रांची : कोयले के काले खेल की नहीं हुई एसआइटी जांच, 30 अक्तूबर 2015 को पुलिस मुख्यालय ने की थी अनुशंसा

Updated at : 11 Oct 2018 6:59 AM (IST)
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रांची : कोयले के काले खेल की नहीं हुई एसआइटी जांच, 30 अक्तूबर 2015 को पुलिस मुख्यालय ने की थी अनुशंसा

रांची : कोयला के काले खेल की बात काफी पुरानी है. समय-समय पर इस मामले में शिकायतें हुई, लेकिन मामले में गंभीरता से कुछ नहीं किया गया. सिवाय कागजी घोड़ा दौड़ाने के. प्रधानमंत्री के साथ गृहमंत्री को लिखा था पत्र : उल्लेखनीय है कि बड़कागांव की विधायक निर्मला देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय […]

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रांची : कोयला के काले खेल की बात काफी पुरानी है. समय-समय पर इस मामले में शिकायतें हुई, लेकिन मामले में गंभीरता से कुछ नहीं किया गया. सिवाय कागजी घोड़ा दौड़ाने के.
प्रधानमंत्री के साथ गृहमंत्री को लिखा था पत्र : उल्लेखनीय है कि बड़कागांव की विधायक निर्मला देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी 17 अप्रैल 2015 को दी थी. कहा था कि हजारीबाग और चतरा जिले की कोल परियोजनाओं से रोजाना करीब 2.5 लाख रुपये की वसूली हो रही है.
तीन माह बाद 02 जुलाई 2015 को तत्कालीन चतरा एसपी ने आइजी अभियान को एक रिपोर्ट भेजी थी. कहा था कि जांच में यह सामने आया है कि रघुराम रेड्डी आम्रपाली प्रोजेक्ट में ओबी हटाने का काम करते हैं. सीसीएल के कर्मचारियों और रघुराम रेड्डी टीपीसी का सहयोग लेते हैं. रघुराम रेड्डी की टीपीसी के साथ बातचीत होती है. लेकिन, प्रोजेक्ट में उग्रवादियों द्वारा अवैध मासिक उगाही और उसके बंटवारे के संबंध में स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले हैं.
आइजी ने भी रिपोर्ट सौंपी थी : फिर तीन माह बाद 30 अक्तूबर 2015 को आइजी (मुख्यालय) ने गृह विभाग के उपसचिव को एक रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में इस बात का जिक्र था कि कांटा में लोडिंग के नाम पर डीओ होल्डर, ट्रांसपोर्टर, हाइवा से वसूली मजदूरों के नाम पर की जाती है, जो अवैध वसूली का भी जरिया है. यहां चल रही कमेटी को भंग कर नये सिरे से अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में कमेटी गठित करने के लिए उपायुक्त ने अनुशंसा की है.
मामले में आइजी ने भी अवैध वसूली और गलत तरीके से अधिक संपत्ति की जांच के लिए एसआइटी का गठन करने के लिए गृह विभाग विभाग से अनुरोध किया था. इसके दो माह बाद फिर 21 दिसंबर 2015 को राज्य के मुख्य सचिव राजीव गौबा ने गृह विभाग को एक पत्र भेजा. कहा कि आम्रपाली और पिपरवार में लोकल सेल का परिचालन वहां की सेल कमेटी करती है. ये कमेटियां संचालन के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही करती हैं.
कुछ सदस्यों ने कमेटी पर वर्चस्व बनाकर अवैध कमाई से अकूत संपत्ति बनायी है. इसमें कुछ लोगों के नाम भी शामिल थे. मुख्य सचिव ने गृह सचिव को निर्देश दिया था कि सभी प्रोजेक्ट में कार्यरत लोकल सेल संचालन कमेटी को भंग कर नयी कमेटी का गठन जल्द से जल्द किया जाये और आपराधिक सांठगांठ से वसूली करनेवाले के ऊपर जांच के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये. साथ ही कहा कि अगर जरूरत पड़े, तो एसआइटी के गठन का प्रस्ताव भी दें. लेकिन एसआइटी गठित नहीं हुई.20 फरवरी 2016 को एसआइटी की अनुशंसा की गयी. गृह विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव शेखर जमुआर ने एसआइटी का गठन संबंधी पत्र जारी किया.
एसआइटी का अध्यक्ष डीआइजी बोकारो को बनाया गया. वहीं खनन विभाग के अपर समाहर्ता, वन विभाग के अपर समाहर्ता, वाणिज्य कर विभाग के अपर समाहर्ता, परिवहन विभाग के अपर समाहर्ता और अन्य विभाग के अपर समाहर्ता को सदस्य बनाया गया. लेकिन जांच आज तक नहीं हुई.
