अड़की के छह गांवों में पत्थलगड़ी : यूसुफ पूर्ति की ग्रामीणों से अपील, हम मालिक, सारे पहचान पत्र फेंक दें, जानें
Updated at : 27 Apr 2018 6:15 AM (IST)
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खूंटी : अड़की प्रखंड के छह गांव इट्टीहस्सा, बंजीउली, हेंदेहस्सा, कुलापोतेद, बांकिरा व जटुवा में गुरुवार को पत्थलगड़ी की गयी. इसके बाद हेंदेहस्सा में जनसभा हुई. जनसभा में नया फरमान जारी किया गया. आदिवासी महासभा के यूसुफ पूर्ति ने ग्रामीणों से आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य सभी प्रकार के पहचान पत्र को […]
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खूंटी : अड़की प्रखंड के छह गांव इट्टीहस्सा, बंजीउली, हेंदेहस्सा, कुलापोतेद, बांकिरा व जटुवा में गुरुवार को पत्थलगड़ी की गयी. इसके बाद हेंदेहस्सा में जनसभा हुई. जनसभा में नया फरमान जारी किया गया. आदिवासी महासभा के यूसुफ पूर्ति ने ग्रामीणों से आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य सभी प्रकार के पहचान पत्र को फेंकने की अपील की. कहा, सरकार द्वारा नागरिकों को पहचान पत्र दिया जाता है़ हम मालिक हैं. सरकार ने हमें पहचान पत्र देकर हमें भी नागरिक बना दिया है़
यूसुफ ने ग्रामीणों को अच्छी तरह सोच-विचार कर अपना पहचान पत्र फेंकने की बात कही. उसने कहा कि ग्रामसभा द्वारा ही पहचान पत्र जारी किया जायेगा़, जो सभी जगह मान्य होगा़ जहां भी आधार कार्ड मांगा जायेगा, वहां हम नहीं जायेंगे़ उन्होंने कहा कि स्कूलों में आधार कार्ड मांगा जाता है. वहां भी हम अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे़ ग्रामसभा अपना स्कूल चला रही है़ हम अपने बच्चों को वहीं पढ़ायेंगे. बैंक में भी आधार कार्ड मांगा जाता है़ इसे लेकर विचार किया जा रहा है़
यूसुफ ने कहा कि जल्द ही ग्रामसभा द्वारा अपना बैंक खोला जायेगा़ बैंक ऑफ ग्रामसभा के नाम से जल्द ही इस बैंक का उद्घाटन किया जायेगा़ ग्रामसभा के बैंक में आधार कार्ड की जरूरत नहीं होगी़ स्वयं सहायता समूहों की तरह ही यह बैंक भी कार्य करेगा़ जिसमें ग्रामसभा के लोग ही शामिल होंगे़ जोन जुनास तिड़ू ने कहा कि सरकार ने हमारी जमीन बेचने का काम किया है़ हम पत्थलगड़ी कर अपनी जमीन बचाने का काम कर रहे हैं. जब तक पांचवीं अनुसूची को लागू नहीं किया जाता है, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा़ मौके पर बलराम समद सहित ग्रामीण उपस्थित थे़
हमारे बीच के आदिवासी ही दलाल : यूसुफ पूर्ति ने कहा कि हमारे बीच के आदिवासी ही दलाल हैं. उनके कारण आदिवासी बर्बाद हो रहे हैं. धर्म और जाति के नाम पर बांटा जा रहा है़ आदिवासी तो तब से हैं, जब कोई धर्म ही नहीं था़
उन्होंने कहा कि आदिवासी पूरे विश्व के मालिक हैं, लेकिन इतिहास में आदिवासियों से संबंधित बातों को नहीं लिखा गया है़ यूसुफ ने सिंधु-घाटी की सभ्यता को आदिवासियों की सभ्यता बतायी. कहा कि जिस दिन आदिवासी खुद को पहचान लेंगे, वे फिर से अपना साम्राज्य चलायेंगे़
आदिवासियों पर नहीं लगती आइपीसी की धारा : यूसुफ पूर्ति ने कहा कि हम पत्थलगड़ी कर रहे हैं, तो सरकार द्वारा केस किया जा रहा है़ जबकि आदिवासियों पर आइपीसी की धारा नहीं लगती है़ यह आइपीसी-सीआरपीसी के सेक्शन पांच में साफ लिखा हुआ है़ आदिवासियों को डराया जा रहा है़ लीडिंग करनेवालों पर केस किया जा रहा है़ पुलिस संविधान व आइपीसी का उल्लंघन कर रही है़
जमीन सर्वे खतरनाक
यूसुफ पूर्ति ने सरकार द्वारा जिले में किये जानेवाले भू-सर्वे को आदिवासियों के लिए खतरनाक बताया. कहा कि हमारे पूर्वजों ने यहां की जमीन को रहने व खेती करने लायक बनाया़ सरकार जमीन का सर्वे करनेवाली कौन है़
पूर्व के खतियान के आधार पर जो रसीद दी जाती थी, उसमें भी अक्षर लिखा होता था़ जिसका अर्थ था रानी विक्टोरिया़ रसीद का पैसा रानी विक्टोरिया को जाता था़ अब जो रसीद दी जा रही है उसमें भी अक्षर हटा दिया गया है़ वहीं नीचे लिखा होता है कि यह रसीद किसी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की जा सकती है. ऐसे में इसका क्या औचित्य है़
जब तक लोक अधिसूचना जारी नहीं होती, चुनाव में शामिल नहीं होंगे : जनसभा में यूसुफ पूर्ति ने कहा कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के लिए जब तक लोक अधिसूचना जारी नहीं होती है, तब तक हमलोग वोट नहीं देंगे़ हम वोट देकर गुलाम नहीं बनना चाहते हैं.
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