मनरेगा से प्रखंड स्तर पर दी जाती है स्वीकृति

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बकरी शेड, पशु शेड, मुरगी शेड की दी जाती है स्वीकृति देवघर : मधुपुर प्रखंड के साप्तर पंचायत की मुखिया व उनके पति को बकरी शेड के एवज में वसूली के आरोप में एसीबी की टीम द्वारा गिरफ्तारी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कई पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर प्रखंड के पदाधिकारियों में हड़कंप है. पूर्व […]

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बकरी शेड, पशु शेड, मुरगी शेड की दी जाती है स्वीकृति

देवघर : मधुपुर प्रखंड के साप्तर पंचायत की मुखिया व उनके पति को बकरी शेड के एवज में वसूली के आरोप में एसीबी की टीम द्वारा गिरफ्तारी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कई पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर प्रखंड के पदाधिकारियों में हड़कंप है. पूर्व में कई प्रखंडों भी पंचायत से लेकर प्रखंड तक बकरी शेड, पशु शेड व मुरगी शेड में वसूली की शिकायतों समय-समय पर आती रही है. दरअसल मनरेगा से 60-40 रेश्यु मेंटेन करने के लिए प्रखंड स्तर पर पक्का शेड बनाने की स्वीकृति मिली है.
इस अनुसार जिले भर बकरी शेड, पशु शेड, मुरगी शेड की स्वीकृति दी जाती है. मनरेगा से तीनों शेड का मॉडल प्राक्कलन है. बकरी शेड में 65 हजार, पशु शेड में 67 हजार व मुरगी शेड में 61 हजार रुपये का मॉडल प्राक्कलन बना है. इन शेड की स्वीकृति के लिए लाभुकों का चयन ग्राम से की जाती है, उसके ग्राम पंचायत में मुखिया व पंचायत सचिव के माध्यम से अभिलेख तैयार कर प्राक्कलन के साथ प्रखंड में बीडीओ के पास भेजी जाती है.
मनरेगा में बीडीओ के स्तर से मनरेगा की योजनाओं की स्वीकृति का मापदंड बना है, इसलिए मुखिया की अनुशंसा पर बीडीओ शेड की स्वीकृति देते हैं. कई प्रखंडों में इस शेड की स्वीकृति देने में लाभुकों से पांच से दस हजार तक की वसूली की शिकायतें पूर्व में भी होती रही है.
मोहनपुर, देवीपुर व करौं में हुई थी शिकायत
मनरेगा से शेड में वसूली की शिकायतें मधुपुर के साथ-साथ पूर्व में मोहनपुर, देवीपुर व करौं में भी वसूली की शिकायतें हुई थी. मोहनपुर में पंचायत समिति की बैठक में कुछ पंचायत समिति सदस्यों ने पशु शेड के एवज में वसूली के खिलाफ जमकर हंगामा किया था. देवीपुर व करौं में भी पशु शेड के एवज में वसूली की बातें उठती रही है.
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