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पिता और दोनों बेटियां नेत्रहीन, खाने के लाले

गुमला: पालकोट प्रखंड स्थित तेली मुहल्ले में एक परिवार ऐसा है, जहां पिता त्रिलोचन साहू व दोनों बेटियां कौशल्या कुमारी (17) व पूनम कुमारी (16) नेत्रहीन हैं. आंखों की रोशनी नहीं रहने के कारण परिवार को खाने के भी लाले पड़ रहे हैं. 65 साल की बूढ़ी दादी जीतनी देवी किसी प्रकार मजदूरी कर परिवार […]

गुमला: पालकोट प्रखंड स्थित तेली मुहल्ले में एक परिवार ऐसा है, जहां पिता त्रिलोचन साहू व दोनों बेटियां कौशल्या कुमारी (17) व पूनम कुमारी (16) नेत्रहीन हैं. आंखों की रोशनी नहीं रहने के कारण परिवार को खाने के भी लाले पड़ रहे हैं. 65 साल की बूढ़ी दादी जीतनी देवी किसी प्रकार मजदूरी कर परिवार चला रही है.

उसने पेंशन के लिए ब्लॉक में आवेदन दिया है. पर अब तक पेंशन मिलना शुरू नहीं हुआ है. हालांकि त्रिलोचन को चार सौ रुपये पेंशन मिलती है, जो चार लोगों के पेट पालने के लिए नाकाफी है. त्रिलोचन का कहना है कि उनके पास 75 डिसमिल खेत है. साझा में कुछ लोगों से खेती कराते हैं. इससे कुछ धान मिल जाता है. परिवार के लोगों ने प्रशासन से सहयोग की गुहार लगायी है.

अंधेपन के कारण मां घर छोड़ कर भाग गयी : कौशल्या व पूनम जन्म से ही नेत्रहीन है. दोनों बहनें जब दो व तीन साल की थी, उसकी मां लीलो देवी घर छोड़ कर मायके चली गयी. बताया जाता है कि नेत्रहीन पति व बेटियों के कारण उसने ऐसा किया. तब से दादी जितनी देवी ही दोनों पोतियों को पाल रही है.

पढ़ना चाहती हैं नेत्रहीन बहनें
घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए दादी जितनी देवी ने नेत्रहीन कौशल्या व पूनम को रांची के एक आश्रम में डाल दिया था. बरियातू स्थित एक नेत्रहीन स्कूल में दोनों बहनें पढ़ती थीं. गत मार्च माह में दोनों स्कूल से अपने घर आ गयी. इनका कहना है कि उन्होंने छठी क्लास तक ब्रेल लिपी से पढ़ाई की है. आगे भी पढ़ना चाहती है, लेकिन इसके लिए पैसे नहीं हैं. नेत्रहीन स्कूल में रखने के लिए पैसा मांगा जाता है. इसलिए स्कूल छोड़ दिया. दोनों बहनों का कहना है कि अगर वे पढ़ाई पूरी कर लेती हैं, तो नि:शक्त बच्चों को पढ़ायेगी.

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