कानूभट्ठा में सरकारी व वन विभाग की जमीन धड़ल्ले से बेच रहे हैं भू-माफिया

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जमशेदपुर : सिदगाेड़ा थाना अंतर्गत भुइयांडीह कानू भट्ठा पहाड़ पर भू-माफियाें की नजर लग गयी है. हर दिन प्लॉटिंग कर जमीन बेची जा रही है. साढ़े चार लाख रुपये कट्ठा के हिसाब से जमीन की प्लाटिंग कर उसे बेचा जा रहा है. काफी लाेगाें ने जमीन काे खरीद कर उस पर बड़े स्तर पर फाउंडेशन […]

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जमशेदपुर : सिदगाेड़ा थाना अंतर्गत भुइयांडीह कानू भट्ठा पहाड़ पर भू-माफियाें की नजर लग गयी है. हर दिन प्लॉटिंग कर जमीन बेची जा रही है. साढ़े चार लाख रुपये कट्ठा के हिसाब से जमीन की प्लाटिंग कर उसे बेचा जा रहा है. काफी लाेगाें ने जमीन काे खरीद कर उस पर बड़े स्तर पर फाउंडेशन तक चारदीवारी बनाकर अपना कब्जा ले लिया है.
एक आेर बिरसानगर में जिला प्रशासन सरकारी जमीन का अतिक्रमण करने वाले अतिक्रमणकारियाें के खिलाफ अभियान चलाने की याेजना बना रहा है, वहीं दूसरी आेर कुछ स्थानीय पुलिस पदाधिकारियाें की मिलीभगत से 50-60 बीघा जमीन पर प्लाटिंग का काम जाेराें पर चल रहा है. अंचलाधिकारी महेश्वर महताे ने बताया कि पिछले दिनाें जमीन की घेराबंदी किये जाने की सूचना मिलने के बाद अंचलकर्मियाें काे भेजा गया था. मामले में कुछ लाेगाें की संलिप्ता पायी गयी है. इसके बाद दाे लाेगाें के खिलाफ बीपीएलइ केस दर्ज किया गया था.
सुवर्णरेखा नदी का पानी कटाव के बाद शहर में नहीं घुसे, इसलिए कंपनी द्वारा 25-26 साल पहले भुइयांडीह कानू भट्ठा में पहाड़ का निर्माण कराया था. पहाड़ी इलाका हाेने के कारण अब वहां काफी पेड़-पाैधे उग आये हैं. महिलाएं इस क्षेत्र का उपयाेग लकड़ी काटने आैर सार्वजनिक शाैचालय के लिए करती थी. जमीन माफियाआें द्वारा महिलाआें काे पिछले दिनाें कुछ लाेगाें ने इस तरफ नहीं आने की धमकी दी है.
महिलाआें ने बताया कि यहां शाैच के लिए काेई जगह नहीं है. जमीन की घेराबंदी में एक पूर्व मंत्री के करीबी शामिल बताये जाते हैं. पिछले दिनाें पैसाें के बंटबारे काे लेकर आपस में हिंसक झड़प भी हाे गयी थी, लेकिन मामले काे कुछ लाेगाेें ने आपस में ही सुलझाने का काम किया.
प्लॉटिंग के बाद यदि काेई व्यक्ति घर निर्माण के लिए बाउंड्री नहीं करता, ताे उसकी जमीन काे माफिया फिर से बेचने की तैयारी में जुट जाते हैं.
इसके अलावा घर निर्माण के लिए भी अलग से रंगदारी की मांग करते हैं. अवैध जमीन पर विवाद हाेने की स्थिति में खरीदार चाहकर भी पुलिस के पास जाने की काेशिश नहीं करते. जमीन माफिया स्थानीय लाेगाें काे यह कहकर धमकाते हैं कि पुलिस उनके साथ है आैर खरीदाराें काे यह कहकर ऊंचा दाम लेते हैं कि पैसे में पुलिस की भी हिस्सेदारी है.
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