रांची : बीएड कॉलेजों में सीटें हैं खाली नियम के पेंच में फंसा मामला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Aug 2019 6:30 AM

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सीटें भरने के लिए सरकार को अध्यादेश में कराना होगा संशोधन रांची : राज्य के 136 बीएड कॉलेज में कुल 13 हजार 600 में से 9825 सीटें खाली रह गयीं हैं. किसी-किसी कॉलेज में नामांकन का प्रतिशत इतना कम है कि कॉलेज को अब खर्चा जुटाना मुश्किल हो गया है. अब इन सीटों को भरने […]

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सीटें भरने के लिए सरकार को अध्यादेश में कराना होगा संशोधन
रांची : राज्य के 136 बीएड कॉलेज में कुल 13 हजार 600 में से 9825 सीटें खाली रह गयीं हैं. किसी-किसी कॉलेज में नामांकन का प्रतिशत इतना कम है कि कॉलेज को अब खर्चा जुटाना मुश्किल हो गया है. अब इन सीटों को भरने के लिए सरकार को एक बार इससे संंबंधित अध्यादेश में संशोधन कराना होगा. इसके लिए लंबी प्रक्रिया होगी.
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी भी रास्ता ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं. अध्यादेश के मुताबिक 10 जुलाई तक नामांकन प्रक्रिया खत्म कर एक अगस्त से कक्षाएं शुरू करने का निर्देश दिया गया है. सीटें खाली रहने अौर नियम के पेंच के कारण अध्यादेश में दर्ज शिड्यूल फेल कर गया. कॉलेज आज भी नामांकन लेनेवाले विद्यार्थियों की बाट जोह रहे हैं.
नामांकन प्रक्रिया के तहत रांची विवि में काउंसेलिंग ही 28 जुलाई 2019 तक पूरा हुई. काउंसेलिंग के आखिरी दिन 13 हजार 600 सीटों में 2805 सीटें खाली रह गयी थीं. अब तक 10 हजार 795 विद्यार्थियों में से मात्र तीन हजार 775 विद्यार्थियों ने ही नामांकन कराया. कॉलेज संचालक द्वितीय काउंसेलिंग, अोपेन काउंसेलिंग या फिर स्लाइडिंग अॉफ सीट के माध्यम से सीटें भरने की कोशिश में हैं, लेकिन अध्यादेश में दर्ज शर्तों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है.
नियम के मुताबिक आरक्षित सीटों के खाली रहने पर उसे अनारक्षित सीट पर एडमिशन करानेवाले विद्यार्थियों से भरने की व्यवस्था है, लेकिन यहां अधिकांश कॉलेज में आरक्षित के साथ-साथ अनारक्षित सीटें भी खाली रह गयी हैं. फलस्वरूप कॉलेज चलानेवाले कभी उच्च शिक्षा सचिव, निदेशक या फिर मुख्य सचिव के पास मिल कर गुहार लगा रहे हैं.
विद्यार्थी नहीं रहने से शिक्षकों पर भी संकट : एनसीटीइ के मुताबिक प्रत्येक कॉलेज में सौ सीटें निर्धारित हैं. इन सीटों पर नामांकित विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम सात से 14 शिक्षकों को रखना अनिवार्य किया गया.
बीएड कॉलेज में विद्यार्थियों से प्राप्त शुल्क के आधार पर ही शिक्षकों को मानदेय का भुगतान होता है. अब विद्यार्थी हैं ही नहीं, तो शिक्षकों के मानदेय का भुगतान करना भी परेशानी बन गयी है. बताया जाता है कि झारखंड संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद द्वारा लिखित परीक्षा के बाद रांची विवि को काउंसेलिंग का जिम्मा दिया गया. काउंसेलिंग में पूरे राज्य से विद्यार्थी शामिल हुए. कॉलेज भी आवंटित हो गया.
लेकिन सीटें खाली रहने का मुख्य कारण रहा कि दूर-दराज के कॉलेज में विद्यार्थियों ने नामांकन ही नहीं लिया. विद्यार्थी घर के आसपास के कॉलेज में नामांकन लेना चाहते थे. एक विद्यार्थी को सिर्फ शुल्क के रूप में 90 हजार रुपये से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च हो रहा है. शुल्क कम रहने कारण राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों में सीटें भर गयीं हैं.
हजार 600 सीटों में 9825 खाली रह गयीं
बीएड कॉलेजों में रिक्त सीटों पर नामांकन को लेकर उच्चाधिकारियों ने किया मंथन
रांची. राज्य के बीएड कॉलेजों में रिक्त सीटों पर नामांकन के लिए सोमवार को उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव शैलेश कुमार सिंह ने सबंधित अधिकारियों और रांची विवि के डीएसडब्ल्यू व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की.
बैठक में रिक्त सीटों पर नामांकन कैसे हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों से सुझाव मांगा गया. अधिकारियों ने झारखंड संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में प्रतीक्षा सूची में क्वालीफाइड विद्यार्थियों को पहले आअो-पहले पाअो की तर्ज पर नामांकन लेने का सुझाव दिया है. हालांकि इस संबंध में अधिकारी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाये हैं. विभाग द्वारा मंथन कर शीघ्र ही निर्णय लेने की संभावना जतायी गयी है.
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