह प्रयास कर रही है कि स्थानीय स्तर पर ट्रैफिकिंग को रोका जाये. इसके लिए जिला स्तर पर सहायक श्रमायुक्तों को सतर्कता बरतनी होगी. परियोजना के माध्यम से पलायन को रोकने में काफी हद तक सफलता मिलेगी. श्रमायुक्त मनीष रंजन ने कहा कि अखबारों के माध्यम से पता चला है कि वामदेव ने झारखंड की लड़कियों को बाहर भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. यह मुख्य सरगना भी साबित हो रहा है. सरकार नकली एजेंसियों की पहचान कर रही है. ट्रैफिकिंग की समस्या देश के लिए दूसरी सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की निदेशक टीने स्टेयरमोस ने कहा कि यह खुशी की बात है कि झारखंड में वर्क इन फ्रीडम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. ट्रैफिकिंग को सख्ती से रोकने की शुरुआत होनी चाहिए. 2012 के आंकड़े के अनुसार 2.10 करोड़ लोग ट्रैफिकिंग के शिकार हैं. इसमें से 40 लाख भारत, बांग्लादेश और नेपाल के लोग शामिल हैं. घरेलू हिंसा को रोकने के लिए ग्रास रूट पर काम करने की आवश्यकता है. अपर पुलिस महानिदेशक एसएन प्रधान ने कहा कि पलायन राज्य की सबसे गंभीर समस्या बन गयी है. ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए लोगों के सोच को बदलना होगा. हमारी टीम केरल गयी थी और वहां पर जाकर यह सीखने का प्रयास किया कि कैसे ट्रैफिकिंग को नियंत्रित किया जा सकता है. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महुआ माजी और बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष रूप लक्ष्मी मुंडा ने भी राज्य में ट्रैफिकिंग एवं पलायन पर अपने-अपने विचार रखे. ग्रामीण महिलाओं के समक्ष अंगरेजी में दिया भाषणकार्यक्रम में सभी अतिथियों ने राज्य भर से आयी ग्रामीण महिलाओं के सामने अंगरेजी में भाषण दिया. ये महिलाएं ट्रैफिकिंग और पलायन को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों को समझने के लिए आयी थीं. सुदूरवर्ती इलाकों से आयी इन महिलाओं के समक्ष श्रम मंत्री, श्रमायुक्त, समेत अन्य अतिथियों ने भी अंगरेजी में ही अपनी बातें रखीं.
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