संगठन में दुर्व्यवहार किये जाने से नाराज था
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Jun 2017 8:56 AM (IST)
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एसपी से संपर्क कर मुख्यधारा से जुड़ा जिले के विभिन्न थानाें में दर्ज हैं 11 मामले गुमला : पीएलएफआइ के सब जोनल कमांडर राजन उर्फ प्रकाश उरांव को गुमला पुलिस ने गुरुवार को मीडिया के सामने प्रस्तुत किया. एक सप्ताह पहले राजन ने सरेंडर किया था. उस पर दो लाख रुपये का इनाम था. सरेंडर […]
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एसपी से संपर्क कर मुख्यधारा से जुड़ा
जिले के विभिन्न थानाें में दर्ज हैं 11 मामले
गुमला : पीएलएफआइ के सब जोनल कमांडर राजन उर्फ प्रकाश उरांव को गुमला पुलिस ने गुरुवार को मीडिया के सामने प्रस्तुत किया. एक सप्ताह पहले राजन ने सरेंडर किया था. उस पर दो लाख रुपये का इनाम था. सरेंडर करने के बाद उसे आत्मसमर्पण नीति नयी दिशा के तहत सरकारी सुविधा प्राप्त होगी.
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राजन पर रायडीह, गुमला, घाघरा व पालकोट थाना क्षेत्र में 11 मामले दर्ज हैं. राजन ने बताया कि संगठन में नीति व सिद्धांत खत्म हो गया है. संगठन के लोग उसके साथ दुर्व्यवहार करते थे, इसलिए उसने गुमला एसपी से संपर्क कर सरेंडर कर दिया. एसपी चंदन कुमार झा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि राजन बरगांव बरवाटोली का रहने वाला है. उसने आत्मसमर्पण करने की बात पुलिस के समक्ष रखी. इसके बाद उसे नयी दिशा के तहत आत्मसमर्पण कराया गया. राजन अब मुख्यधारा से जुड़ गया है. नयी दिशा के तहत मिलने वाली हर सुविधा उसे दी जायेगी.
एसपी ने कहा कि उग्रवादियों के खिलाफ गुमला जिला में युद्ध कौशल व रणनीति के तहत सघन अभियान चलाया जा रहा है. इससे उग्रवादी बैकफुट पर चले गये हैं. कुछ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, कुछ आत्मसमर्पण कर रहे हैं. बहुत जल्द गुमला जिला पीएलएफआइ से मुक्त होगा. प्रेस कांफ्रेंस में सीआरपीएफ के सीओ रंजीत सिंह, एएसपी सरोज कुमार, एसडीपीओ भूपेंद्र राउत, एसडीपीओ बच्चनेदव कुजूर, सीआरपीएफ के महेंद्र सिंह, गुमला थानेदार राकेश कुमार, रायडीह थानेदार राजेश कुमार सिंह व सिसई थानेदार सुदामा चौधरी सहित पुलिस के कई पदाधिकारी थे.
10 वर्षों तक संगठन में रहा : राजन वर्ष 2007 में संगठन में शामिल हुआ था. रांची जोन का हेड बड़ा संजय गोप उर्फ संजय टाइगर के कहने पर वह संगठन से जुड़ा था. राजन को गुमला पूर्वी व बसिया क्षेत्र दिया गया था. पांच-छह महीना काम करने के बाद राजन ने संगठन छोड़ दिया. करीब एक वर्ष तक वह दिल्ली स्थित अपने जीजा व बहन घर रहा.
इसके बाद लोहरदगा आ गया. पुन: वर्ष 2013 में वह छोटा संजय के कहने पर दस्ता से जुड़ गया. छोटा संजय के जेल जाने के बाद राजन को दस्ता की जिम्मेवारी मिली. सक्रिय रूप से राजन संगठन में रहते हुए कई घटनाओं को अंजाम दिया, लेकिन इस दौरान संगठन द्वारा उसके और अन्य सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया जाने लगा. इसके बाद उसने संगठन छोड़ने का मन मनाया और पुलिस से संपर्क कर सरेंडर कर दिया.
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