ग्राशिस के खाते में फंसी है 4.30 करोड़ की रॉयल्टी राशि
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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डीएसइ ने खनन विभाग में राशि जमा कर सर्व शिक्षा को प्रतिवेदन सौंपने का दिया निर्देश अभी तक कई ग्राशिस ने नहीं सौंपी है राशि गिरिडीह : सरकारी स्कूलों में गठित ग्राम शिक्षा समिति के खाते में स्कूल भवन निर्माण को लेकर रॉयल्टी की करीब 4.30 करोड़ राशि फंसी है. डीएसइ ने रॉयल्टी की राशि […]
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डीएसइ ने खनन विभाग में राशि जमा कर सर्व शिक्षा को प्रतिवेदन सौंपने का दिया निर्देश
अभी तक कई ग्राशिस ने नहीं सौंपी है राशि
गिरिडीह : सरकारी स्कूलों में गठित ग्राम शिक्षा समिति के खाते में स्कूल भवन निर्माण को लेकर रॉयल्टी की करीब 4.30 करोड़ राशि फंसी है. डीएसइ ने रॉयल्टी की राशि खनन विभाग में जमा कर सर्व शिक्षा को प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश भी दिया है. बावजूद अभी तक कई ग्राम शिक्षा समितियां रॉयल्टी की राशि जमा करने में गंभीर नहीं दिख रही है. वर्ष 2002-03 से लेकर वर्ष 2013-14 तक स्कूल भवनों में अतिरिक्त वर्ग कक्ष का निर्माण कराया गया.
करीब पांच सौ करोड़ रुपये अतिरिक्त वर्ग कक्ष के निर्माण में खर्च हुए. सरकारी प्रावधान के अनुसार भवन निर्माण को लेकर दी गयी राशि का एक प्रतिशत रॉयल्टी खनन विभाग के पास जमा करनी है, लेकिन अभी तक मात्र 70 लाख रुपये ही रॉयल्टी के रूप में जमा की गयी. शेष 4.30 करोड़ रॉयल्टी की राशि बार-बार निर्देश के बावजूद जमा नहीं की जा रही है.
क्या है रॉयल्टी का नियम
विद्यालय भवन निर्माण करने में 60 रुपये प्रति हजार की दर से ईंट को लेकर रॉयल्टी जमा करने का प्रावधान है. इसी प्रकार 32 रुपये प्रति मीटर क्यूबिक रॉयल्टी बालू में और 63 रुपये प्रति मीटर क्यूबिक रॉयल्टी गिट्टी में जमा करने का प्रावधान है.
रॉयल्टी की राशि अवकाश ग्रहण करने वाले कई शिक्षक जमा तो कर रहे हैं, लेकिन कई ने मापी पुस्तिका नहीं भरे जाने की शिकायत भी विभाग के पास दर्ज करायी है. हालांकि विभाग ऐसे मामलों का निष्पादन करने में जुटा हुआ है.
रॉयल्टी जमा कर प्रतिवेदन सौंपें समितियां : डीएसइ
डीएसइ महमूद आलम ने कहा कि विभागीय प्रावधान के अनुसार भवन निर्माण में रॉयल्टी की राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है. सरकारी निर्देश की अवहेलना नहीं होनी चाहिए. ग्राम शिक्षा समितियां अविलंब खनन विभाग के पास रॉयल्टी की राशि जमा करें और इसका प्रतिवेदन सर्व शिक्षा अभियान के पास समर्पित करें. ऐसा नहीं होने पर दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जायेगी.
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