मीठा है बेड़ो का पानी, इसलिए पीते हैं लोग

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 May 2018 5:23 AM

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खबर छपी तो जामताड़ा बीडीओ पहुंची मोजरा गांव, किया निरीक्षण, कहा पीने व खाना बनाने के काम में लाते हैं ये पानी देवघर : जामताड़ा प्रखंड के मेझिया पंचायत के मोजरा में पेयजल संकट की खबर प्रकाशित होने के बाद उक्त गांव में बीडीओ अमृता प्रियंका एक्का जांच को पहुंची. उन्होंने जांच में कुछ और […]

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खबर छपी तो जामताड़ा बीडीओ पहुंची मोजरा गांव, किया निरीक्षण, कहा

पीने व खाना बनाने के काम में लाते हैं ये पानी
देवघर : जामताड़ा प्रखंड के मेझिया पंचायत के मोजरा में पेयजल संकट की खबर प्रकाशित होने के बाद उक्त गांव में बीडीओ अमृता प्रियंका एक्का जांच को पहुंची. उन्होंने जांच में कुछ और ही पाया. बीडीओ ने ग्रामीणों से बात की. तो पता चला कि मोजरा गांव के तीन टोले में चार चापाकल में तीन ठीक हैं, एक खराब है. लेकिन गांव के लोग चापाकल रहने के बावजूद बेड़ो (कुआंनुमा गड्ढा, डोभा टाइप) का पानी पीते हैं. क्योंकि उक्त बेड़ो का पानी स्वच्छ और मीठा है. बीडीओ ने कहा कि उन्होंने खुद भी उक्त बेड़ो का पानी पीकर देखा है. वास्तव में काफी मीठा है. उन्होंने ग्रामीणों से भी बात की तो लोगों ने बताया कि चापाकल का पानी नहाने व कपड़ा धोने के काम में लाते हैं. पीने और खाना बनाने के लिए बेड़ो का पानी उपयोग करते हैं. अच्छा लगता है यह पानी.
मोजरा गांव के लोगों की समस्या : गांव में तीन टोला है. तीनों टोला में करीब एक हजार की आबादी रहती है. आदिवासी बहुल इस मोजरा गांव के तीन टोले में सात चापाकल हैं. जिनमें तीन चापाकल कई महीनों से खराब हैं. बाकी बचे चार चापाकल में दो से कम पानी निकलता है. इस कारण इतनी बड़ी आबादी दो चापाकल के पास घंटों लाइन लगाकर खड़ी रहती है, तब पानी मिल पाता है. ग्रामीणों ने कहा कि दो और चापाकल लगा दिया जाये तो पानी की जरूरत पूरी हो सकती है.
क्यों जाते हैं बेड़ो/डोभा का पानी लाने: ग्रामीणों ने कहा है कि चापाकल गांव की आबादी की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता है. इसलिए लोग दूर जाकर बेड़ो से पानी लाते हैं. बच्चे व महिलाएं सुबह होते ही पीने के पानी के लिए बेड़ो जाते हैं.
निरीक्षण के दौरान मेरे साथ ग्रामीण व मुखिया मैडम भी थीं. मैंने स्वयं पानी पी कर देखा है. कुएं की तरह बिलकुल साफ और मीठा पानी है. चापाकल रहने के बाद भी इसी का पानी उपयोग में ग्रामीण लाते हैं.
-अमृता प्रियंका एक्का, बीडीओ, जामताड़ा
सवाल
क्या डोभा का पानी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है?
क्या गांव की जो आबादी है, उसके लिए चापाकल पर्याप्त हैं?
क्या सभी चापाकल की हालत सही है, सभी पानी दे रहा है?
चापाकल का पानी खराब क्यों है या पीने लायक क्यों नहीं है? जबकि यह भूगर्भीय स्रोत है.
सातों चापाकल की मरम्मत क्यों नहीं करवा रहा है विभाग?
आखिर ग्रामीण क्यों बीडीओ के सामने अपनी समस्या बताने से कतरा रहे हैं?
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