बदहाल सड़क, जल संकट और भूमिगत आग से परेशान हैं बसेरिया बस्ती के लोग

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सिर्फ आश्वासन देते हैं हुक्मरान, समस्या का नहीं करते हैं समाधान

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रत्नेश मिश्रा, केंदुआ,

धनबाद जिले के वार्ड 13 में पड़नेवाले बसेरिया बस्ती के लोगों को विकास देखे वर्षों बीत गये. यहां के लोग सड़क की बदहाली के अलावा, पेयजल, स्ट्रीट लाइट की कमी, प्रदूषण व भूमिगत आग की समस्या से जूझ रहे हैं. जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रभात खबर ने बसेरिया पहुंच लोगों से बातचीत की और उनकी समस्या को सुना. बसेरिया बस्ती के लोगों की माने, तो धनबाद नगर निगम के वार्ड 13 की बड़ी आबादी बसेरिया इलाके में रहती है. लगभग 15 हजार से ज्यादा मतदाता बसेरिया एक नंबर, चार नंबर, पांच नंबर, तिवारी बस्ती, दास बस्ती, यादव बस्ती, रवानी बस्ती, धारिया जोबा, गोंदूडीह बस्ती के इलाके में रहते हैं. रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने के लिए केंदुआ बाजार जाना पड़ता है. इसकी दूरी लगभग साढ़े तीन किलोमीटर है. इस सड़क का हाल बदहाल है. कई जगह गड्ढे हैं. सड़क बनाने को लेकर इलाके के लोगों ने जिम्मेवारों से कई बार मांग की, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला.

10 से 12 दिनों में एक बार मिलता है पानी :

इस इलाके में पेयजल की बात करें, तो झमाडा की पुरानी व्यवस्था के सहारे 10-12 दिनों में एक बार पानी मिलता है. बसेरिया यादव बस्ती के लगभग घरों में लोगो के पास मवेशी है. इनके लिए पानी की जरूरत बीसीसीएल की ओर से बसेरिया आटा चक्की के पास की गयी डीप बोरिंग की जलापूर्ति से होती है. बसेरिया में उत्क्रमित उच्च विद्यालय व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी है, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं रहने से विद्यालय के बच्चों व स्वास्थ्य केंद्र के कर्मियों को परेशानी होती है.

नहीं हुई भूमिगत आग बुझाने की सार्थक पहल :

बसेरिया चार नंबर बस्ती में जमीन की नीचे लगी आग के कारण कुछ माह पूर्व हुए भू धसान को बीसीसीएल प्रबंधन ने हाल के दिनों में सीमेंट का पिलर लगा कटीली तार से एक तरफ से घेराबंदी कर दी, लेकिन आग बुझाने के लिए सार्थक पहल नहीं की गयी. इससे अनहोनी का खतरा बना रहता है.

कहते हैं लोग : विजय साव, भोलानाथ बसेरिया-

बसेरिया में समस्या ही समस्या है. सड़कें जर्जर हैं. अग्नि प्रभावित क्षेत्र है. जमीनी आग व गैस के कारण लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है. पेयजल की सुविधा नहीं है. दो किलोमीटर दूर से पानी गैलन भरकर लाना पड़ता है. हर घर नल जल योजना का पाइप जहां-तहां बिछाया गया है, लेकिन पानी की एक बूंद किसी को नसीब नहीं हुई.

सुरेश रवानी, सेवानिवृत्त बीसीसीएलकर्मी, बसेरिया-

बसेरिया में विकास का कोई काम नहीं किया गया. पानी खरीदकर या डीप बोरिंग का पानी फिल्टर कर पीना पड़ता है. यहां कोई तालाब भी नही हैं. नजदीक में एक जोड़ियां नदी है, जिसमें खदान का पानी बहता है, उसी में लोग नहाते धोते हैं. बसेरिया में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल हैं, जिसमें डाॅक्टर कभी कभी आते हैं.

सुरेंद्र यादव, मोटिया मजदूर, भोलानाथ बसेरिया-

करकेंद केंदुआ से लोगों का सामान धोबी कुल्ही, भूली, धनबाद, धारिया जोबा पहुंचाकर रोजी रोटी चल जाता था. लेकिन रास्ता खराब होने से अब ग्राहक ही नही आते हैं. रास्ते पर किसी का ध्यान नहीं है. यहां के लोगो को काफी दिक्कत है.

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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