कोयला कारोबारियों से एनआइए के अधिकारी करते रहे पूछताछ : नक्सली संगठनों को आर्थिक मदद करने के आरोप में एनआइए ने मंगलवार को झारखंड और पश्चिम बंगाल में छापेमारी की थी. अगले दिन बुधवार को रांची स्थित अस्थायी कार्यालय में एनआइए के अधिकारी नक्सलियों को मदद पहुंचाने वाले लोगों से पूछताछ करते रहे. हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसी द्वारा कुछ भी नहीं बताया गया.
एनआइए ने रातू में डाली दबिश, जमीन में लगाये गये हैं अवैध कमाई के पैसे रांची : नक्सली संगठनों को आर्थिक तौर पर कोयला ट्रांसपोर्टरों द्वारा मदद किये जाने के मामले की जांच एनआइए जैसे-जैसे कर रही है नये-नये खुलासे हो रहे हैं. मंगलवार
को छापेमारी के दौरान ट्रांसपोर्टरों के यहां से जमीन में पैसे निवेश किये जाने के कई दस्तावेज मिले हैं. इसमें रांची के तुपुदाना और रातू में ट्रांसपोर्टर और कुछ सीसीएल के अफसरों द्वारा काली कमाई से बड़े प्लॉट खरीदे गये हैं.
सूत्रों के मुताबिक इसी सिलसिले में बुधवार को एनआइए की टीम ने कारोबारी अशोक कुमार के रातू स्थित दफ्तर पर दबिश दी. बताया जा रहा है कि वह कोयले में डीओ लगाने के साथ ही ट्रांसपोर्टिंग के धंधे से भी जुड़ा है. साथ ही सीसीएल के एक अफसर के पैसे को रातू क्षेत्र में जमीन खरीद में भी निवेश किया है. सोनू अग्रवाल के अलावा विष्णु से भी इसके संबंध है. सूत्रों के मुताबिक सोनू अग्रवाल कोयला के अलावा स्पंज आयरन सहित कई तरह के धंधा करता है. फिलहाल जांच एजेंसी को जो जानकारी हाथ लगी है, उससे आनेवाले समय में कई सफेदपोश लोगों की परेशानी बढ़ सकती है.
छापेमारी के दौरान मोबाइल में कई संदिग्ध की तसवीरें भी मिलीं
बताया जा रहा है मंगलवार को हुई छापेमारी के दौरान एक कारोबारी के मोबाइल से जांच एजेंसी के अधिकारियों को कुछ संदिग्ध लोगों की तस्वीरें भी मिली हैं. जांच के बाद खुलासा होगा कि ये लोग कौन हैं.
डायरी से कई की बढ़ सकती है परेशानी
कोयला ट्रांसपोर्टर के यहां से मिली डायरी में नक्सली संगठनों को पैसा दिये जाने के अलावा भी कई सफेदपोश लोगों के नाम हैं, जिन्हें समय-समय पर चढ़ावा चढ़ाया जाता था. इसकी जांच भी चल रही है.
कई आइपीएस अफसरों से सोनू अग्रवाल के हैं अच्छे संबंध
धनबाद : कोयला ट्रांसपोर्ट से जुड़े सोनू अग्रवाल का राज्य के कई आइपीएस अफसरों से बेहतर संबंध है. हाल के दिनों में एक वरिष्ठ आइपीएस से कुछ ज्यादा ही नजदीकियां बढ़ी हैं.
सूत्र बताते हैं कि सोनू को कोयले के कारोबार में इस अफसर ने काफी मदद की है. उसके कहने पर इस अफसर ने हजारीबाग के कटकमसांडी में एक ट्रांसपोर्टर का काम बंद करा दिया था. हालांकि उस ट्रांसपोर्टर ने कई पुलिस अफसरों से संपर्क किया, लेकिन उसका काम चालू नहीं हुआ. जब सोनू के पास दुर्गापुर जाकर समझौता किया तब उसका काम शुरू हुआ.
इसी तरह विरोधियों के खिलाफ पुलिसिया जांच कराने में भी सोनू ने अपने प्रभाव का उपयोग किया. यही वजह रही कि सोनू अग्रवाल काे झारखंड पुलिस ने आधा दर्जन बॉडीगार्ड दे रखा है. जानकार बताते हैं कि अपने दुर्गापुर आवास के अलावा एक खास होटल में अफसरों के लिए विशेष पार्टी का भी आयोजन किया जाता रहा है. जब पार्टी होती है, तो उस होटल को पूरा बुक कर लिया जाता है. किसी बाहरी की इंट्री नहीं होती. राज्य के पुलिस अफसर अंधेरे में दुर्गापुर पहुंचते हैं.
धनबाद में सोनू का कोई कारोबार नहीं है. बावजूद इस जिले से दो-दो पुलिस बॉडीगार्ड का मिलना उसके प्रभाव को दर्शाता है. सोनू ने धनबाद के एक-दो राजनेताओं से भी हाल में संबंध बनाये हैं. सूत्र बताते हैं कि कोयला के कारोबार में सोनू अपने लाभ के मुताबिक समय-समय पर पुलिस अफसरों को बदलता रहा है. प्रदेश के चर्चित रहे एक आइपीएस से पहले इसके मधुर संबंध थे, लेकिन इनके नहीं रहने के बाद इसने एक साल पहले एक वरिष्ठ पुलिस अफसर को अपना मददगार बना लिया है.
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