गिरोह के दो सदस्य चढ़े पुलिस के हत्थे

Updated at : 14 Feb 2018 1:34 AM (IST)
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गिरोह के दो सदस्य चढ़े पुलिस के हत्थे

कार्रवाई . फर्जी चालान तैयार कर करते थे राजस्व की चोरी हिरणपुर के राजेश भगत व पाकुड़ चांचकी के अब्दुल कबीर गिरफ्तार पाकुड़ : फर्जी चालान तैयार कर वाहनों से पत्थर की ढुलाई कर राजस्व की चोरी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया […]

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कार्रवाई . फर्जी चालान तैयार कर करते थे राजस्व की चोरी

हिरणपुर के राजेश भगत व पाकुड़ चांचकी के अब्दुल कबीर गिरफ्तार
पाकुड़ : फर्जी चालान तैयार कर वाहनों से पत्थर की ढुलाई कर राजस्व की चोरी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है. मामले को लेकर एसपी शैलेंद्र प्रसाद वर्णवाल ने अपने कार्यालय कक्ष में मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि तीन फरवरी को हिरणपुर थाना क्षेत्र से गुप्त सूचना के आधार पर वाहन संख्या जेएच 17 ई 4245 जब्त किया था. जब्त कर जांच किये जाने के पश्चात उसमें फर्जी चालान पाया गया था.
मामले को लेकर थाना कांड संख्या 08/18 के तहत ट्रक मालिक गोड्डा जिला के मुफस्सिल थाना अंतर्गत सरोनी निवासी निवास भगत व चालक पाकुड़ जिला के हिरणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत जबरदाहा निवासी राजकिशोर भगत को न्यायिक हिरासत में लिया था. अनुसंधान में फर्जी चालान का कारोबार इस क्षेत्र में एक बड़े रैकेट बना कर माफिया के काम करने की जानकारी पुलिस को मिली थी.
जिसके बाद एसडीपीओ श्रवण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गयी थी. टीम ने ऐसे कारोबारियों का पर्दाफाश करते हुए इस गिरोह के मास्टरमाइंड हिरणपुर थाना क्षेत्र के जबरदाहा निवासी राजेश भगत को गिरफ्तार किया. राजेश भगत की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर पाकुड़ मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चांचकी निवासी अब्दुल कबीर के दुकान पर छापेमारी की गयी. छापेमारी के क्रम में काला रंग का फॉक्सीन कंपनी का एक सीपीयू को भी जब्त किया गया है.
कैसे तैयार होता था फर्जी चालान
एसपी ने बताया कि चालान के ऑरिजिनल कॉपी को पहले कंप्यूटर में अपलोड किया जाता था. इसके बाद अब्दुल कबीर द्वारा एडिट कर चालान की कॉपी में खनन विभाग की ओर से अंकित तिथि, गाड़ी संख्या व समय को अपने सुविधानुसार बदल दिया जाता था. जिसकी कॉपी प्रिंट कर निकाला जाता था और इसी फर्जी चालान पर अंकित किये गये वाहन नंबर वाली ट्रक को खदान से चलाया जाता था. इस मामले में इस क्षेत्र में एक बड़ा रैकेट तैयार है, जो बड़े पैमाने पर ऐसे अवैध कारोबार कर कम समय में काफी पूंजी बना चुके हैं और सरकार के करोड़ों के राजस्व का नुकसान भी कर चुके हैं.
कैसे हुआ मामले का खुलासा
एसपी शैलेंद्र प्रसाद वर्णवाल ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि लंबे समय से इस क्षेत्र में फर्जी चालान को लेकर एक रैकेट सक्रिय है. फर्जी चालान निकाले जाने मामले की सूचना मिलने पर खनन विभाग के पदाधिकारियों के साथ हिरणपुर थाना क्षेत्र में संयुक्त अभियान चला कर छापेमारी की गयी थी. जिसके बाद यह मामला सामने आया है.
कितने में बिकता
था चालान
गिरोह द्वारा तैयार किये गये फर्जी चालान को ट्रक मालिक के पास 1500 रूपये में बेचा जाता था. जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर को प्रति चालान के बदले 500 रुपये दिया जाता था. ऐसे विभाग को प्रति चालान 400 सीएफटी का 1700 रुपये देना पड़ता था. इसके अलावे एक चालान पर एक बार ही ट्रक पर माल की ढुलाई हो पाती थी. गिरोह के सदस्यों ने फर्जी चालान तैयार कर एक चालान पर कई बार खदान से एक ही ट्रक पर माल की ढुलाई की जाती थी.
राजेश भगत पर कई मामले हैं दर्ज
पाकुड़ जिला के हिरणपुर थाना क्षेत्र के जबरदाहा निवासी राजेश भगत पर पूर्व में भी कई मामले दर्ज हैं. राजेश भगत फर्जी चालान के कारोबार के अलावे पशु तस्करी सहित अन्य अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ है. इससे पूर्व 23 दिसंबर 2017 को सिंगलौम में धराये मवेशी मामले में उन्हें कांड संख्या 65/17 के तहत नामजद अभियुक्त बनाया गया हैं. इसके अलावे 30 जून हिरणपुर थाना क्षेत्र में चार वाहन पर लदे 45 मवेशी जब्त मामले में भी उसे थाना कांड संख्या 55/17 के तहत नामजद अभियुक्त बनाया गया है.
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