रांची : छुट्टियों में भी कोर्ट लगा लक्ष्य हासिल करें
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jul 2018 9:00 AM
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रांची : राज्य के न्यायिक अधिकारी दिये गये लक्ष्य हासिल करने में किसी से पीछे नहीं हैं. वर्ष 2017 में दिये गये लक्ष्यों को समय से पहले ही हासिल कर झारखंड ही नहीं, पूरे देश में नया उदाहरण प्रस्तुत किया है. लक्ष्य से अधिक मामले निष्पादित किये गये. लक्ष्य के तहत निष्पादित मामलों में कनविकशन […]
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रांची : राज्य के न्यायिक अधिकारी दिये गये लक्ष्य हासिल करने में किसी से पीछे नहीं हैं. वर्ष 2017 में दिये गये लक्ष्यों को समय से पहले ही हासिल कर झारखंड ही नहीं, पूरे देश में नया उदाहरण प्रस्तुत किया है.
लक्ष्य से अधिक मामले निष्पादित किये गये. लक्ष्य के तहत निष्पादित मामलों में कनविकशन रेट 68 प्रतिशत रहा. केंद्रीयविधि व न्याय मंत्रालय लंबित केसों के त्वरित निष्पादन के झारखंड मॉडल को पूरे देश में लागू करने पर विचार कर रहा है. इस बाबत मंत्रालय से चिट्ठी भेजी गयी है. यह झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि है. यह उपलब्धि न्यायिक अधिकारियों की कर्मठता व निष्ठापूर्वक काम करने की बदाैलत मिली है.
देश में कई अवसरों पर केस निष्पादन की चर्चा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्र द्वारा किया गया है. उक्त बातें झारखंड हाइकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस (एसीजे) डीएन पटेल ने कही. वे बुधवार को हाइकोर्ट बिल्डिंग के वीडियो कांफ्रेंसिंग हॉल से राज्य के न्यायिक अधिकारियों से बात कर रहे थे.
हाइकोर्ट के जज भी छुट्टी के दिन काम कर रहे हैं, तो आप क्यों नहीं : एसीजे श्री पटेल ने कहा कि इस वर्ष सभी जिलों में नया टास्क दिया गया है.
लक्ष्य हासिल करने के लिए न्यायिक अधिकारी रोटेशन के आधार पर छुट्टियों में भी काम कर सकते हैं. शनिवार, रविवार के साथ अन्य छुट्टी के दिन भी कोर्ट लगा कर मामलों की सुनवाई करें, ताकि निष्पादन का रेट बढ़ सके. लक्ष्य हासिल किया जा सके. अधिकारी अपनी छुट्टियों को कम कर सकते हैं. हाइकोर्ट के जज भी छुट्टी के दिन काम कर रहे हैं.
मामलों की सुनवाई कर उसका निष्पादन कर रहे हैं, तो आप क्यों नहीं कर सकते हैं. एसीजे ने कहा कि जो न्यायिक अधिकारी अच्छा काम करेंगे, लक्ष्य हासिल करेंगे, उन्हें प्रोन्नति मिलेगी. जो संतोषजनक कार्य नहीं करेंगे, वैसे अधिकारी घर भेजे जायेंगे. पिछले वर्ष 12 न्यायिक अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गयी थी. सजा सुनायें या बरी करें, यह आपका काम है.
श्री पटेल ने कहा कि हमें शॉर्टकट नहीं बल्कि पूर्ण रूप से मामलों का निष्पादन चाहिए. दिये गये लक्ष्य हासिल करने के लिए कोई कोताही नहीं बरती जाये. सही आंकड़ें दें. जजमेंट को वेबसाइट पर अपलोड करने में देर न की जाये.
मुझे झूठे आंकड़ों से नफरत है. जिले के प्रधान न्यायाधीश का फर्ज है कि वह अपने सहयोगी अधिकारियों के साथ बैठक करें, बातचीत कर आ रही परेशानियों को दूर करें. बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों व एसपी के साथ प्रत्येक 15 दिन पर बैठक की जाये. बार के सहयोग के बिना मामलों का निष्पादन संभव नहीं है. अकेले न्यायिक अधिकारी क्या कर सकता है.
श्री पटेल ने वर्ष 2018 के लक्ष्य के विषय में रांची, बोकारो, चाईबासा, देवघर आदि जिलों के प्रधान न्यायायुक्त व प्रधान जिला जज से जानकारी हासिल की. कहा कि पांच वर्षों से अधिक समय से लंबित 45,000 मुकदमों के निष्पादन का लक्ष्य तय किया गया है. चेक बाउंसिंग के 12,000 मामले, सरकार द्वारा सुझाये गये 1001 आपराधिक मुकदमों के साथ-साथ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में लंबित सभी मामलों के मार्च 2019 तक निष्पादन का टार्गेट अधिकारियों को दिया गया है. 1001 मुकदमों के निष्पादन के लिए 100 अधिकारियों को जिम्मेवारी दी गयी है. गिरिडीह, देवघर, चाईबासा में न्यायिक अधिकारियों की कमी को दूर करने का निर्देश दिया गया.
समय पूरा है, जो संभव है, वह बतायें सबसे पहले बोकारो जिले के न्यायिक अधिकारियों को लक्ष्य हासिल करने के लिए एक्टिंग चीफ जस्टिस ने निर्देश दिया. प्रधान न्यायाधीश ने दिये गये लक्ष्य को मार्च तक हासिल करने की बात कही.
वहीं रांची के प्रधान न्यायायुक्त नवनीत कुमार ने दिसंबर 2018 तक लक्ष्य हासिल कर लेने की बात कही. इस पर श्री पटेल ने कहा कि समय पूरा है, जो संभव है, वही बतायें. नवनीत कुमार ने कहा कि पांच साल से अधिक समय से जिले में 6000 मामले लंबित हैं. 1320 निष्पादित हो चुके हैं. वहीं जमशेदपुर के प्रधान जिला जज ने जनवरी 2019, देवघर के प्रधान जिला जज नेे फरवरी तक लक्ष्य हासिल कर लेने की बात कही.
501 मामलों के निष्पादन में 68 % रहा कनविक्शन रेट
राज्य सरकार के कहने पर पिछले वर्ष 501 आपराधिक मामलों के निष्पादन का लक्ष्य दिया गया था. न्यायिक अधिकारियों ने तय समय सीमा के अंदर 396 मुकदमों का निष्पादन किया. इसमें कनविक्शन का रेट 68 प्रतिशत रहा. 105 मामलों में अभियुक्त नहीं आये. अभियुक्तों को लाने की जिम्मेवारी सरकार की है. उन्हें फरार घोषित किया गया. गवाहों की गवाही तय समय पर दर्ज कराने में सरकार का भी सहयोग मिला.
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