बाल विकास परियोजना कार्यालय बदहाल

Updated at : 04 Nov 2016 5:05 AM (IST)
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बाल विकास परियोजना कार्यालय बदहाल

सीडीपीओ के आने-जाने का समय निर्धारित नहीं, जैसे-तैसे होता है काम कार्यालय सहायक अपने पैसे से एक महिला को रख खुलवाते हैं कार्यालय मरकच्चो. प्रखंड के कुल 16 पंचायतों के गरीब घरों के नौनिहाल के पोषण की जिम्मेवारी उठाने वाला बाल विकास परियोजना कार्यालय इन दिनों खुद बदहाल है. सीडीपीओ सुनीता कुमारी अग्रवाल का पदस्थापना […]

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सीडीपीओ के आने-जाने का समय निर्धारित नहीं, जैसे-तैसे होता है काम

कार्यालय सहायक अपने पैसे से एक महिला को रख खुलवाते हैं कार्यालय

मरकच्चो. प्रखंड के कुल 16 पंचायतों के गरीब घरों के नौनिहाल के पोषण की जिम्मेवारी उठाने वाला बाल विकास परियोजना कार्यालय इन दिनों खुद बदहाल है. सीडीपीओ सुनीता कुमारी अग्रवाल का पदस्थापना डोमचांच में है और उनके पास मरकच्चो का अतिरिक्त प्रभार है.

ऐसे में उनके आने व जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है. यही हाल कार्यालय के अन्य कर्मियों का है. ऐसे में आमलोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कार्यालय में जैसे-तैसे काम होने से योजनाएं भी प्रभावित हो रही है. जानकारी के अनुसार कार्यालय के सहायक राजीव कुमार इकलौते कार्यालय कर्मी हैं. वे भी अपनी सुविधा के लिए सिर्फ कार्यालय का ताला समय पर खोलने व लगाने के लिए अलग से सफाई कर्मी के नाम पर एक महिला को अपने खर्च पर रखे हुए हैं. उक्त महिला को एक हजार महीना उनके द्वारा भुगतान किया जाता है. कई बार कार्यालय उक्त महिला सफाई कर्मी द्वारा ही खोल दिया जाता है.

कर्मी के कार्यालय में देर से पहुंचने या कार्यालय नहीं आने का कारण ग्रामीण पूछते हैं, तो वे प्रतिदिन जिला में रिपोर्टिंग व जिला में काम करने की बात कह अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. साथ ही बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी बनाने के काम को भी वह अपने पदस्थापन प्रखंड में नहीं बनाकर जिला में ही बनाते हैं. यहीं नहीं बताया जाता है कि सीडीपीओ के कार्यालय पहुंचने का कोई दिन निश्चित नहीं होने के कारण प्रखंड क्षेत्र के दूर-दराज से आनेवाले ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है.

दर्जनों की संख्या में कार्यालय काम से पहुंचने वाले ग्रामीण थक हार कर शाम में घर लौट जाते हैं. उसमें कई लोग अपने क्षेत्र के आंगनबाड़ी की शिकयतें लेकर भी आते हैं. परंतु उनकी भी सुनने वाला कोई नहीं है. फलस्वरूप प्रखंड के 100 से भी अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल राम भरोसे चल रहा है. प्रखंड की एकमात्र पर्यवेक्षिका मीना केसरी भी कार्यालय की बदहाली की बात को स्वीकार करती है.

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