फंसे रहे बाहर गये विद्यार्थी व ग्रामीण

By Prabhat Khabar Digital Desk
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बड़कागांव : बारिश से बड़कागांव स्थित काड़तरी नदी के झूलन पुल का एप्रोच टूट कर बह गया. एप्रोच बह जाने से दर्जनों गांव का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कट गया. स्थिति यह हुई कि एप्रोच बहने से स्कूली बच्चे समेत बाजार आये हुए लोग वापस घर नहीं लौट पाये. ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया.
भारी बारिश के कारण गत वर्ष अगस्त 2017 में बड़कागांव प्रखंड स्थित कांड़तरी पुल का तीन पाया बह गया था. वहीं नदी के बगल में पीएचइडी का बना कुआं, मकान व कई एकड़ में लगे फसल भी बह गये थे. यह पुल 2004 में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बना था, जो 12 वर्ष में टूट गया. पिछले साल एनटीपीसी की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ग्रामीणों की सुविधा के लिए 15 लाख रुपये की लागत से लोहे और पाइप से इस पुल का निर्माण कराया गया था.
पिछले वर्ष कई बार टूटा था पुल का पाया: ज्ञात हो कि सबसे लंबा कांड़तरी पुल का एक पाया भारी बारिश के कारण जुलाई-2014 में धंस गया था. जुलाई-2015 में भी पुल का दूसरा पाया धंसा था. वहीं 18 अगस्त-2016 को टूट गया था. उसके बाद से ही दर्जनों गांवों का आवागमन बाधित है.
अगस्त-2014 में भी इस पुल का पाया धंस गया था, लेकिन इसकी मरम्मति नहीं हुई. इसी तरह 18 अगस्त को इस पुल के दो जगहों पर पाया धंस गया था.
इन गांवों का टूटा संपर्क
कांड़तरी पुल टूटने से कांड़तरी पंचायत, मिर्जापुर, सोनपुरा, महुदी, बरसोपानी, आंगों, चेलंगदाग, झिकझोर, सिरमा पंचायत, खैरातरी, पगार, डुमारो जल प्रपात, बथनिया जल प्रपात, बंदरचुआं जल प्रपात, बुढ़वा महादेव, छवनिया, पड़रिया समेत दर्जनों गांवों का आवागमन ठप हो गया है. वहीं लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. किसान बिक्री के लिए बाजार नहीं पहुंच पा रहे हैं. वही विद्यार्थी स्कूल कॉलेज जाने से वंचित है. अब किसानों, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय आने के लिए तीन किमी की जगह 15 किमी का सफर तय करना पड़ेगा.
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