सिमट गया जंगलों का दायरा

Updated at : 07 Dec 2016 2:08 AM (IST)
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सिमट गया जंगलों का दायरा

बड़ी खबर . अमड़ापाड़ा इलाके के जंगलों से अंधाधुंध काटे जा रहे पेड़ अंतरराज्यीय लकड़ी माफियाें ने किया जंगलों का सफाया लकड़ी काट कर भेजा जा रहा बंगाल सहित दूसरे राज्यों में वन सुरक्षा समिति कागजों पर ही कर रही काम अमड़ापाड़ा : प्रखंड क्षेत्र के लगभग 3500 हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्रों से इन […]

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बड़ी खबर . अमड़ापाड़ा इलाके के जंगलों से अंधाधुंध काटे जा रहे पेड़

अंतरराज्यीय लकड़ी माफियाें ने किया जंगलों का सफाया
लकड़ी काट कर भेजा जा रहा बंगाल सहित दूसरे राज्यों में
वन सुरक्षा समिति कागजों पर ही कर रही काम
अमड़ापाड़ा : प्रखंड क्षेत्र के लगभग 3500 हेक्टेयर में फैले वन क्षेत्रों से इन दिनों धड़ल्ले से अवैध रूप से लकड़ियों की कटाई जारी है. वन माफियाओं द्वारा जंगलों की अंधाधुंध सफाई से वन क्षेत्र का दायरा तेजी से घट रहा है. जानकारी के मुताबिक प्रखंड क्षेत्र के आलूबेड़ा, पचुवाड़ा, पाडेरकोला व सिंगरसी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर माफियाओं द्वारा लकड़ियों की कटाई की जा रही है. जंगलों से कीमती लकड़ियों की सफाये के धंधे में अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य भी जुड़े हुए हैं. ऐसे तो वन सुरक्षा समिति का गठन विभाग द्वारा की गयी है. पर महज कागजों पर ही यह समिति ज्यादातर जगहों में काम कर रही है.
सूत्रों की मानें तो विभाग कभी कभार ही छापेमारी कर केवल खानापूर्ति का काम करती है. अनुमानित हजार हेक्टेयर से भी ज्यादातर वनों में लगे कीमती लकड़ियों को वन माफिया द्वारा काट कर बेच दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक अमड़ापाड़ा के जंगलों से काटी गयी लकड़ियों को वन माफिया द्वारा पश्चिम बंगाल भी ले जाया जाता है. इस क्रम में संबंधित थाने से लेकर वन विभाग के दफ्तर व चेकनाका तक की सहभागिता होती है. वर्षों से वनों के सफाये में जुटे लकड़ी माफियाओं की सक्रियता इस कदर हावी है कि आम लोगों के विरोध किये जाने के बाद भी कोई भी कार्रवाई उस पर नहीं हो पाती है.
अब तक चार बार वन विभाग द्वारा छापेमारी कर जब्त की गई है लकड़ियां
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक वन विभाग प्रक्षेत्र अमड़ापाड़ा के पदाधिकारियों द्वारा अब तक इस वर्ष चार बार अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कीमती लकड़ियां जब्त की गयी है. जानकारी के मुताबिक सितंबर माह में अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र के आलूबेड़ा पंचायत के लिट्टीपाड़ा से 17 बोटा लकड़ी जब्त किया गया. वहीं फरवरी माह में सिंगरसी पंचायत के गौरपाड़ा मे वन विभाग द्वारा छापेमारी की गई. इसके अलावे एक बार और वन विभाग द्वारा छापेमारी की गयी. जिसमें कई कीमती लकड़ियां सागवान, शीशम, गम्हार आदि जब्त किये गये थे. इधर सोमवार की देर शाम गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग के पदाधिकारियों द्वारा मोरियो गांव से भारी मात्रा में कीमती लकड़ियाें को जब्त किया गया. कुल 75 बोटा सखुवा की लकड़ी वन विभाग ने जब्त किया है. पूरे आंकड़े पर यदि नजर डाली जाय तो स्थिति स्पष्ट है कि बड़े पैमाने पर लकड़ी माफियाओं द्वारा जंगलों का सफाया तो किया जा रहा है,परंतु विभाग केवल खानापूर्ति के लिए कभी-कभी छापेमारी करती है.
रुपये की लालच में प्रकृति को पहुंचा रहे नुकसान
कहते हैं डीएफओ
डीएफओ नागेंद्र बैठा ने बताया कि छापेमारी में जब्त अधिकांश लकडि़यां जंगलों से नहीं बल्कि रैयतों के होते हैं. उन्होंने बताया कि वन विभाग में संसाधन की काफी कमी है. बावजूद लगातार इस तरह के अभियान चलाये जाते हैं. उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि जंगल से भी कुछ लकडि़यों की कटाई हुई है और इस दिशा में विभाग आगे भी कार्रवाई करते रहेगी.
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