दुमका की सुग्गापहाड़ी पंचायत के आदिवासी बहुल गांवों में नहीं पहुंची बिजली, ग्रामीण हैं परेशान

Updated at : 08 Jun 2022 4:49 PM (IST)
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दुमका की सुग्गापहाड़ी पंचायत के आदिवासी बहुल गांवों में नहीं पहुंची बिजली, ग्रामीण हैं परेशान

दुमका जिला की सुग्गापहाड़ी पंचायत स्थित संताल आदिवासी बहुल गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची है. ग्रामीण बिजली नहीं मिलने से काफी परेशान हैं. आपकी सरकार- आपके अधिकार, आपके द्वार कार्यक्रम में भी ग्रामीणों ने इस समस्या की शिकायत की थी, लेकिन आज तक समाधान नहीं निकला.

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Jharkhand News: दुमका जिला अंतर्गत मसलिया प्रखंड की सुग्गापहाड़ी पंचायत के पहाड़िया और संताल आदिवासी बाहुल्य आमगाछी पहाड़ गांव में झारखंड राज्य बनने के 22 साल बीत जाने के बाद भी आज तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पायी है. गांव में पांच से अधिक टोला है, जो दूर-दूर स्थित है. इस गांव में करीब 80 घर हैं. देश आजादी का 75 वर्ष और झारखंड राज्य का 22 वर्ष होने के बाद भी इस गांव में एक बार भी बिजली नहीं जली.

नेताओं से मिलता सिर्फ आश्वासन

10 साल पहले गांव में ट्रांसफरमर, पोल और तार लगाये गये, लेकिन बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी. आठ वर्ष पूर्व गांव में बिजली चालू करने के लिए बिजली मिस्त्री हम सभी ग्रामीणों से 50-50 रुपये की मांग की थी. पर, अधिकांश ग्रामीण पैसा देने में असमर्थ थे. इसलिए आज तक गांव में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई. ग्रामीणों का कहना है कि हर बार चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, वोट मांगते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं.

ग्रामीण सोलर प्लेट से मोबाइल चार्ज करने को मजबूर

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बिजली नहीं होने के कारण काफी परेशानी होती है. ग्रामीण सोलर प्लेट से मोबाइल चार्ज करते हैं, वहीं जिसके पास सोलर प्लेट नहीं है, वो अपना मोबाइल पहाड़ के नीचे गांव में पैसे देकर चार्ज करवाते हैं. कुछ ग्रामीण चार्ज बैटरी से LED लाइट जलाते हैं. इसी लाइट से रात्रि में बच्चे पढ़ाई करते हैं, लेकिन LED लाइट एक चार्ज में मात्र डेढ़ से दो घंटे ही चलता है.

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आंदोलन करने की तैयारी में जुटे ग्रामीण

ग्रामीणों ने कहा कि आपकी सरकार- आपके अधिकार, आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान सुग्गापहाड़ी पंचायत में जनप्रतिनिधियों को दिसंबर माह में ही लिखित आवेदन दिया गया था, पर छह माह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है. उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही बिजली आपूर्ति सेवा बहाल नहीं हुई, तो सड़क पर उतर कर आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

Posted By: Samir Ranjan.

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