रांची : अब पशु तस्करी की जांच नहीं कर सकेंगे एसपीसीए अधिकारी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Sep 2018 7:24 AM
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रांची : पशु तस्करी की जांच के नाम पर उगाही करनेवाले एसपीसीए (सोसायटी फॉर दि प्रिवेंशन ऑफ क्रूयेल्टी टू एनिमल्स) नामक संस्था के अफसर अब पशु लदे वाहनों की जांच नहीं करेंगे. पुलिस मुख्यालय ने उनकी हर गतिविधियों पर रोक लगा दी है. साथ ही उनके वर्दी पहनने को अवैध करार दिया है. इस संबंध […]
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रांची : पशु तस्करी की जांच के नाम पर उगाही करनेवाले एसपीसीए (सोसायटी फॉर दि प्रिवेंशन ऑफ क्रूयेल्टी टू एनिमल्स) नामक संस्था के अफसर अब पशु लदे वाहनों की जांच नहीं करेंगे. पुलिस मुख्यालय ने उनकी हर गतिविधियों पर रोक लगा दी है. साथ ही उनके वर्दी पहनने को अवैध करार दिया है. इस संबंध में एडीजी अभियान अारके मल्लिक ने सभी जिलों के एसएसपी/एसपी को पत्र भेजा है. मुख्यालय ने अपने आदेश में कहा है कि एसपीसीए (झारखंड) एक गैर सरकारी संस्था है. इसके पदाधिकारियों को डीजीपी के स्तर से कोई भी स्थायी पुलिस शक्ति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया गया है.
इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि एसपीसीए झारखंड के निरीक्षक किस अधिकार के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं. इनके सभी तरह की गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाती है. साथ ही सात फरवरी 2007 को पुलिस मुख्यालय की ओर से निर्गत पुलिस वर्दी उपयोग संबंधी निर्देश को भी वापस लेने की बात कही गयी है.
पत्र में सभी जिलों के एसपी को कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र में कार्यरत एसपीसीए के निरीक्षकों व अवर निरीक्षकों की सूची तैयार करें. फिर यह पता करें कि क्या उनके पास झारखंड पुलिस या बिहार पुलिस के किसी भी पदाधिकारी द्वारा कोई स्थायी पुलिस शक्ति प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है क्या? अगर ऐसा है, तो उसकी प्रतिलिपि पुलिस मुख्यालय को अविलंब मुहैया कराएं.
एसपीसीए अफसरों की भूमिका पर उठा था सवाल
धनबाद क्षेत्र में कार्यरत एसपीसीए के दो पदाधिकारियों निरीक्षक अनिल व अवर निरीक्षक तरुण कुमार की कार्यशैली पर खुफिया विभाग ने सवाल खड़े किये थे. कहा था कि कई वर्षों से दोनों पदाधिकारी प्रतिनियुक्त हैं.
पशु तस्करी व प्रतिबंधित मांस की ढुलाई रोकने में उक्त दोनों पदाधिकारी सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं. दोनों वर्दी पहन कर भी छापेमारी करते हैं. अवैध पशु कारोबारियों व तस्करों को संरक्षण भी देते हैं. रांची में भी एसपीसीए की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए थे.
पशुओं की कैसे होती है तस्करी
बिहार के गया से झारखंड के रास्ते पशुओं की अवैध तस्करी होती है. पशु तस्कर झारखंड के चौपारण, बरही, बगोदर, तोपचांची, गोविंदपुर व मैथन चेकपोस्ट होते हुए पश्चिम बंगाल जाते हैं.
वहीं दूसरी ओर चौरंगी सोलानुपर और मैथन डैम के पास बराकर नदी के रास्ते पश्चिम बंगाल व निरसा के बरबेंदिया घाट से नाव के जरिये पश्चिम बंगाल तक पशुओं की अवैध तस्करी की जाती है. खुफिया विभाग की रिपोर्ट में यह बात कही गयी है. रिपोर्ट के अनुसार, जीटी रोड में सप्ताह में तीन-चार दिन 10-15 बड़े कंटेनरों, ट्रक व पिकअप वैन के माध्यम से रात्रि में अवैध पशुओं को ले जाया जाता है. पशु तस्कर प्रतिबंधित मांस की भी ढुलाई उपरोक्त मार्गों से करते हैं.
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