शिक्षकों को विभिन्न पहलुओं पर विचार करना चाहिए
Updated at : 29 Jan 2020 12:49 AM (IST)
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मेदिनीनगर : टाउन हांल में प्रमंडल स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गयी. इसकी अध्यक्षता पलामू प्रमंडल के आरडीडीइ अरविंद विजय बिलुंग ने की. मैट्रिक व इंटर परीक्षा के उपरांत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की विधि तथा उसके गुणवत्ता संवर्द्धन के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित कार्यशाला में झारखंड अधिविद्य परिषद के सचिव महेश […]
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मेदिनीनगर : टाउन हांल में प्रमंडल स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गयी. इसकी अध्यक्षता पलामू प्रमंडल के आरडीडीइ अरविंद विजय बिलुंग ने की. मैट्रिक व इंटर परीक्षा के उपरांत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की विधि तथा उसके गुणवत्ता संवर्द्धन के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित कार्यशाला में झारखंड अधिविद्य परिषद के सचिव महेश कुमार सिंह ने उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन की विधि व गुणवत्ता संवर्द्धन के बारे में नवनियुक्त पीजीटी तथा टीजीटी शिक्षकों को जानकारी दी.
मौके पर जैक सचिव ने उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन को लेकर शिक्षकों को जानकारी दी तथा शिक्षकों द्वारा दी गयी जानकारी तथा उनके मन में उत्पन्न होने वाले संशय के बारे में भी स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि कॉपी मूल्यांकन के समय छात्रों की बेहतरी का ख्याल रखना सबसे अहम बात है. स्टेप मार्किंग व जीरो मार्किंग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के क्रम में शिक्षक हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि जो विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुआ है, उसकी इंटेलिजेंसी शिक्षक के आइक्यू से बेशक कमतर है. ऐसी स्थिति में कॉपी जांच करने वाला शिक्षक कभी इस अपेक्षा से कॉपी का मूल्यांकन नहीं करें कि प्रश्नों का उत्तर देते समय छात्र ने उच्च गुणवत्ता अथवा आइक्यू के पैरामीटर तक पहुंच पायेगा.
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि छात्रों को उनके द्वारा किये गये प्रयास का प्रतिफल उन्हें मिलना चाहिए.उनका हक बनता है. उन्होंने कहा कि जीरो मार्किंग से पहले शिक्षकों को विभिन्न पहलुओं पर विचार करना चाहिए. यह तय करना है कि वे किन परिस्थितियों में जीरो मार्किंग कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि मुख्यत: तीन स्थिति में विद्यार्थी को जीरो मार्किंग किया जा सकता है. यदि परीक्षार्थी ने कॉपी को बिल्कुल खाली यानी कोरा छोड़ दिया हो, दूसरा यदि उत्तर पूरी तरह से गलत दिया हो और तीसरी स्थिति ऐसी बन सकती है कि जब छात्र द्वारा अपनी कॉपी में केवल प्रश्न पत्र ही उतार दिया हो. जैक सचिव ने कहा कि और कोई कारण नहीं बनता, जहां छात्र द्वारा दिये गये उत्तर के बदले जीरो मार्किंग किया जाये.
उन्होंने कहा कि शिक्षक को भले स्पष्ट रूप से समझ में आता हो, या पढ़ा नहीं जा रहा हो. ऐसी स्थिति में भी शिक्षकों का दायित्व बनता है कि वह कॉपी जांच करते समय छात्र के प्रयास की दिशा को समझें. उन्होंने कहा कि शिक्षकों का भी पॉजिटिव होना चाहिए. क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक अरविंद विजय बिलुंग ने उन्मुखीकरण कार्यशाला का विषय प्रवेश कराते हुए उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर पलामू के जिला शिक्षा पदाधिकारी उपेंद्र नारायण तथा गढ़वा के जिला शिक्षा पदाधिकारी राम प्रसाद मंडल मौजूद थे.
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