गिरिडीह संसदीय क्षेत्र की राजनीति ने अचानक लिया यू-टर्न, जानें

Updated at : 10 Mar 2019 7:37 AM (IST)
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गिरिडीह संसदीय क्षेत्र की राजनीति ने अचानक लिया यू-टर्न, जानें

गिरिडीह सीट से पांच बार जीत का रिकॉर्ड दर्ज किया है रवींद्र पांडेय ने बेरमो : एनडीए के एक फैसले के बाद गिरिडीह संसदीय क्षेत्र की राजनीति ने यू-टर्न ले लिया है. भाजपा की सीटिंग सीट (गिरिडीह) आजसू को दिये जाने की सहमति के बाद यहां से रिकॉर्ड पांच बार जीतने वाले सांसद रवींद्र कुमार […]

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गिरिडीह सीट से पांच बार जीत का रिकॉर्ड दर्ज किया है रवींद्र पांडेय ने
बेरमो : एनडीए के एक फैसले के बाद गिरिडीह संसदीय क्षेत्र की राजनीति ने यू-टर्न ले लिया है. भाजपा की सीटिंग सीट (गिरिडीह) आजसू को दिये जाने की सहमति के बाद यहां से रिकॉर्ड पांच बार जीतने वाले सांसद रवींद्र कुमार पांडेय के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं.
बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो के साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर एवं अचानक इस सीट पर भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की बढ़ती संख्या से भी भाजपा ने अपना पिंड छुड़ाया है. बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो इस सीट से प्रबल दावेदार थे. सांसद-विधायक के बीच इस वजह से संबंध मधुर नहीं रहे. एक-दूसरे के खिलाफ टीका-टिप्पणी भी होती रही. सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे से भी अंदर ही अंदर पसोपेश में थी. यह भी बताते हैं कि करीब एक माह पहले से ही सांसद रवींद्र कुमार पांडेय को इस बात का अहसास हो गया था कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है.
इधर आजसू में फिलहाल प्रत्याशियों की एक लंबी फेहरिस्त है. उसमें खुद सुदेश महतो के अलावा उनके ससुर डॉ यूसी मेहता, टुंडी के आजसू विधायक राजकिशोर महतो, मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के अलावा आजसू के गिरिडीह लोस प्रभारी डॉ लंबोदर महतो के नाम सामने आ रहे हैं. इधर, चर्चा है कि सांसद रवींद्र पांडेय संभवत: झामुमो सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संपर्क साध सकते हैं.
झामुमो का भी रहा है भावनात्मक संबंध : झामुमो का भी गिरिडीह सीट से भावनात्मक संबंध रहा है. पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन की यह राजनीतिक जन्मभूमि है. झामुमो संस्थापक बिनोद बिहारी महतो 1991 में गिरिडीह के सांसद चुने गये थे.
इनके निधन के बाद 1992 में हुए मध्यावधि चुनाव में उनके पुत्र राजकिशोर महतो बतौर झामुमो प्रत्याशी इस क्षेत्र के सांसद बने. 2004 में टेकलाल महतो सांसद बने. वर्ष 2014 के लोस चुनाव में झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो मात्र 40 हजार मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी रवींद्र पांडेय से पराजित हुए थे. इस चुनाव में सिर्फ बाघमारा विस से भाजपा को 80 हजार से ज्यादा मत प्राप्त हुए थे.
जब दल बड़ा हो जाता है, ताे फिर नीचे के लाेग नजर नहीं आते हैं : रवींद्र पांडेय
भाजपा सांसद रवींद्र कुमार पांडेय ने शनिवार को कहा कि गिरिडीह सीट आजसू को दिये जाने से मुझे कोई मलाल नहीं है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सोच समझ कर ही लिया है. अब पार्टी का जो आदेश आयेगा, हम उसका अक्षरश: पालने करेंगे.
निश्चित रूप से उनके पास ऐसी कोई रिपोर्टिंग होगी कि भाजपा इस बार इस सीट को नहीं निकाल सकती है, इसलिए गठबंधन के तहत आजसू के कोटे में इस सीट को दे दिया गया है. टिकट काटने की जानकारी को लेकर हमसे भाजपा के किसी नेता की बात नहीं हुई है. उन्हाेंने कहा : दल जब बड़ा हो जाता है, तो फिर उसमें नीचे के लोग नजर नहीं आते हैं.
भाजपा की परंपरागत सीट है गिरिडीह इसे नहीं छोड़ना चाहिए : बाटुल
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा गिरिडीह लोकसभा सीट आजसू को दिये जाने का बेरमो के भाजपा नेताओं ने विरोध किया है. बेरमो से भाजपा विधायक योगेश्वर महतो बाटुल ने कहा कि गिरिडीह लोकसभा सीट भाजपा की परंपरागत सीट रही है. पूर्व मंत्री लालचंद महतो ने कहा कि एनडीए के घटक दल आजसू को गिरिडीह लोकसभा सीट देना भाजपा के लिए ठीक नहीं है. भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता डॉ प्रह्लाद वर्णवाल ने कहा कि गिरिडीह सीट को आजसू को देना कहीं से भी उचित नहीं है.
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