उदासीनता: वर्ष में कम से कम 245 दिन पढ़ाई का है प्रावधान, 200 दिन की पढ़ाई में 100 फीसदी रिजल्ट कैसे !
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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देवघर : देवघर शहरी क्षेत्र के हाईस्कूल व प्लस टू हाईस्कूलों में वर्ष में दो सौ दिन ही पढ़ाई होती है, जबकि विभाग के अनुसार कम से कम 245 दिनों की पढ़ाई का प्रावधान है. इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है. छात्रों की पढ़ाई बाधित होने से सिलेबस पूरा नहीं हो पाता है. […]
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देवघर : देवघर शहरी क्षेत्र के हाईस्कूल व प्लस टू हाईस्कूलों में वर्ष में दो सौ दिन ही पढ़ाई होती है, जबकि विभाग के अनुसार कम से कम 245 दिनों की पढ़ाई का प्रावधान है. इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है. छात्रों की पढ़ाई बाधित होने से सिलेबस पूरा नहीं हो पाता है. इसका असर परीक्षा परिणाम पर भी पड़ता है. विद्यार्थियों की पढ़ाई ठप होने की चिंता न जनप्रतिनिधियों को है, न प्रशासन को और न ही सरकार को.
दरअसल, हर वर्ष श्रावणी मेले के दौरान जिला प्रशासन द्वारा सरकारी स्कूलों के भवनों का अधिग्रहण किया जाता है. इस वजह करीब एक दर्जन हाईस्कूल व प्लस टू स्कूलों में 48 से 50 दिन तक पठन-पाठन बाधित रहती है. यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन इसकी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अबतक किसी से पहल नहीं की. इसका सीधा असर छात्र-छात्राओं के मैट्रिक व इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम सहित विभिन्न कक्षाओं की वार्षिक परीक्षा परिणाम पर पड़ता है.
एकेडमिक कैलेंडर में वर्ष में 63 दिन छुट्टी है घोषित : जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा जारी एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार एक वर्ष में 18 दिन की गरमी छुट्टी के साथ-साथ विभिन्न पर्व व महापुरुषों की जयंती को लेकर कुल 63 दिन की छुट्टी घोषित है. इसके अलावा प्रत्येक वर्ष में 52 रविवार को स्कूलों में शैक्षणिक कार्य सहित सभी कामकाज ठप रहता है. इन छुट्टियों के बाद श्रावणी मेले के दौरान 48 से 50 दिन तक विद्यालय भवन का अधिग्रहण कर लिया जाता है. छुट्टी के आंकड़ों पर गौर करें तो हर वर्ष 163 दिन तक विद्यालय में पठन-पाठन ठप रहता है.
विद्यालय बंद होने से छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम पर पड़ रहा असर
श्रावणी मेले के दौरान विद्यालय भवन का अधिग्रहण होने के कारण न सिर्फ पठन-पाठन ठप रहता है, बल्कि बच्चे नियमित रूप से वर्ग कक्ष में उपस्थित नहीं हो पाते हैं. इसका प्रतिकूल प्रभाव मैट्रिक, इंटरमीडिएट सहित वर्ग कक्ष के फाइनल परीक्षा परिणाम पर भी पड़ता है. मेले के दौरान अधिग्रहण किये गये विद्यालय भवन की मैट्रिक परीक्षा परिणाम पर गौर करें तो हाइस्कूल रिखिया का परिणाम 44.40 फीसदी रहा. वहीं हाइस्कूल जसीडीह का 54.96 फीसदी, मातृ मंदिर बालिका उच्च विद्यालय का 67.69 फीसदी, हाइस्कूल तपोवन का 69.76 फीसदी, आरएल सर्राफ हाइस्कूल का 74.87 फीसदी, आरमित्रा प्लस टू स्कूल का 77.70 फीसदी तथा जीएस हाइस्कूल का परीक्षा परिणाम 78.99 फीसदी रहा. अगर नियमित पठन-पाठन विद्यालय में संचालित हो तो इससे परीक्षा परिणाम में गुणात्मक सुधार की संभावना है.
जनप्रतिनिधियों ने कहा
श्रावणी मेले में विद्यालयों में पठन-पाठन बाधित होता है. सरकार व हमलोग काफी चिंतित हैं. जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था की जायेगी. इससे विद्यालयों में पठन-पाठन नियमित होगा व बच्चों को इसका लाभ मिलेगा.
– राज पलिवार, श्रम मंत्री, झारखंड सरकार
श्रावणी मेले के दौरान शिक्षण संस्थान में पठन-पाठन बंद होने का मामला मेला प्राधिकार की बैठक में उठाया था. मुख्यमंत्री द्वारा स्थायी समाधान का आश्वासन दिया गया था. पुन: इस मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में देंगे. जल्द ही स्थायी समाधान निकलेगा.
– नारायण दास, विधायक देवघर
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