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रांची : सीएमपीडीआइ को 700 करोड़ से अधिक का काम मिला मंत्रालय से

Updated at : 25 Jan 2020 8:18 AM (IST)
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रांची : सीएमपीडीआइ को 700 करोड़ से अधिक का काम मिला मंत्रालय से

रांची : सीएमपीडीआइ के सीएमडी शेखर सरन का कहना है कि आनेवाले कुछ वर्षों में कंपनी और आगे जायेगी. भारत सरकार ने 80 कोल ब्लॉक नीलाम करने का निर्णय लिया है. इसमें निजी हिस्सेदारी भी होगी. इससे सीएमपीडीअाइ को और अधिक काम मिलेगा. कंपनी की आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी. इससे कंपनी कई नयी संभावनाओं […]

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रांची : सीएमपीडीआइ के सीएमडी शेखर सरन का कहना है कि आनेवाले कुछ वर्षों में कंपनी और आगे जायेगी. भारत सरकार ने 80 कोल ब्लॉक नीलाम करने का निर्णय लिया है. इसमें निजी हिस्सेदारी भी होगी. इससे सीएमपीडीअाइ को और अधिक काम मिलेगा. कंपनी की आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी. इससे कंपनी कई नयी संभावनाओं पर काम करेगी. अभी कोयला मंत्रालय ने कंपनी को करीब 700 करोड़ रुपये का काम दिया है.
जिन कोल ब्लॉक को भारत सरकार नीलाम करना चाहती है, उसके लिए मंत्रालय रिपोर्ट तैयार कराती है. इसके एवज में कोयला मंत्रालय राशि देती है. श्री सरन शुक्रवार को कार्यालय कक्ष में पत्रकारों से बात कर रहे थे.
30 साल तक का कोयले का भंडार चिह्नित : सीएमपीडीआइ ने अगले करीब-करीब 30 साल तक के कोयले का भंडार चिह्नित कर लिया है. देश में 147 बिलियन टन कोयले का भंडार अब तक चिह्नित है. सीएमडी ने बताया कि कुल चिह्नित में से करीब 12-13 बिलियन कोयला पिछले 250 साल में निकल पाया है. सीएमपीडीआइ पिछले चार साल से करीब पांच बिलियन टन कोयला खोज रही है. आनेवाले वर्षों में यह काम और बढेगा. अभी कोल इंडिया व अन्य कंपनी मिलकर करीब 950 मिलियन टन कोयला हर साल निकाल रही है. इसे 2030 तक 1.6 से 1.7 बिलियन खपत होगी. इसमें 1.2 बिलियन टन देश में उत्पादन करने की योजना पर काम हो रहा है.
बिना छेद किये कोयला खोज रही है कंपनी
सीएमडी श्री सरन ने बताया कि सीएमपीडीआइ ने ड्रिलिंग बढ़ाने के लिए नयी तकनीकी का इस्तेमाल कर रहा है. सिस्मिक तकनीक के माध्यम से देश में पहली बार कोयला खोजा जा रहा है. बिना पर्यावरण स्वीकृति के भी यह काम हो रहा है. पहले कोल ब्लॉक खोजने के लिए पर्यावरण स्वीकृति लेनी होती थी. इससे देरी होती थी. इसमें पाराडाइज सॉफ्टवेयर सहयोग कर रहा है.
करीब 500 अप्रेंटिस रखे जायेंगे
सीएमडी ने बताया कि कंपनी में मैनपावर कम हो रहे हैं. इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने कुल मैनपावर का करीब 15 फीसदी अप्रेंटिस रखने की अनुमति दी है. यह संख्या करीब 500 होती है. इनको नौ हजार रुपये प्रतिमाह से मिलेगा. इससे कंपनी को तकनीकी हैंड मिल पायेगा.
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