अब बच्चे पढ़ेंगे मान्यता प्राप्त स्कूल में, कच्ची सड़क से मिलेगी निजात

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चंदनकियारी: चंदनकियारी के झरना ग्राम स्थित श्री बाबा रामदास सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के बच्चों को अब कच्ची सड़क के रास्ते स्कूल नहीं जाना पड़ेगा. साथ ही बच्चों को बोर्ड की परीक्षा देने के लिए दूसरे स्कूल पर निर्भर नहीं रहना होगा. अन्य बुनियादी सुविधाएं भी मिलेंगी. बुधवार को बोकारो के डीसी राय महिमापत रे […]

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चंदनकियारी: चंदनकियारी के झरना ग्राम स्थित श्री बाबा रामदास सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के बच्चों को अब कच्ची सड़क के रास्ते स्कूल नहीं जाना पड़ेगा. साथ ही बच्चों को बोर्ड की परीक्षा देने के लिए दूसरे स्कूल पर निर्भर नहीं रहना होगा. अन्य बुनियादी सुविधाएं भी मिलेंगी. बुधवार को बोकारो के डीसी राय महिमापत रे स्कूल पहुंचे. स्कूल के क्रियाकलापों का जायजा लिया. एक-एक क्लास में गये. बच्चों से बात की. बिना किसी तरह की सरकारी सहायता के स्कूल में पठन-पाठन कार्य देखकर डीसी श्री रे काफी प्रभावित हुए. डीसी ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने वाले इस स्कूल को जिला प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया.
12वीं की पढ़ाई क्यों नहीं होती : डीसी ने प्राचार्य बिमान चटर्जी से पूछा : क्या यहां 12वीं तक की पढ़ाई की व्यवस्था है? इस पर प्राचार्य ने कहा : 12वीं तो दूर की बात है, 10वीं बोर्ड के लिए मान्यता नहीं मिली है. आवेदन देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है. इस पर डीसी ने कहा : स्कूल को मान्यता दिलाने की दिशा में जरूरी कार्रवाई की जायेगी. इस संबंध में डीसी ने तत्काल डीइओ से फोन पर बात भी की.
सड़क बननी चाहिए : झरिया-मानपुर सड़क से 300 मीटर की दूरी पर स्थित स्कूल में जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है. बच्चे पगडंडी के सहारे स्कूल जाते हैं. बरसात के दिनों में यह रास्ता मुसीबत का कारण बनता है. डीसी ने इस समस्या पर भी गंभीरता दिखायी. डीसी ने प्राचार्य से इस संबंध में स्थानीय बीडीओ से बात करने की सलाह दी. कहा : स्कूलों को मुख्य मार्ग से जोड़ने से बच्चों को परेशानी से बचाया जा सकता है. यह सड़क बननी चाहिए.
कंप्यूटर ऑपरेट करना जानते हो : डीसी राय महिमापत रे ने स्कूल निरीक्षण के दौरान बच्चों से सीधा संवाद किया. बच्चों से पूछा : कंप्यूटर ऑपरेट करना जानते हो? इस पर बच्चों ने कहा : कंप्यूटर में क्या करना है सर, हमलोग बहुत कुछ जानते हैं. डीसी ने इसके बाद बच्चों का टेस्ट लिया. डीसी ने कहा : मन लगा कर पढ़ाई करो, हर संभव मदद की जायेगी. प्राचार्य ने डीसी से विद्यार्थियों के अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के मद्देनजर स्कूल में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था कराने का आग्रह किया.
टाटा कंपनी ने बनवाये हैं कई भवन : झरना बाबा ने विभिन्न संस्थानों के सहयोग से विद्यालय को खड़ा किया. टाटा कंपनी द्वारा विद्यालय में कई भवन बनाये गये हैं. लिटरेसी इंडिया नामक एनजीओ के सौजन्य से कंप्यूटर क्लास, लड़कियों के लिए सिलाई और ब्यूटीशियन कोर्स चलाया जा रहा है. एनजीओ की ओर से गुरुचरण ठाकुर को तकनीकी शिक्षा देने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है. विद्यालय में पढ़नेवाले गरीब बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है. सक्षम अभिभावक वार्षिक अनुदान के रूप में कुछ पैसे देते हैं. शिक्षकों को झरना बाबा द्वारा प्रोत्साहन के रूप में मानदेय दिया जाता है.
कौन हैं झरना बाबा
करीब 45 वर्ष पूर्व ओड़िशा से आये ‘श्री श्री 1008 महंत बाबा रामदास जी महाराज’ के नाम से ख्यातिलब्ध संत महामुनि स्थानीय लोगों एवं इनके भक्तों में ‘झरना बाबा’ के नाम से खासे लोकप्रिय हैं. झरना बाबा महिला-बाल कल्याण एवं साक्षरता के संबंध में बात छेड़ते ही किसी भी युवा उत्साही की भांति खिल पड़ते हैं. बाबा ने झरना में नीलांचल आश्रम की स्थापना की. इसी गांव के हराधन मांझी द्वारा दान में दी गयी जमीन पर आश्रम का विस्तार किया. पूरे देश में झरना बाबा के विभिन्न तीर्थ स्थानों में नीलांचल आश्रम हैं. झरना बाबा ओड़िशा समेत कई जगहों पर विद्यालयों का संचालन करते हैं.
लक्ष्मी बनीं प्रेरणास्रोत
श्री बाबा रामदास सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की स्थापना में लक्ष्मी कुमारी प्रेरणास्रोत बनीं. झरना बाबा को एक दिन एक आदिवासी लड़की लक्ष्मी कुमारी दिखी. पढ़ाई की उम्र होने के बाद भी लक्ष्मी मवेशी चराने का काम करती थी. लक्ष्मी के घर की माली हालत भी ठीक नहीं थी. इसी के बाद बाबा रामदास ने शिक्षा दान करने का मन बनाया. गांव व समाज को शिक्षित करने को मिशन बना लिया. झरना बाबा का कहना है कि ‘मेरा उद्देश्य सिर्फ यही है कि हर बच्च शिक्षित, अनुशासित और संस्कारी हो. महिलाओं पर अत्याचार बंद हो और लोग आपराधिक एवं राक्षसी प्रवृत्ति का त्याग कर भगवद् भजन के प्रति समर्पित रहें.’
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